अध्ययन में सामने आया कि बेहद गर्म जलवायु में रहने वाले मरीजों के गुर्दे की कार्यक्षमता में हर साल आठ फीसदी की अतिरिक्त गिरावट आती है। इसके अलावा मरीज के वजन, मधुमेह और रक्तचाप ने भी उस पर अतिरिक्त असर डाला था…
नईदिल्ली (ए)। गर्म क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों के गुर्दे ज्यादा तेजी से खराब हो रहे हैं। क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) से पीड़ित मरीज जो बेहद गर्म क्षेत्रों में रहने को मजबूर हैं, सालाना उनके गुर्दे की कार्यक्षमता में आठ फीसदी की अतिरिक्त गिरावट देखी गई है। यह बात लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन (एलएसएचटीएम) और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) से जुड़े शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में सामने आई है।
हर 10वां इन्सान किडनी की बीमारी का शिकार…दुनिया का हर 10वां इन्सान आज किडनी संबंधी बीमारियों का शिकार है। भारत की 16 फीसदी आबादी क्रोनिक किडनी डिजीज से पीड़ित है। वैश्विक स्तर पर 2018 के दौरान डायलिसिस प्राप्त करने वाले मरीजों की संख्या भारत में सबसे अधिक एक लाख 75 हजार दर्ज की गई थी।















