आरोपियों में लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजप्रताप यादव, बेटी हेमा यादव, पूर्व ओएसडी भोला यादव और राजद प्रमुख के एक पूर्व कर्मचारी सदस्य शामिल हैं…
नईदिल्ली (ए)। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद और उनके परिवार के सदस्यों की कथित संलिप्तता वाले नौकरी के बदले जमीन घोटाले के सिलसिले में अपना अंतिम आरोपपत्र शुक्रवार को दाखिल कर दिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि सीबीआई द्वारा विशेष अदालत को सौंपी गई अंतिम रिपोर्ट में उन सभी रेलवे जोन को शामिल किया गया है, जहां लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों द्वारा कथित तौर पर जमीन लिए जाने के एवज में नौकरी दी गई थी। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने पर सीबीआई ने विशेष न्यायाधीश (सांसद/विधायक मामले) के समक्ष 78 आरोपियों के खिलाफ अपना तीसरा और अंतिम आरोप पत्र दाखिल किया। आरोपियों में लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजप्रताप यादव (जिनके खिलाफ पहली बार आरोप पत्र दाखिल किया गया है), बेटी हेमा यादव, पूर्व ओएसडी भोला यादव और राजद प्रमुख के एक पूर्व कर्मचारी सदस्य शामिल हैं।
सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र के साथ-साथ धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धाराएं तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधान भी लगाए हैं। उन्होंने बताया कि आरोपियों में 29 रेलवे अधिकारी, 37 अभ्यर्थी और छह अन्य निजी व्यक्ति शामिल हैं।
सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा कि जांच के दौरान, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पाया कि लालू प्रसाद ने रेलवे के अधिकारियों, अपने परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश को आगे बढ़ाते हुए, मौजूदा दिशानिर्देशों का पूर्ण उल्लंघन करते हुए भारतीय रेलवे के 11 जोनों में ‘ग्रुप डी’ के पदों पर नियुक्ति की। उन्होंने कहा कि यह कार्य उम्मीदवार द्वारा स्वयं या उसके परिवार के सदस्यों द्वारा भूमि हस्तांतरण के बदले में किया गया। उन्होंने बताया कि इन पदों के लिए पात्र बनने के लिए उम्मीदवारों ने फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत किए।
















