दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस): प्रतिस्पर्धा कभी दुसरो से नही करना चाहिए बल्कि स्वयं से प्रतिस्पर्धा करे ताकि आपको पता चले कि आप कहा पीछे रह गये है। हर बार की गलती आपको सुधारती है और आप बेहतर बनते जाते है। लगातार प्रयास करते रहे निश्चित ही सफलता मिलेगी। यह बातें डिप्टी कलेक्टर सुश्री दिव्या वैष्णव ने कही। सारनाथ एक्सप्रेस के साथ अपने डिप्टी कलेक्टर बनने तक के सफर की विस्तृत चर्चा की। डिप्टी कलेक्टर सुश्री दिव्या वैष्णव की प्रारंभिक शिक्षा महासमुंद जिला के पिथौरा (सिमगा) शासकीय स्कूल व जेएमजे नवजीवन स्कूल राजनांदगांव में हुई। हायरसेकंडरी की शिक्षा सालेम कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रायपुर में पूरी हुई। वर्ष 2011 में रायपुर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इन्होंने इलेक्ट्रॉनिक एंड टेली कम्युनिकेशन ब्रांच से बीई की डिग्री हासिल की साथ ही यूनिवर्सिटी टॉपर रही जिसके लिए इन्हें गोल्ड मैडल से सम्मानित किया गया। वर्ष 2013 में इन्होंने पॉवर ऑफ इलेक्ट्रॉनिक में मास्टर ऑफ इंजीनियर की डिग्री हासिल की साथ ही पुन: यूनिवर्सिटी टॉपर रही इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए इन्हें दोबारा गोल्ड मैडल से सम्मानित किया गया। आगे की पढ़ाई के लिए पूरे देश में टॉप 1000 स्टूडेंट्स में इनका चयन इंस्पायर फेलोशिप के लिए हुआ था। वर्ष 2015 में एमटेक प्रोजेक्ट के लिए इन्हें यंग साइंटिस्ट अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2011 से २०१३ तक आरआईटी में पढ़ाया फिर 201३ तक इन्होंने रुंगटा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग भिलाई में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर 2015 तक टीचिंग भी किया। वर्ष 2014 के सीजीपीएससी में इन्होंने हिस्सा लिया और सूची में ग्यारहवें नम्बर पर रही। डिप्टी कलेक्टर के लिए पहली वेटिंग रही लेकिन डिप्टी कलेक्टर के पद पर इनका चयन नही हो पाया। लेखा अधिकारी के लिए चयनित हुई। लगातार प्रयासरत रही और इन्हें वर्ष 2016 के सीजीपीएससी में पुन: सफलता मिली और यह मुख्य परीक्षा में टॉपर रही। इंटरव्यू में कम नम्बर होने के कारण ऑवरऑल सूची में सेकंड टॉपर रही। ट्रेनिंग के पश्चात इनकी पहली पोस्टिंग दुर्ग डिप्टी कलेक्टर के पद पर मार्च 2018 में हुई। छग विधानसभा चुनाव 2018 व लोकसभा चुनाव 2019 में इन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर काम सीखने के साथ साथ काम भी किया। इन्हें उप जिला निर्वाचन अधिकारी (स्थानीय निर्वाचन) की जिम्मेदारी दी गई है। जिसे यह जिम्मेदारी के साथ निभा रही है। हाल ही में सम्पन्न हुए नगर निगम चुनाव व पंचायत चुनाव इनके नेतृत्व में शांतिपूर्ण सम्पन्न हुआ है।लिखने, पेन्टिंग व डांस में विशेष रुचि रखने और एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानने वाली सुश्री दिव्या वैष्णव को शासकीय जॉब में आने की प्रेरणा इनके पिता जी से मिली। इनके पिता जी भूअभिलेख अधीक्षक के पद पर नौकरी शुरू करते हुए डिप्टी कलेक्टर रहे और संयुक्त कलेक्टर होकर रिटार्यड हुए है। महिला दिवस पर महिलाओ को संदेश देते हुए इन्होंने कहा कि महिला होना ही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है। मैं खुद को भाग्यशाली समझती हूं। अगर महिलाये अपने आप को निर्बल मानेगी तो निर्बल होंगी और सबल मानेगी तो सबल होंगी। स्वयं पर गर्व महसूस करे कि आप एक महिला है। अपने मन पर ही आपको जितना है और आगे बढऩा है। आपको निरन्तर मेहनत करना पड़ेगा। कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नही है। जब तक लक्ष्य प्राप्ति ना हो तब तक प्रयास करते रहिये। हर बार खुद का आंकलन कीजिये कि कहा पर गलती हुई है और उसका सुधार कीजिये।









