भिलाई। बच्चे पढ़ लिखकर अच्छे इंसान बने इसलिए उनको अच्छी और सच्ची बाते बताती हु। बच्चों का सर्वांगीण विकास बहुत जरूरी है उन्हें हर चीज़ में आगे आना चाहिए। यह सब बातें शासकीय इंग्लिश मीडियम स्कूल सेक्टर-6 भिलाई की शिक्षिका अंशिता मिश्रा ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने आपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया…
अंशिता मिश्रा की प्रारंभिक शिक्षा मुंगेली (छग) के प्राइवेट इंग्लिश मीडियम स्कूल में हुई। हाई स्कूल की शिक्षा इन्होंने जेसीज पब्लिक स्कूल से पूरी की। वर्ष 2007 में इन्होंने हायर सेकेंडरी की शिक्षा भिलाई नायर समाज स्कूल से पूरी की। वर्ष 2010 में कल्याण महाविद्यालय से इन्होंने कॉमर्स में स्नातक किया। स्नातक पूर्ण करने के उपरांत इनका विवाह हो गया। विवाह के बाद इन्होंने वर्ष 2012 में सेन्थ थॉमस कॉलेज से बीएड की। बीएड करते हुए इन्होंने शारदा विद्यालय में अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2014 में इन्होंने सेन्थ थॉमस कॉलेज से कॉमर्स में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल किया। मैत्री विद्या निकेतन स्कूल में इन्होंने अपनी सेवाएं दी। इनके पति प्राइवेट कम्पनी में काम करते है, इनके पति का तबादला मुंबई हो गया जिसके कारण इनको जॉब छोड़कर मुम्बई जाना पड़ा। मुम्बई में रहते हुए इन्होंने यहां पर शासकीय जॉब की तैयारी जारी रखी। इनके ससुर रिटायर्ड बीएसपीकर्मी (शिक्षा विभाग) है, इनके ससुर के प्रयासों से इन्होंने अपना फॉर्म भरा और इनका कॉल लेटर आया तब यह मुंम्बई से आकर यहां दिसम्बर 2013 में नगर पालिक परिषद जामुल के स्कूल में जॉब शुरू की। जामुल के स्कूलों में दो वर्षों तक अपनी सेवाएं देने के बाद इनका तबादला शासकीय स्कूल, हाउसिंग बोर्ड, छावनी के स्कूल में हुआ। जहाँ इन्होंने दो वर्षो तक अपनी सेवाएं दी।
सरकार द्वारा इंग्लिश मीडियम स्कूल शुरू करने की योजना की योजना के अंतर्गत दुर्ग जिला से इनका चयन हुआ। रायपुर में एससीईआरटी की ट्रेनिंग लेने के बाद इन्होंने दुर्ग जिला के शिक्षकों को ट्रेनिंग दी कि किस प्रकार हमें इंग्लिश मीडियम को आगे बढ़ाना और चलाना है। जुलाई 2018 में इनकी पोस्टिंग शासकीय स्कूल सेक्टर 6 में हुई। इंग्लिश मीडियम के लिए भिलाई में दो स्कूल चयनित हुई। जिसमें सेक्टर 6 शासकीय स्कूल भी था। जिले में इंग्लिश मीडियम स्कूल प्रथम बार शुरू हुई जिसमें इन्हें अहम जिम्मेदारी दी गई। इन्होंने उस जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हुए स्कूल को पूरा नया सेटअप किया, पहला साल था तो चुनौतिया भी बहुत थी। अपने अथक प्रयास से अच्छा काम करते हुए स्कूल को प्रारंभ किया। उस स्कूल में हिंदी मीडियम चल रहा था साथ मे इंग्लिश मीडियम की शुरुआत हुई दोनों को साथ साथ इन्होंने चलाया। बहुत सी समाजसेवी संस्थाएं भी जुड़ी और अपना सहयोग दिया। सभी के सहयोग से लगातार आगे बढ़ते गए और पहले ही साल में इस स्कूल की पूरी सीट फुल हो गई और छत्तीसगढ़ लेबल पर इस स्कूल का बेहतर परफॉर्मेंस रहा। प्राइवेट स्कूलों में जो सुविधाएं मिलती है वह सुविधाएं इस स्कूल को शिक्षिका अंशिता मिश्रा के प्रयासों से मिल रहा है। इसके लिए इन्होंने बहुत मेहनत किया है। बच्चों के विकास के लिए स्कूल में हर तरह की एक्टिविटी किया जा रहा।
स्पोर्ट्स,ड्राइंग-पेंटिंग, क्राफ्ट वर्क और कुकिंग में विशेष रुचि रखने वाली शिक्षा अंशिता मिश्रा अपने पिता जी से बहुत प्रभावित थी। उनकी एक अलग ही पहचान है। इनके पिता हर किसी को लेकर चलने वाले व्यक्ति थे। इनके पिता के अकस्मिक देहांत के बाद बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इनकी माता ने बहुत मदद की और इस मुकाम तक पहुंचाया। इनके ससुराल में भी इनको बहुत महत्व दिया जाता है। यहां तक पहुंचने में इनको इनके पति और ससुर का बहुत सपोर्ट मिला। यह एक नेशनल बैडमिंटन खिलाड़ी भी रह चुकी है लेकिन चोट की वजह से इन्हें खेलो से दूर रहना पड़ा। इनके पिता भी शासकीय कॉलेज में सीनियर स्पोर्ट्स आफिसर रहे है। इनके द्वारा लॉकडाउन के दौरान भी जब सभी शाखाएं बंद है तब घर से ही बच्चों को शाला जैसी सुविधा उपलब्ध कराकर पढ़ाई निरंतर कराई जा रही है।










