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प्रशिक्षणार्थियों को प्रोत्साहित कर उन्हें रोजगार के लिए प्रेरित करना ही मेरा उद्देश्य : टीएस तंवर

भिलाई। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था में जो भी प्रशिक्षणार्थी आते है उन्हें प्रोत्साहित कर रोजगार के लिए प्रेरित कर उन्हें अपने पैरों पर खड़े करना ही मेरी मूल उद्देश्य रहता है। शासन ने मुझे जो जिम्मेदारी सौंपी है उसे पूरी ईमानदारी और निष्ठा से करते आ रहे है। यह सब बातें शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था भिलाई के प्राचार्य टीएस तंवर ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया…
टीएस तंवर की प्रारंभिक शिक्षा खिशोरा बलौदा (बिलासपुर) के शासकीय स्कूल में पूर्ण हुई थी। हाई स्कूल एवं हायरसेकंडरी की शिक्षा भी शासकीय स्कूल बलौदा तहसील से पूरी की। हायरसेकंडरी की शिक्षा के बाद इन्होंने पीईटी की तैयारी शुरू कर दिया और वर्ष 1990 में इनका चयन शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज दुर्ग में इलेक्ट्रीशियन ब्रांच के लिए हुए। वर्ष 1993 में इन्होंने सफलतापूर्वक इलेक्ट्रीशियन की डिग्री हासिल किया। वर्ष 1994 में इनका चयन लैब तकनीशियन के पद पर शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, रायगढ़ के लिए हुआ जहां इन्होंने वर्ष 1996 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 1996 में इनका चयन जनशक्ति नियोजन विभाग के प्रशिक्षण अधिकारी के पद पर हुआ। इनकी पहली पोस्टिंग शासकीय आईटीआई अनूपपुर (मप्र) में प्रशिक्षण अधिकारी के पद पर हुआ जहां इन्होंने वर्ष 1998 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 1998 में इनका तबादला शासकीय आईटीआई भिलाई में प्रशिक्षण अधिकारी के पद पर हुआ जहां इन्होंने वर्ष 2007 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2008 में इन्हें प्रमोट कर प्रशिक्षण अधीक्षक बनाया गया। वर्ष 2008 से 2013 तक इन्होंने शासकीय महिला आईटीआई भिलाई में प्रशिक्षण अधीक्षक के पद पर अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2014 में पुनः इन्हें प्रमोट पर प्राचार्य बनाया गया। वर्ष 2014 से वर्ष 2016 तक इन्होंने शासकीय आईटीआई देवभोग में प्राचार्य के पद पर अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2016 में इनका तबादला शासकीय आईटीआई दुर्ग में प्राचार्य के पद पर हुआ जहां इन्होने अगस्त 2019 तक अपनी सेवाएं दी। अगस्त 2019 में शासन ने इन्हें शासकीय मॉडल आईटीआई भिलाई के प्राचार्य पद की अहम जिम्मेदारी सौंपी है जिसे यह अभी तक बखूबी निभा रहे है।

अपने पिताजी को अपना आदर्श और प्रेरणास्रोत मानने वाले टीएस तंवर ने बताया कि मेरे पिताजी प्रधानपाठक (शिक्षक) थे। उनको देख कर ही मुझे प्रेरणा मिली कि मैं भी शासकीय सेवाओ में जाकर समाज और देश की सेवा करूं और मैं तैयारियों में जुट गया। मेरी विशेष रुचि बच्चों को प्रात्साहित करना, अच्छी शिक्षा देना है ताकि वह समाज का एक सम्मानित व्यक्ति बन से, अपने पैरों पर खड़ा हो सके। मैनेजमेंट पर ज्यादा फोकस रहता है। मैं जहां भी पदस्त रहा वहां के प्रशिक्षणार्थियों को हमेशा प्रात्साहित करता रहा हु। मैंने अपने स्वयं की दो बेटियों को भी मोटिवेट किया जिसकी बदौलत उनका चयन नवोदय विद्यालय में हुआ था और आज मेरी एक बेटी एमबीबीएस और एक बेटी आईआईटी की तैयारी कर रही है।

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