दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस)। हमारा परिवार बड़ा और संयुक्त परिवार था। पूरे परिवार को मेरी दादी देखरेख करती थी। वो सबको एक समान एक नजर से देखती थी, उनकी प्रबंधन क्षमता जबरदस्त थी, इतने बड़े परिवार को संभालने के बाद भी कभी वो तनाव में नही रहती थी, मेरी दादी मेरे लिए प्रेरणास्रोत है मैं उन्ही के जैसे बनना चाहती हु। यह सब बातें दुर्ग तहसीलदार पार्वती पटेल ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने आपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया।
तहसीलदार पार्वती पटेल की प्रारंभिक शिक्षा ग्राम घाटकछार, तहसील सराईपाली जिला महासमुंद के एक शिक्षकीय शासकीय विद्यालय में हुई थी। हाईस्कूल तक कि शिक्षा इन्होंने आईईएमबीएच स्कूल, कुटेला, सराईपाली से पूर्ण किया। हायरसेकंडरी तक कि शिक्षा शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सराईपाली से किया।
वर्ष 1998 में इन्होंने स्नातक (बायोलॉजी) राजा बीरेन्द्र बहादुर महाविद्यालय, सराईपाली से किया।
पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से इन्होंने वर्ष 2009 में इंग्लिश साहित्य तथा वर्ष 2011 में राजनीतिक विज्ञान से डबल स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल किया। वर्ष 2010 में इन्होंने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा भी पास किया।
वर्ष 2007 में इनका चयन शिक्षकर्मी वर्ग दो में हुआ। शासकीय गोलवलकर विद्यालय, सराईपाली में इन्होंने वर्ष 2010 तक अपनी सेवाएं दी।
वर्ष 2010 में इनका चयन महिला एवं बाल विकास विभाग में सुपरवाइजर के पद पर हुआ जहां इन्होंने वर्ष 2013 तक अपनी सेवाएं दी।
वर्ष 2008 के सीजीपीएससी में इन्होंने हिस्सा लिया और नायब तहसीलदार के लिए चयनित हुई। इस परीक्षा का परिणाम वर्ष 2013 में घोषित हुआ और इन्हें रायपुर में पोस्टिंग मिली।
रायपुर में इन्होंने वर्ष 2013 से 2018 तक अपनी सेवाएं दी इस दौरान यह अभनपुर और आरंग तहसीलदार रही।
वर्ष 2018 से 2019 तक इन्होंने गरियाबंद जिले के छुरा तहसील में अपनी सेवाएं दी।
फरवरी 2019 से लेकर अभी तक इन्हें शासन से दुर्ग तहसीलदार की जिम्मेदारी दी है जिसे यह जिम्मेदारी से निभा रही है।
गार्डनिंग, कुकिंग और गाना सुनने में विशेष रुचि रखने वाली तहसीलदार पार्वती पटेल ने बताया कि परिवार और समाज मे अपना योगदान देना चाहती थी इसलिए इसलिए प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए लगातार प्रयास करती रही और आज इस मुकाम पर पहुंची हूँ।
जिस काम के लिए शासन ने हमे नियुक्त किया है उस काम के लिए अपना अधिकतम करने का प्रयास रहा है। शासन की योजनाओं को और जनता के कार्यो को सही समय सीमा में पूरा करना मेरा उद्देश्य है।
महिला दिवस यही कहना चाहूंगी कि हम महिला सशक्तिकरण की बात करते है लेकिन वो अब तक नही हो पाया है, इसलिए महिला दिवस मनाया जाता है। कानून में महिला और पुरूष में कोई भेदभाव नही किया जाता है, कानून तो संरक्षण देने के उद्देश्य से सकारात्मक भेदभाव करती है। यहां योजनाओं की कमी नही है, हमारे देश मे कमी है तो समाजिक परिवेश और विचार में उन योजनाओं को लागू करने में तथा महिलाओं को उनके अधिकार देने में। आज ऐसा कोई भी क्षेत्र नही है जहां महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज नही कराई है।
महिलाओं के लिए विशेष कुछ ना करे किंतु महिलाओं की प्रगति में बाधक ना बने, उनका सम्मान करें, उनके अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण ना करे, उनको निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र बनाये। महिलाएं भी आने अधिकारों के प्रति जागरूक रहे, अपने आप को कमजोर न समझे। अपने परिवार, समाज तथा देश की उन्नति में योगदान दे।
मेरे पिताजी एक शिक्षक थे, उन्होंने मुझे पढ़ाने के लिए अपना स्थानांतरण करवाया ताकि मैं अच्छी शिक्षा प्राप्त कर काबिल बन सकू। मेरे पढ़ाई और नौकरी में पिताजी का बड़ा योगदान रहा। मेरे भाई भी शिक्षा विभाग में कार्यरत है।
महिला दिवस पर संदेश….(देखे वीडियो)
https://youtu.be/t2LjiF3I0N0














