चुनावी साल में एक के बाद एक पांच हस्तियों को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिए जाने के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं…
नईदिल्ली (ए)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ट्वीट करके तीन हस्तियों को भारत रत्न दिए जाने का एलान किया। इनमें किसान नेता और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, कांग्रेस नेता और पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन शामिल हैं। इससे पहले 23 जनवरी को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर और 3 फरवरी को देश के पूर्व-उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न दिए जाने का एलान हो चुका है।
चुनावी साल में एक के बाद एक पांच हस्तियों को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिए जाने के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। सियासी जानकार कह रहे हैं कि इससे मोदी सरकार ने अलग-अलग राज्यों में कई समीकरण साध लिए हैं। आइये जानते हैं इन शख्ससियतों के जरिए भाजपा ने कैसे और किन समीकरणों को साधा है?
इस साल सबसे पहले जननायक कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की घोषणा की गई। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सामाजिक न्याय के नायक थे। जानकारों का कहना है कि केंद्र के इस कदम से आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए मदद मिल सकती है। बिहार में 27 प्रतिशत पिछड़ा और 36 प्रतिशत अति पिछड़ा वर्ग की हिस्सेदारी है। कुल मिलाकर 63% की भागीदारी वाले समाज पर कर्पूरी ठाकुर का बहुत बड़ा प्रभाव है। यह वर्ग उन्हें अपने नायक के तौर पर देखता है।
कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर जदयू के राज्यसभा सांसद हैं। कर्पूरी को भारत रत्न मिलने के आठ दिन बाद ही भाजपा और जदयू एक बार फिर साथ आ गए। चिराग पासवान, पशुपति कुमार और जीतन राम मांझी की पार्टियां पहले से एनडीए की साझेदार थीं। ऐसे में नए सियासी समीकरणों आधार पर बिहार में भाजपा खुद को काफी मजबूत मान रही है। कहा जा रहा है कि कर्पूरी को भारत रत्न देकर भाजपा ने बिहार के सियासी समीकरण को साधने का काम किया है। अब पार्टी के वरिष्ठ नेता आने वाले चुनाव में राज्य की सभी 40 लोकसभा सीटें जीतने का दावा करने लगे हैं।
















