मां सरस्वती अज्ञानता के अंधकार को मिटाने वाली हैं। उन्हें साहित्य, संगीत, कला की देवी माना जाता है। बसंत पंचमी का दिन मां सरस्वती को समर्पित है। इस दिन मां का सच्चे मन से पूजन करने से विद्या और बुद्धि की प्राप्ति होती है। मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए कुछ आसान से उपाय कर सकते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में। मां सरस्वती का सबसे पहला उल्लेख ऋग्वेद में है। ऋग्वेद में वह एक नदी का प्रतिनिधित्व करती हैं और देवता उसकी रक्षा करते हैं। बसंत पंचमी के दिन कन्या को सफेद वस्त्र का दान करें। बच्चों को सफेद रंग की मिठाई खिलाएं। सुख-समृद्घि की कामना के लिए मां सरस्वती को पीली मिठाई, मिश्री और केसर से बनी खीर का भोग लगाएं। बसंत पंचमी के दिन सफ़ेद पलाश के फूल केसर के साथ चांदी की डिब्बी में रखें। ऐसा करने से घर में बरकत बनी रहेगी। केसर मिलकर मीठे चावल बनाएं और स्टेशनरी का दान करें। पीली कौड़ी का पूजन कर अपने पर्स में रखें और कुछ पीली कौड़िया पूजा के स्थान पर रख दें। मां सरस्वती को शृंगार की वस्तुएं अर्पित करें। इस दिन मां सरस्वती की मूर्ति पर रोली, केसर, हल्दी, अक्षत और फूल अर्पित करें। अगर विद्यार्थी का मन पढ़ाई में नहीं लगता है तो उन्हें मां सरस्वती के मूल मंत्र का जाप करना चाहिए। इस दिन मां सरस्वती के लिए व्रत भी रखना चाहिए। बसंत पंचमी के दिन नवजात शिशु, जिनकी पहली बसंत पंचमी है उनकी जीभ पर चांदी की सलाई की मदद से शहद से ‘ऊँ ऐं’ मंत्र लिखें। बच्चा बड़ा होने पर बुद्धिमान बनेगा और मधुर वाणी बोलेगा। ऐसे बच्चे जिनमें वाणी दोष है तो उनकी जीभ पर चांदी की सलाई से केसर से ‘ऊं ह्रीं श्री सरस्वत्यै नमः’ मंत्र लिख दें। बच्चा वाणी दोष से मुक्त हो जाएगा। मां सरस्वती की पूजा से वाणी में कौशल आता है। मन शांत तथा प्रसन्न होता है। एकाग्रता प्राप्त करने के लिए प्रातः मां सरस्वती की वंदना करें।
वसंत पंचमी का पावन पर्व 16 फरवरी 2021, मंगलवार को श्रद्धा, उल्लास से मनाया जाएगा। इस दिन माघ मास का चौथा प्रमुख स्नान पर्व भी है। इस अवसर पर संगम में लाखों श्रद्धालु ब्रह्ममुहूर्त से आस्था की डुबकी लगाएंगे। इस अवसर पर विधिविधान से मां सरस्वती का पूजन -अर्चन किया जाएगा। पंचमी तिथि 15 फरवरी, सोमवार रात 2:45 बजे शुरू हो जाएगी, जो मंगलवार रात 4:34 बजे तक रहेगी। रेवती नक्षत्र सूर्योदय से रात में 8:07 बजे तक रहेगा।
ग्रहों का योग फलदायी
- वसंत पंचमी पर बुध, गुरु, शुक्र व शनि चार ग्रह शनि की राशि मकर में चतुष्ग्रही योग का निर्माण कर रहे हैं। मंगल अपनी राशि में विद्यमान रहकर इस दिन के महात्म्य में वृद्धि करने करेगा।
- सरस्वती पूजन का शुभ मुहूर्त
- सरस्वती पूजन का शुभ मुहूर्त दोपहर 11:30 से 12:30 तक रहेगा। विद्यार्थियों को मां सरस्वती की आराधना अधिक फलदाई रहेगी।
बसंत पंचमी पूजा विधि-
1. मां सरस्वती की प्रतिमा या मूर्ति को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें।
2. अब रोली, चंदन, हल्दी, केसर, चंदन, पीले या सफेद रंग के पुष्प, पीली मिठाई और अक्षत अर्पित करें।
3. अब पूजा के स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबों को अर्पित करें।
4. मां सरस्वती की वंदना का पाठ करें
5. विद्यार्थी चाहें तो इस दिन मां सरस्वती के लिए व्रत भी रख सकते हैं।
इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।















