दुर्ग। चंदखुरी दुर्ग स्थित राजीव लोचन आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज दुर्ग में महाराष्ट्र की गोंदिया निवासी विवाह के पांच वर्ष बाद भी गर्भधारण नहीं हो रहा था, पता चला कि महिला के अण्डाणु अपरिफ्क्व थे। महिला के उपचार बाद गर्भाशय शोध व अण्डाणु के लिए औषधी सेवन हेतु दिया गया।
इन्हें तीन से छः माह तक आयूर्वेदिक उपचार उतरबस्ति इत्यादि तथा पंचकर्म रसायन वाजीकरण चिकित्सा द्वारा उपचार किया गया जिससे गोंदिया निवासी ने गर्भधारण कर एक स्वस्थ्य शिशुु को जन्म दिया।
इसी तरह कई महिलाएं जिनका फेलोपियन ट्यूब, ब्लॉकेज, बार-बार गर्भपात होना, महिलाओं के प्रजनन अंगों के विभिन्न बीमारियों का ईलाज कर उन्हें मातृत्व सुख दिया जा रहा है।
राजीव लोचन आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज की प्रसुति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रूमीना खान ने बताया कि वर्तमान जीवन शैली, आधुनिक खानपान और मानसिक तनाव के कारण आज के समय में दम्पतियों में निसन्तानता की समस्या बडी तेजी से बढ़ रही है।
विवाहित जोड़ों के लिए यह एक बड़ा अभिशाप बन जाती है और ईलाज के लिए कई बार निःसंतान दंपत्ति एलोपैथी आईवीएफ जैसी चिकित्सा में लाखों रू. खर्च कर ईलाज करवाते है लेकिन आयुर्वेदीक प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली से स्नेहन अभ्यंज विरेचन आदि पंचकर्म द्वारा उपचार किया जाता है एवं इसमें उपयोग में आने वाली ओषधियां जैसे श्तावरी, कुभारी प्रकृतिक होती है।
महिलाओं में अण्डे का ना बनना, बीज वाहिनियों की विकृति और अन्तः स्त्रावों का असन्तुलन जैसी बिमारियों का आयूर्वेदिक चिकित्सा पद्धिति में इलाज के माध्यम से पूर्णतया खत्म किया जा सकता है। राजीव लोचन आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय न्युनतम दरो पर निःसंतान दम्पतियों की चिकित्सा की जा रही है।

















