
छत्तीसगढ़ : अपरिमित सौंदर्य…. “प्रकृति का वैलेंटाइन”
लंच के बाद फिर मैं जलजली (शायद इसका अर्थ रुका हुआ पानी है) की ओर आया। वर्तमान में इस स्थान के चारों ओर, वन विभाग के द्वारा फेंस लगा दिया गया है, इससे इस स्थान की ख़ूबसूरती और बढ़ गई है। जलजली में, अगर कोई ज़मीन पर कूदता है, तो वो ऊपर नीचे दोलन (वायब्रेशन) करती है। ज़मीन इतनी सॉफ्ट है कि लगता है अपन किसी नर्म गद्दे पर चल रहे हों।दर असल ये जलजली ऐसे ज्वालामुखी के क्रेटर में स्थित है, जहां वक़्त के साथ क्रेटर लेक बन गई । ये ज्वालामुखी आज से क़रीब 10 मिलियन वर्ष पहले सक्रिय था। फिर अक्रिय होने के बाद ये ठंडा हो गया और ज्वालामुखी के अवतल गड्ढे वाले मुख में वर्षा का पानी इकठ्ठा हो गया और क्रेटर झील बन गई। साथ ही साथ, इसमें अगल बगल की बलुही मिट्टी खुरच खुरच के या हवा में उड़ के आती रही। इसके अलावा झील में मौजूद वनस्पतियों तथा जलीय जन्तुओं के मरने से उनके जीवाश्मों का एक ऐसा अर्ध-ठोस घोल तैयार हो गया, जिसने इस तरह की स्पंज जैसी ज़मीन को जन्म दिया। ये प्रक्रिया अभी तक चल रही है। ऐसा लगता है कि प्रकृति ने अपना हर चमत्कार दिखाने के लिए मैनपाट को चुन लिया हो।
ज़मीन में दो तीन छेद करके, एक बाबा आपको उसमें फूँक कर शंख जैसी ध्वनि निकालने के लिए तैयार मिलता है, ऐसी खोखली सी ज़मीन है यहाँ की। जब झूला झुलाती ज़मीं ही से संगीत फूट पड़ता हो, तो क्या कहने!
यहाँ से हम पहुँचे ‘परपटिया’| सलोनी सर्दियों में से झांकते पहाड़ियों की लंबी ऋंखला मन मोह लेती है। ये जगह प्राकृतिक दृश्य के लिहाज से इतनी ख़ूबसूरत है कि जो फ़ोटोज़ के शौक़ीन हैं, उनके कैमरों से क्लिक की आवाज़ें कभी नहीं रुकेंगीं। अभी यहाँ पर एक गेस्ट हाउस का निर्माण हो रहा है और ये यहाँ के पर्यटन रोमांच मे चार चाँद लगा देगा, क्यूंकि मैनपाट का ये सर्वाधिक ऊँचा प्वाइंट है और यहाँ रात में रुकने का अलग ही मज़ा होगा, जब रात की नशीली ठंडी हवा आपके रोमांच को, प्रकृति के साथ वैलेंटाइन जैसी, रुमानी मस्ती का अहसास देगी।
सुनते रहे हैं कि मन एक जगह टिकता नहीं पर जाने का मन तो नहीं कर रहा था यहाँ से। मैं बार बार लौट के आने के लिए जा रहा हूँ।











