रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल की हाई स्कूल, हायर सेकेण्डरी, हायर सेकेण्डरी व्यावसायिक और शारीरिक शिक्षा मुख्य परीक्षा 2021 के आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि पूर्व में दो बार बढ़ाई जा चुकी है, फिर भी कई छात्र परीक्षा आवेदन भरने से वंचित रह गए हैं। माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा छात्रहित में 1 फरवरी से 5 फरवरी तक परीक्षा आवेदन पत्र जमा करने के लिए अंतिम अवसर दिया है। माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा इसके लिए पुनः पोर्टल खोला जाएगा।माध्यमिक शिक्षा मण्डल के सचिव प्रोफेसर व्ही.के. गोयल ने इस संबंध में बताया कि ऐसे छात्र जो नियमित, स्वाध्यायी परीक्षा आवेदन पत्र नहीं भर पाए हैं, वे एक हजार रूपए अतिरिक्त विलंब शुक्ल देकर आवेदन भर सकते हैं। ऐसे नियमित छात्र जिनका नियमित प्रवेश शाला में पूर्व में हो चुका है और परीक्षा आवेदन पत्र भरने से वंचित रह गए हैं ऐसे छात्र के नाम डिलिट कर पोर्टल लॉक किए गए हैं। उन सभी छात्रों के आवेदन पत्र स्वीकार किए जाएंगे। स्वाध्यायी आवेदन पत्र भरने वाले वे सभी छात्र आवेदन भर सकेंगे जो संबंधित परीक्षा के लिए नियमानुसार पात्र हैं।
आंकलन के आधार पर पहली से 8वीं तक के विद्यार्थियों को प्रदान करें प्रगति पत्र: संचालक लोक शिक्षण
संचालक लोक शिक्षण जितेन्द्र शुक्ला ने समस्त संभागीय संयुक्त संचालकों एवं जिला शिक्षा अधिकारियों को कक्षा पहली से लेकर 8वीं तक विद्यार्थियों को विविध तरीकों से किए गए आंकलन के आधार पर प्रगति पत्र प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने शिक्षा अधिकारियों को प्रेषित अपने पत्र में इस बात का उल्लेख किया है कि प्रदेश में पढ़ई तुंहर दुआर के अंतर्गत विभिन्न विधियों से ऑनलाइन तथा ऑफलाइन कक्षाएं राज्य में संचालित की गई है। विद्यार्थियों का आंकलन कर उसे वेब पोर्टल में भी अपलोड किया गया है। विविध तरीकों से किए गए आंकलन के आधार पर ही विद्यार्थियों को प्रगति पत्र प्रदान करना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। संचालक लोक शिक्षण ने कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुपालन में छत्तीसगढ़ राज्य में पहले से ही यह नीति है कि कक्षा पहली से 8वीं तक बच्चों को परीक्षा के आधार पर पिछली कक्षा में नहीं रोका जाता है। उपरोक्त कक्षाओं के समस्त विद्यार्थियों को सामान्य रूप से अगले शिक्षा सत्र में अगली कक्षा में प्रवेश दिया जाता है। प्रदेश के सभी विद्यालयों में विद्यार्थियों की अकादमिक उपलब्धियों का सतत मूल्यांकन और उसके आधार पर आवश्यक शिक्षण देने की व्यवस्था की जाती है। इस वर्ष भी राज्य में पहली से 8वीं तक के बच्चों के लिए यहीं नीति लागू रहेगी।






