BREAKING

दुर्ग-भिलाईफीचर्डसाक्षात्कार

महिलाएं एक बेहतर समाज निर्माण और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे : डॉ. प्रियंका वर्मा

दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस)। मेरे माता-पिता ने बचपन से ही अनुशासन में रहना सिखाया, शिक्षा के लिए हमेशा प्रेरित किया। इसका असर यह हुआ कि केजी वन से लेकर पूरा स्कूल समय तक मेरा अटेंडेंस सौ प्रतिशत रहा। कड़ी मेहनत करना मैंने अपने माता-पिता से सीखी हूँ, उन्होंने हमेशा ऑल राउंडर बनने के लिए प्रेरित किया और मैंने भरपूर कोशिश किया और सफल रही। यह सब बातें दुर्ग जिला में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर डॉ. प्रियंका वर्मा ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया।
डिप्टी कलेक्टर डॉ. प्रियंका वर्मा की प्रारंभिक और हायरसेकंडरी तक कि शिक्षा होलीक्रॉस कॉन्वेंट स्कूल, अम्बिकापुर में हुई। इन्होंने शासकीय डेंटल कॉलेज, रायपुर से बीडीएस की डिग्री हासिल की।  वर्ष 2012 के सीजीपीएससी में इन्होंने हिस्सा लिया और अपने पहले ही प्रयास में इनका चयन सहायक लेखा सेवा अधिकारी के पद पर हुआ लेकिन इन्होंने ज्वाइन नही किया। वर्ष 2013 के सीजीपीएससी में इन्होंने पुनः हिस्सा लिया और अपने दूसरे ही प्रयास में 6 रैंक के साथ डिप्टी कलेक्टर के लिए चयन हुआ।
प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टर के रुप में इनकी पहली पदस्थापना सूरजपुर में हुई जहां इन्होंने करीब डेढ़ वर्ष तक अपनी सेवाएं दी।
इसके बाद इन्होंने अगस्त 2017 से मार्च 2018 तक जनपद पंचायत सीईओ, कवर्धा के पद पर अपनी सेवाएं दी।
मार्च 2018 से जुलाई 2020 तक इन्होंने डिप्टी कलेक्टर, बालोद के पद अपनी सेवाएं दी।
जुलाई 2020 में सरकार ने इन्हें दुर्ग जिले के डिप्टी कलेक्टर की अहम जिम्मेदारी दी है जिसे यह जिम्मेदारी के साथ निभा रही है। वर्तमान में यह नजूल अधिकारी और कोविड-19 कि नोडल अधिकारी के पद की जिम्मेदारी निभा रही है।
सिंगिंग और सोशल एक्टिविटी में विशेष रुचि रखने वाली डिप्टी कलेक्टर डॉ. प्रियंका वर्मा अपने माता-पिता को अपना प्रेरणास्रोत मानती है।
इन्होंने बताया कि मेरी माताजी एक शिक्षक है, बचपन से ही उनको मल्टी टास्क काम करते देखा है, उनको देखकर ही मुझे भी प्रशासनिक सेवा में आने की प्रेरणा मिली। लोगो की समस्याओं को सुनकर उनका निराकरण करना, शासन की योजनाओं को बेहतर तरीके से आम जनता तक पहुंचाना की इच्छा मन मे लिए मैंने इस जॉब की तैयारियां शुरू की और लोगो को समस्याओं का निराकरण कर रही हूँ।
सूरजपुर में पदस्थापना के दौरान विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगो के लिए काम किया। ओड़गी क्षेत्र जहां पंडो लोग रहते है, उनके पास शासन की योजनाएं पहुंचाने का काम किया गया।
पंडरिया में सीईओ रहते हुए पीएम आवास योजना के तहत आवास बनाने के लिए लोगो के बीच गए, उनकी क्या-क्या समस्याएं है यह सब करीब से देखने को मिला, फिर उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए योजनाएं बनाकर कलेक्टर सर को दिया, उसके अनुसार कार्य किया गया। वहां 2017 में मलेरिया महामारी के रुप में फैली हुई थी, उस पर भी काम किया गया।
मैंने अपनी माताजी से काफी कुछ सीखा है। मेरी माता जी के सहयोग और मार्गदर्शन से मैं आज यहां तक पहुंची हूँ, मेरी लिए वो एक बैकअप रही है। उन्होंने हमेशा मुझे अपना बेस्ट करने के लिए प्रेरित किया। अपने लक्ष्य को निर्धारित कर उसे प्राप्त के लिए प्रेरित किया, इसी वजह से आज मैं इस मुकाम पर हूँ।
आत्म विश्वास के साथ रहे, आत्म निर्भर बने, सकारात्मक उद्देश्यों को निर्धारित करते हुए अपना लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करें। महिलाएं एक बेहतर समाज निर्माण और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे।

Related Posts