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छत्तीसगढ़दुर्ग-भिलाईफीचर्ड

मैं उस असीम शक्ति से संबंध जोडऩा चाहती हूँ, अभिभूत होना चाहती हूँ, जो मेरे भीतर है : ऋचा मिश्रा

भिलाई (सारनाथ एक्सप्रेस): महिला हमेशा मजबूत रहे, किसी भी परिस्थिति में हार न माने। परिस्थितियों को कभी भी अपने ऊपर हावी न होने दे। आपके दिमाग मे उतनी ताकत है कि वो आपके परिस्थिति को बदल सकता है। सबसे बड़ी ताकत आपके खुद के अंदर है। अपने परिस्थितियों का निर्माण खुद कर सकते है। यह सब बातें दुर्ग जिला  पुलिस अधीक्षक (दूरसंचार) ऋचा मिश्रा का कहना है। सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में एसपी (दूरसंचार) ऋचा मिश्रा ने अपने बचपन, संघर्ष भरे दिनों से लेकर अब तक के कार्यकाल को साझा किया। ऋचा मिश्रा जबलपुर (मप्र) से है इनकी प्रारंभिक और हायरसेकंडरी तक कि शिक्षा शेंट नार्बोट स्कूल जबलपुर में हुई। इन्होंने वर्ष 1996 में साइंस कॉलेज जबलपुर से बियोलॉजी में स्नातक किया। वर्ष 1998 में इन्होंने रानीदुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से इंग्लिश लिटरेचर में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल किया। वर्ष 2000 में इन्होंने पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट टीचिंग ऑफ इंग्लिश (पीजीसिटीई) की डिग्री प्राप्त किया। वर्ष 2002 में इन्होंने हैदराबाद से डिप्लोमा इन क्रिएटिव राइटिंग इन इंग्लिश को डिग्री हासिल किया। सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ इंग्लिश इन फॉरेन लैंग्वेज की डिग्री भी प्राप्त किया। इसके साथ ही साथ इन्होंने सेंट एलासेस कॉलेज जबलपुर में प्रोफेसर के पद पर 1998 से 2002 तक टीचिंग भी किया। अपने दोस्तों को सिविल सर्विसेज एग्जाम की तैयारियों को देखकर इन्होंने भी सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू की और वर्ष 2003 सीजीपीएससी के प्रथम ही प्रयास में इनका चयन आबकारी उप निरीक्षक के पद पर हुआ। वर्ष 2005 के सीजीपीएससी में इनका चयन डीएसपी के लिए हुआ लेकिन महिला आरक्षण नियम 1997 के तहत इनको डीएसपी का पोस्ट नही मिल पाया। जिसके लिए इन्होंने वर्ष 2008 में बिलासपुर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट (नईदिल्ली) में केस किया और लगातार संघर्ष करती रही अंत में इनकी जीत हुई और इनके पक्ष में कोर्ट ने निर्णय दिया। वर्ष 2005 की पीएससी क्लीयर करने के बाद भी इन्हें न्याय के लिए वर्ष 2016 तक इन्हें केस लडऩा पड़ा। वर्ष 2016 में पूरी सीनियारिटी देते हुए इन्हें अपॉइंटेड लेटर मिला और चंदखुरी में ट्रेनिंग शुरू हुई।केस लडऩे के साथ साथ इन्होंने आबकारी उप निरीक्षक की नौकरी भी जारी रखा। वर्ष 2006 से वर्ष 2016 तक बिलासपुर और रायपुर में अपनी सेवाएं दी साथ ही प्रमोट होकर निरीक्षक भी बनी। आबकारी में रहते हुए इन्होंने भारतमाता वाहिनी का निर्माण किया साथ ही आंशिक शराबबंदी की जिसके लिए इन्हें सम्मानित किया गया था। केस लडऩे और आबकारी उप निरीक्षक की नौकरी करते हुए इन्होंने चार पीएससी एग्जाम भी क्वालीफाई किया जिसमें एक एमपीपीएससी भी शामिल था जिसमे इनका चयन महिला एवं बाल विकास अधिकारी के लिए हुआ था। इनसे अलावा इनका चयन नायाब तहसीलदार व एकाउंट ऑफिसर के पद पर चयन हुआ था। ट्रेनिंग के पश्चात इनकी पहली पोस्टिंग प्रशिक्षण के तौर पर जिला दुर्ग में हुई। इन्हें अमलेश्वर थाना प्रभारी बनाया गया। जहां इन्होंने धोखाधड़ी, गुम हुए बच्चों को ढूंढने और महिला संबंधित कई मामलों में सफलता मिली। इन प्रकरणों के निराकरक के लिए इन्हें सम्मानित भी किया गया। इन्हें नवम्बर 2018 में दुर्ग जिला चिटफंड प्रकोष्ठ का प्रभारी जहां इन्होंने बुजुर्ग व्यक्ति श्रीगांगुली का शेयर का 70 लाख रुपये दलाल अपने नाम कर रहा था जिसे इनके ही प्रयास से वापस मिला। अगस्त 2019 से इन्हें दुर्ग पुलिस अधीक्षक (दूर संचार) की जिम्मेदारी दी गई है। पढऩे, पढ़ाने, साइबर क्राइम, आर्थिक अपराध व दूरसंचार में विशेष रुचि रखने वाली ऋचा मिश्रा इंदिरा गांधी को अपना आदर्श मानती है। विदिशा मुखर्जी, मंजूषा उमरे जो कि वर्ष 2000 में डिप्टी कलेक्टर के लिए चयनित हुई थी इन्ही देखकर इन्हें प्रेरणा मिली थी। दूरसंचार में भी इन्होंने नये काम प्रारम्भ किया है जिसमे 40 सिपाहियों के ट्रेनिंग स्कूल बनाई है। यहां के खाली पड़े जगह पर असर्गेनिक खेती शुरू की है। गार्डन में ओपन जिम और दूरसंचार के नवीनतम तकनीक के लिए शासन स्तर पर प्रयासरत है। कॉम्पटीशन एग्जाम की तैयारी कर रहे छात्रों को लिए इनका यही कहना है कि पढ़े कम सोचे ज्यादा, चीजो पर चिंतन मनन करे, उसे आत्मसात करे। किताबी कीड़ा न बने, एनालाइज करे, एक नए आयाम,नए परिपेक्ष्य को करे। यह सब आपको इंटरव्यू में बहुत हेल्प करेगी। अच्छी व मोटिवेशनल किताबे पढ़े।

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