भिलाई (सारनाथ एक्सप्रेस)। मैं एक किसान का बेटा हूं इसलिए शुरू से गवर्नमेंट जॉब करना चाहता था। मेरी इच्छा बैंक में जॉब करने की थी लेकिन वर्ष 1996 में बैंक की भर्ती नहीं निकली तो मैंने पीएससी की भर्ती में भाग लिया और पहले ही प्रयास में मेरा चयन डीएसपी के लिए हो गया अगर आज मैं शासकीय नौकरी में नही रहता तो शायद किसान ही रहता। यह सब बातें 7वीं वाहिनी, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के कमांडेंट आईपीएस विजय अग्रवाल ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया।
रायपुर के नगपुरा एवम् चंदखुरी ग्राम में पले-बढ़े आईपीएस विजय अग्रवाल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा यहीं से पूरी की थी। पूर्व माध्यमिक शिक्षा इन्होंने बी टी आई स्कूल, शंकर नगर रायपुर से पूर्ण किया। हाई स्कूल तथा हायरसेकेंडरी तक की शिक्षा इन्होंने सेंट पॉल स्कूल, रायपुर से पूर्ण करने के पश्चात साइंस कॉलेज रायपुर से उन्होंने एमएससी (गणित) में उत्तीर्ण किया। वर्ष 1996 के एमपीपीएससी एग्जाम में इन्होंने भाग लिया और अपने पहले ही प्रयास में इनका चयन डीएसपी के लिए हो गया। वर्ष 1998 में इन्होंने सागर (मध्यप्रदेश) से एक वर्ष की ट्रेनिंग के पश्चात प्रशिक्षु डीएसपी के पद पर पहली पोस्टिंग वर्ष 1999 में बैतूल (मध्यप्रदेश) में हुई।
वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य विभाजन के बाद इन्हें छत्तीसगढ़ राज्य के प्रथम राज्यपाल दिनेश नंदन सहाय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई। इन्होने राजभवन में दो वर्षो तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2002 में इनकी पोस्टिंग एसडीओपी जशपुर के पद पर हुई, जहां उन्होंने एक वर्ष तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2003 में इनका स्थानांतरण जांजगीर-चांपा हो गया, वहां इन्होंने दो वर्षो तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2005 में इनका स्थानांतरण धमतरी हुआ, जहां इन्होंने एक वर्ष अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2007 में इनका स्थानांतरण घोर नक्सली क्षेत्र दंतेवाड़ा में हुआ, जहां इन्होंने एक वर्ष तक अपनी सेवाएं दी। 2008 में इनका तबादला डोंगरगढ़ में हुआ जहां एक वर्ष पोस्टिंग के बाद वर्ष 2009 में इन्हें प्रमोशन मिला। यह डीएसपी से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बने। प्रमोशन के साथ ही इनका तबादला अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) कवर्धा की जिम्मेदारी दी गई। कवर्धा में इन्होंने दो वर्ष की सेवाएं देने के बाद वर्ष 2011 में इन्हें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) राजनांदगांव की जिम्मेदारी दी गई। राजनांदगांव में एक वर्ष सेवाएं देने के बाद वर्ष 2012 में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (नक्सल ऑपरेशन) मानपुर की जिम्मेदारी दी गई। वर्ष 2013 से 2016 तक इन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) जांजगीर के पद पर सेवाएं दी। वर्ष 2016 में इनका तबादला अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) रायपुर के लिए हुआ, जहां उन्होंने लगभग ढाई वर्षों तक अपनी सेवाएं दी। जून 2018 में इनका तबादला रायपुर से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ट्रैफिक) दुर्ग के लिए हुआ। ट्रैफिक के साथ साथ इन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (क्राइम) की दोहरी जिम्मेदारी भी निभाई। अक्टूबर 2018 में इन्हें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) बिलासपुर की जिम्मेदारी सौंपी गई जहां इन्होंने 5 माह तक अपनी सेवाएं दी। 6 अक्टूबर 2018 में इन्हें इंडियन पुलिस सर्विस (आईपीएस) अवार्ड मिला। फरवरी 2019 में इनकी पोस्टिंग कमांडेंड, 7वीं वाहिनी, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के पद पर हुआ, जहां पर यह अभी तक पदस्थ हैं और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी से निभा रहे हैं साथ ही दिसंबर 2019 से पुलिस अधीक्षक, राज्य पुलिस एकेडमी के रूप में अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे है।
पुस्तक पढ़ने-लिखने तथा श्वानो में विशेष रुचि रखने वाले कमांडेंट आईपीएस विजय अग्रवाल को वर्ष 2020 में सराहनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक भी घोषित किया जा चुका है।
आईपीएस विजय अग्रवाल ने कहा कि मैं पब्लिक के लिए एवं पब्लिक से जुड़कर कार्य करता हूँ। अपराधियो के मन मे पुलिस का खौफ होना जरूरी है। आम पब्लिक को पुलिस पर विश्वास होना चाहिए साथ ही व्यावसायिक रूप से दक्ष एवम् कर्मठ होने के ध्येय से काम करता हूं।
बटालियन में जवानों का वेलफेयर होता रहे, जवानों के और उनके परिवार की समस्याओं का निदान करें, उनका मनोबल बढ़ाये, उनके साथ मिलकर काम करे यह सब प्राथमिकता में है।
आम जनता से यही अपील है कि कानून का सम्मान करें, कानून उनकी सुरक्षा के लिए बना है। पुलिस व्यवस्था बनाने के लिए दिन-रात, भीषण गर्मी, बरसात, ठंड और हर परिस्थितियों में पब्लिक के लिए काम करती है इसलिए उनका सम्मान करें। खुद भी सुरक्षित रहे और अपने परिवार को भी सुरक्षित रखे।









