भिलाई। आज ट्रांसपोर्टिंग का काम बहुत ही दयनीय स्थिति से गुजर रहा है, एशिया का सबसे बड़ा भिलाई स्टील प्लांट है जहां से हजारों टन माल ट्रांसपोर्ट के द्वारा परिवहन किया जाता है लेकिन व्यवस्था सही नही होने की वजह से स्थानीय गाड़ी मालिक ट्रक बेचने पर मजबूर है क्योंकि काम नहीं मिल रहा है। मैं सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं की अगर सरकार पहल नहीं करेगी तो राज्य सरकार को लाखों रुपए की टेक्स से वंचित होना पड़ेगा। हमारे पड़ोसी राज्य ओडिसा जहाँ पर आप ओड़िसा टैक्स भरकर काम नही कर सकते आपको ट्रक को ओडिशा पासिंग करना होगा तभी आप काम ओडिसा में कर सकते है। आप ओडिसा में टीपी परमिट बना कर काम नहीं कर सकते। यहां पर व्यवस्था सही नहीं होने की वजह से छत्तीसगढ़ की गाड़ियां ओडिसा पासिंग करा कर काम कर रही है। जिसके चलते लाखों रुपए की राजस्व की क्षति हो रही है। छत्तीसगढ़ ट्रक टेलर ऑनर एसोसिएशन दुर्ग जिलाधीश से मांग करती है कि यूनियन को सहयोग करें ताकि वेंडरधारी ट्रांसपोर्ट अपना माल यूनियन में बुक करें तथा क्रमबद्ध तरीके से गाड़ियों को लोडिंग हेतु भेजा जाए ताकि स्थानीय गाड़ी मालिकों को माल मिल सके ऐसे नहीं किया गया तो यहां भरपूर मात्रा में काम होने के बावजूद भी यहां के गाड़ियां दूसरे राज्यों में धीरे-धीरे चली जाएंगी, जिसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा। छत्तीसगढ़ के बाहर के ट्रांसपोर्टर भिलाई स्टील प्लांट में ऑन लाइन टेंडर भरकर काम लेता है तथा अपनी ही गाड़ी में माल भरकर दूसरे प्रदेशों में ले जाता है। यहां के गाड़ी मालिक देखते रह जाता है अब सभी वेंडरो को अपना माल यूनियन में बुक करना होगा और यूनियन से क्रमबद्ध तरीके से गाड़ियों को लोडिंग हेतु भेजी जाएगी। जिससे सबको काम मिल सके इससे सरकार को राजस्व में वृद्धि होगी तथा जो गाड़ियां यहां से दूसरे राज्यों में काम की तलाश में चली गई है। वह दोबारा वापस आकर दुर्ग आरटीओ में पास कराकर टैक्स जमा करना चालू कर देंगे। 25 वर्षों से एसीसी यूनियन चल रही थी, जिसमें सबको भरपूर मात्रा में स्थानीय गाड़ी मालिकों को काम मिलता था, आज एसीसी मैनेजमेंट गणित कर कुछ लोभी ट्रांसपोर्टरों को काम देकर यूनियन को तोड़ दिया। जिसके चलते स्थानीय गाड़ी मालिक एसीसी प्लांट का धूल फ्री में पी रहे हैं और बीमार हो रहे है जो गाड़ी मालिक वेंडर नहीं ले सकते हैं उनको गाड़ियों को बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है। आज एसीसी प्लांट गिने-चुने ट्रांसपोर्टरों का प्लांट बन के रह गया है इसमें आज स्थानीय गाड़ी मालिक गाड़ी बेचने पर मजबूर हो चुके हैं। हम सभी जिलाधीश से निवेदन करना चाहते हैं कि आप प्लांटों को निर्देश करें की गाड़ियों को यूनियन के माध्यम से क्रमबद्ध तरीके से लोडिंग हेतु भेजा जाए हमारे पास भिलाई स्टील प्लांट, एसीसी प्लांट दुर्ग जिले में स्थित है, इसके बावजूद स्थानीय लोगों को काम नहीं मिल रहा है। किलोमीटर के हिसाब से भाड़े तय करें ऑटो रिक्शा, बस का किराया यहां तक की एक बंद लिफाफे का भी किराया सरकार तय करती है। हम सरकार से मांग करते हैं कि हमारी गाड़ियों के भाड़े भी सरकार तय करे। हमें इस विषय पर और चिंतन करने की आवश्यकता है, आइए हम सभी मिलकर हाथ में हाथ मिलाते हुए भिलाई स्टील प्लांट, एसीसी जामुल सीमेंट में क्रमबद्ध तरीके से गाड़ियों को लोड करें, उदाहरण स्वरूप हमारे छत्तीसगढ़ में बस्तर यूनियन, भानूप्रतापपुर परिवहन संघ, दल्लीराजहरा ट्रक मालिक संघ, उड़ीसा, दक्षिण भारत में नामक्कल यूनियन जिन्होंने साबित कर दिया है कि संगठन में ताकत है वहां पर सभी गाड़ी मालिक खुश है। उनसे जब माल बचता है तब बाहर की गाड़ी को लोड देते है बाहर की गाड़ियां छत्तीसगढ़ से बिना रोक-टोक के माल भरती हैं और चली जाती हैं क्योंकि हमारे पास कोई भी व्यवस्था नहीं है ताकि उनको रोक सके।
धन्यवाद
आपका
प्रभुनाथ बैठा,
संयोजक,
छत्तीसगढ़ ट्रक ट्रेलर ऑनर एसोसिएशन














