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कार्तिक पूर्णिमा आज: देव दीपावली पर जानें व्रत, स्नान-दान की सही वस्तु, मुहूर्त और इसका महत्व?

कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विधान है. उसके बाद दान देते हैं. पूर्णिमा तिथि 15 नवंबर शुक्रवार को सुबह 6 बजकर 19 मिनट पर शुरू हो रही है. श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी से जानते हैं कि कार्तिक पूर्णिमा कब है? कार्तिक पूर्णिमा के स्नान और दान का मुहूर्त क्या है? कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली भी मनाते हैं…

 

नईदिल्ली (ए)। कार्तिक पूर्णिमा का पावन पर्व हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होता है. कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विधान है. उसके बाद दान देते हैं. कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान करने से अक्षय पुण्य मिलता है और व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है. इस दिन लोग व्रत रखकर सत्यनारायण भगवान की पूजा करते हैं और कथा सुनते हैं. इस अवसर पर भगवान शिव की पूजा का भी विधान है. कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा कहते हैं, इस दिन देव दीपावली भी मनाते हैं. पूर्णिमा की रात चंद्रमा की पूजा करते हैं।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, इस साल कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा तिथि 15 नवंबर शुक्रवार को सुबह 6 बजकर 19 मिनट पर शुरू हो रही है. यह तिथि 16 नवंबर दिन शनिवार को तड़के 2 बजकर 58 मिनट पर खत्म होगी. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर कार्तिक पूर्णिमा 15 नवंबर शुक्रवार को है।

15 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:58 ए एम से 05:51 ए एम तक है. उस दिन का शुभ समय या अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक है. उस दिन व्यतीपात योग सुबह 07:30 ए एम तक है, उसके बाद वरीयान योग होगा, जो अगले दिन 16 नंबर को तड़के 03:33 बजे तक रहेगा।

कार्तिक पूर्णिमा को भरणी नक्षत्र सुबह से लेकर रात 9 बजकर 55 मिनट तक है, उसके बाद से कृत्तिका नक्षत्र है. कार्तिक पूर्णिमा पर सूर्योदय सुबह 6:44 बजे होगा।

कार्तिक पूर्णिमा 2024 स्नान-दान का समय
कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान और दान का सबसे उत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त है. इस समय में स्नान के बाद अपनी क्षमता के अनुसार दान देना चाहिए. जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में स्नान नहीं कर सकते हैं, वे सूर्योदय के बाद स्नान कर लें. गंगा स्नान का अवसर नहीं है, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

कार्तिक पूर्णिमा पर दान की वस्तुएं
कार्तिक पूर्णिमा को स्नान के बाद आप अन्न, वस्त्र, फल आदि का दान कर सकते हैं. यदि आपको चंद्रमा के शुभ फलों की प्राप्ति करनी है तो आपको कार्तिक पूर्णिमा को चावल, दूध, शक्कर, चांदी, सफेद वस्त्र, सफेद मोती, सफेद चंदन आदि का दान करना चाहिए।

कार्तिक पूर्णिमा 2024 चंद्रोदय समय
कार्तिक पूर्णिमा पर चांद निकलने का समय शाम को 4 बजकर 51 मिनट पर है. कार्तिक पूर्णिमा के दिन चन्द्रास्त का समय नहीं है।

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा को देवी और देवता काशी में आकर भगवान शिव की पूजा करते हैं और दीप जलाते हैं. इस वजह से इस दिन देव दीपावली मनाई जाती है. कथा के अनुसार, भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध करके देवों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी. इससे खुश होकर देवता गण काशी में दीपावली मनाते हैं।

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