- बेहद खास माना जाता है नवरात्र का नौवां दिन
- नौवें दिन की जाती है मां सिद्धिदात्री की पूजा
- मां दुर्गा की कृपा से नहीं होती धन-धान्य की कमी
नईदिल्ली (ए)। शारदीय नवरात्रि का नौवां दिन शुक्रवार को है. इस दिन दुर्गा अष्टमी और महा नवमी दोनों मनाई जा रही है. इस दिन अश्विन शुक्ल अष्टमी तिथि, उत्तराषाढा नक्षत्र, सुकर्मा योग, बव करण, पश्चिम का दिशाशूल और धनु राशि में चंद्रमा है. दृक पंचांग के अनुसार, दोपहर में 12:06 बजे के बाद से नवमी तिथि लग रही है. कई जगहों पर दुर्गा अष्टमी का व्रत 9 अक्टूबर को रखा गया. जो लोग दुर्गा अष्टमी और महा नवमी साथ में मना रहे हैं, वे सुकर्मा योग में मां महा गौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा करें. उसके बाद नवरात्रि का हवन करें. फिर कन्या पूजा जरूर करें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है. उनकी पूजा करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और मनोकामनाएं पूरी करती हैं. जो लोग 9 दिन का व्रत हैं, वे दशमी को पारण करके व्रत को पूरा करेंगे. दुर्गा अष्टमी और महा नवमी के दिन सुकर्मा योग के साथ रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रह हैं, लेकिन ये नवमी तिथि में होंगे।
महा नवमी के दिन शुक्रवार व्रत है, जिसमें धन और वैभव की देवी माता लक्ष्मी की पूजा की जाएगी. जो लोग प्रदोष काल में माता लक्ष्मी की पूजा विधि विधान से करते हैं, उनको धन, ऐश्वर्य आदि की प्राप्ति होती है. माता लक्ष्मी की पूजा में लाल गुलाब, दूध से बनी सफेद मिठाई, बताशे, शंख, पीली कौड़ियां, कमलगट्टे आदि का उपयोग करते हैं. माता लक्ष्मी की पूजा के समय आपको शुक्रवार की व्रत कथा पढ़नी चाहिए. कुंडली के शुक्र दोष को दूर करने के लिए भी शुक्रवार का व्रत रखा जाता है।
आज का पंचांग, 11 अक्टूबर 2024
आज की तिथि- अष्टमी – 12:06 पी एम तक, उसके बाद नवमी
आज का नक्षत्र- उत्तराषाढा – 05:25 ए एम, 12 अक्टूबर तक, फिर श्रवण
आज का करण- बव – 12:06 पी एम तक, बालव – 11:37 पी एम तक, फिर कौलव
आज का योग- सुकर्मा – 02:47 ए एम, 12 अक्टूबर तक, उसके बाद धृति
आज का पक्ष- शुक्ल
आज का दिन- शुक्रवार
चंद्र राशि- धनु – 11:41 ए एम तक, उसके बाद मकर
सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्रोदय-चंद्रास्त का समय
सूर्योदय- 06:20 ए एम
सूर्यास्त- 05:55 पी एम
चन्द्रोदय- 01:55 पी एम
चन्द्रास्त- 12:19 ए एम, 12 अक्टूबर।
शारदीय नवरात्रि नौवां दिन 2024 मुहूर्त और योग
ब्रह्म मुहूर्त: 04:41 ए एम से 05:30 ए एम
अभिजीत मुहूर्त: 11:44 ए एम से 12:31 पी एम
सर्वार्थ सिद्धि योग: 05:25 ए एम, 12 अक्टूबर से 06:20 ए एम तक
रवि योग: 05:25 ए एम, 12 अक्टूबर 12 से 06:20 ए एम तक।
नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना करने के लिए सुबह स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें, उसके बाद सबसे पहले कलश की पूजा व समस्त देवी देवताओं का ध्यान करें। मां को मोली, रोली, कुमकुम, पुष्प और चुनरी चढ़ाकर मां की भक्ति भाव से पूजा करें। इसके बाद मां को पूरी, खीर, चने, हलुआ, नारियल का भोग लगाएं। उसके बाद माता के मंत्रों का जाप करें और नौ कन्याओं के साथ एक बालक को भोजन कराएं।
मां सिद्धिदात्री मंत्र जाप पूजा मंत्र
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि,
सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।
स्वयं सिद्ध बीज मंत्र:
ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।
मां सिद्धिदात्री स्तुति
या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां सिद्धिदात्री ध्यान
वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
कमलस्थिताम् चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्विनीम्॥
स्वर्णवर्णा निर्वाणचक्र स्थिताम् नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्।
शङ्ख, चक्र, गदा, पद्मधरां सिद्धीदात्री भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन पयोधराम्।
कमनीयां लावण्यां श्रीणकटिं निम्ननाभि नितम्बनीम्॥
कन्या पूजन विधि: कुछ लोग कन्या पूजन अष्टमी के दिन करते हैं तो कुछ लोग महानवमी पर कन्याओं को भोजन कराते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन से पहले कन्याओं को भोजन के लिए एक दिन पहले निमंत्रण दें। कन्याओं के आने होने पर उनके पैर अच्छे से धोएं। उनको बिठाएं औरश्रृंगार भी करें। फिर उनको भोजन कराएं। भोजन कराने के बाद मिठाई, फल और अपनी सामर्थ्यानुसार दक्षिणा दें।उसके बाद उन्हें विदा करें।
महानवमी का महत्व: मां दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है। शारदीय नवरात्रि का नौंवा दिन यानी नवमी तिथि मां सिद्धिदात्री को समर्पित है। इस तिथि पर मां दुर्गा के नौंवे स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से भक्तों को सिद्धियों की प्राप्ति होती है। देवी पुराण के अनुसार, भगवान शिव ने इन्हीं शक्तिस्वरूपा देवी जी की उपासना करके सभी सिद्धियां प्राप्त की थीं, जिसके प्रभाव से शिव जी का स्वरूप अर्द्धनारीश्वर का हो गया था। इस दिन कन्या पूजन से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और मां दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है।
मां सिद्धिदात्रि को अर्पित करें ये चीजें
महानवमी पर मां सिद्धिदात्रि को खीर, पूड़ी, चना, हलवा, नारियल और मौसमी फल का भोग लगाएं।
















