सिक्किम में क्षेत्रीय दलों ने ही यहां पर राज किया। सबसे अधिक समय तक पांच बार (1994, 1999, 2004, 2009 और 2014) एसडीएफ के पवन चामलिंग मुख्यमंत्री रहे। 2019 में पहली बार तमांग के नेतृत्व में एसकेएम ने एसडीएफ को मात दी…
नईदिल्ली (ए)। अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए वोटों की गिनती जारी है। अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए 19 अप्रैल को मतदान हुआ था। अरुणाचल प्रदेश की दो लोकसभा सीटों के लिए मतगणना 4 जून को ही होगी। अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा की 60 सीटें हैं, जिनमें से 50 सीटों पर मतदान हुआ और 10 सीटों पर निर्विरोध ही भाजपा उम्मीदवार जीत चुके हैं।
खबर लिखे जाने तक के रुझानों में भाजपा 40 सीटों पर आगे चल रही है। 30 सीटों पर भाजपा आगे है और 10 सीटों को निर्विरोध जीत चुकी है। वहीं एनपीपी 8 सीटों पर, एनसीपी 3, पीपीए 2 सीटों पर आगे है।
सिक्किम की 32 विधानसभा सीटों पर रुझान आने शुरू हो गए हैं। इसके नतीजे थोड़ी देर में आने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग के नेतृत्व में सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) अभी सत्ता में है। एसकेएम का सीधा मुकाबला सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) से है। यहां भाजपा और कांग्रेस भी हैं। इनकी मौजूदगी नाममात्र की है।
ECI के अनुसार, सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (SKM) 29 सीटों पर आगे चल रही है। सिक्किम विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 32 सीटों में से 17 का है।
सिक्किम के रुझानों में एसकेएम को फिर से बहुमत मिला है। वहीं, कांग्रेस अपना खाता तक नहीं खोल पाई।
1984 से कांग्रेस सत्ता से बाहर सिक्किम राज्य बनने के बाद कांग्रेस केवल दो बार ही सत्ता में आ पाई। 1975 से 1979 और फिर बीबी गुरुंग 14 दिन के लिए (11 मई 1984 से 25 मई 1984 तक) मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद फिर कभी कांग्रेस सिक्किम में लौट नहीं पाई। क्षेत्रीय दलों ने ही यहां पर राज किया। सबसे अधिक समय तक पांच बार (1994, 1999, 2004, 2009 और 2014) एसडीएफ के पवन चामलिंग मुख्यमंत्री रहे। 2019 में पहली बार तमांग के नेतृत्व में एसकेएम ने एसडीएफ को मात दी।
















