प्रयागराज (ए)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रयागराज ने प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए माहौल बनाकर रखा है। इस बात को उन्होंने कुम्भ 2019 में देखा और महसूस किया। जब रातभर तैयारी करने वाले प्रतियोगी दिन में शिविरों में जाकर संतों के भजन व प्रवचन सुनते थे, संगम में स्नान करते थे और भंडारे का स्वाद चखते थे। सीएम ने प्रयागराज के सभी प्रतियोगितयों को धन्यवाद दिया कि उन्होंने यहां प्रतियोगी परीक्षाओं का माहौल बना रखा है। मुख्यमंत्री ने सोमवार को यह बातें मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के ऑनलाइन उद्घाटन के दौरान प्रयागराज की शिष्या सिंह राठौर के सवाल पर कही। सीएम ने कहा कि प्रयागराज धर्म, ज्ञान व न्याय की नगरी है।
प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं के स्वप्नों को मिलेगी अब सही दिशा और रफ्तार… 'अभ्युदय' योजना का शुभारंभ एवं योजना में पंजीकृत अभ्यर्थियों से संवाद… https://t.co/MqmX0zOrwl
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) February 15, 2021
मुख्यमंत्री ने अभ्युदय योजना के उद्घाटन पर प्रयागराज, लखनऊ, गोरखपुर, मेरठ व वाराणसी के प्रतियोगियों से बात की। प्रयागराज की शिष्या सिंह राठौर ने सीएम से पूछा कि पढ़ाई में एकाग्रता के लिए क्या करना चाहिए। इस पर सीएम ने कहा कि मैं तो योगी हूं। योगी लोग मानते हैं कि इस देश में लोग भाग्य पर अधिक भरोसा करते हैं। लेकिन मुझ जैसा व्यक्ति यह मानता है कि भाग्य के साथ परिश्रम व पुरुषार्थ भी होना चाहिए। परिश्रम व पुरुषार्थ भी लोक कल्याणकारी होना चाहिए। इसके साथ किया गया काम ही सकारात्मकता लाएगा। सकारात्मक सोच के लिए संयमित दिनचर्या होनी चाहिए। अक्सर प्रतियोगी देररात तक पढ़ते हैं और सुबह देर से उठते हैं। यह क्रम दिनचर्या में असंतुलन पैदा करता है। जिससे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। सीएम ने शिष्या सिंह राठौर के सवाल के जवाब में कहा कि यहां उद्देश्य सिर्फ कोचिंग देना नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच देना है। जिससे व्यक्ति स्वयं के स्वास्थ्य पर ध्यान रखकर लंबे समय तक काम करने वाला बन सके।
कोटा और प्रयागराज में फंसे छात्रों से आया अभ्युदय का विचार
मुख्यमंत्री से सबसे पहले वाराणसी के छात्र कपिल ने पूछा कि अभ्युदय योजना का विचार उनके मन में कैसे आया। मुख्यमंत्री ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान कोटा व प्रयागराज में हजारों छात्र फंसे थे। उन्हें सुरक्षित घर तक पहुंचाना चुनौती थी। इसके लिए अफसरों से कहा कि वे बसें चलाएं। सीएम ने कहा कि प्रयागराज से लगभग 14 हजार छात्र-छात्राओं को घर भेजा गया था। हालांकि उस वक्त लोगों ने विरोध किया, लेकिन छात्र सुरक्षित घर पहुंच गए। उसी वक्त यह विचार कौंधा कि अगर ऐसी व्यवस्था हर जिले में हो तो क्यों लोग पढ़ाई के लिए बाहर जाएंगे। जब यह बात उन्होंने अफसरों से कही तो अफसरों ने योजना बनाकर दी। सीएम ने कहा कि प्रतिभाओं की कमी नहीं है। हम अच्छी फैकेल्टी भी लाएंगे और अनुभवी अफसर भी आपका मार्गदर्शन करेंगे। फिलहाल मंडल मुख्यालयों पर इसे शुरू किया जा रहा है। अगले चरण में सभी जिलों में ऐसी कोचिंग चलेगी।
कार्यक्रम में सीएम के संवाद के बाद एक सेशन चला। जिलाधिकारी भानु चंद्र गोस्वामी, सीडीओ सीपू गिरि सहित तमाम अफसरों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरूआत की। डीएम ने प्रतियोगी छात्र-छात्राओं को उत्साह के साथ आगे बढ़ने के लिए कहा। वहीं दिल्ली की आस्था आईएएस से आए आर कुमार ने संघ लोक सेवा आयोग, लोक सेवा आयोग के सिलेबस की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पढ़ाई और समय प्रबंधन कैसे करना है। कार्यक्रम में लगभग 150 छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। 71 छात्र-छात्राएं हर नारायण सिंह पीजी कॉलेज के थे। प्रधानाचार्य डॉ. अजय गोविंद राव ने बताया कि इसमें 55 छात्राएं और 16 छात्र हैं।
जीजीआईसी में संचालित होंगी कक्षाएं, डीपीओ लेंगे क्लास
अभ्युदय योजना के तहत कक्षाओं का संचालन पहले दिन जीजीआईसी में होगा। मेडिकल कॉलेज के पास संचालित जीजीआईसी की दो स्मार्ट कक्षाओं में क्लास चलेगी। पहले दिन डीपीओ पंकज मिश्र पढ़ाएंगे। आगे का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया जाएगा। पंकज मिश्र ने इसका पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए विशेष योगदान दिया है।















