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महिलाएं समाज के निर्माण की आधार होती हैं : सविता गुप्ता

रायपुर (सारनाथ एक्सप्रेस): जहां लड़कियों को रात में घर से बाहर जाने एलाऊ नहीं था। तब मैंने घरवालों को समझा-बुझाकर एलएलबी किया था। एलएलबी करने के बाद मैंने प्रैक्टिस करने के लिए जबलपुर हाईकोर्ट में रजिस्ट्रेशन करवाया प्रैक्टिस करने के दौरान ही मेरी शादी हो गई। शिक्षाकर्मी में भी मेरा सलेक्शन ही लेकिन पारिवारिक कारणों के कारण मैं वहां जॉब नहीं कर पाई। शादी के सात साल बाद मैं समाजसेवा से जुड़ी और लगातार समाजसेवा कर रही हूं। यह बातें तेजस्वनी अवार्ड की अध्यक्ष व महिला सोनी समाज की प्रदेश अध्यक्ष व समाजसेवी  सविता  गुप्ता ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कहीं। इन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया।समाजसेवी सविता गुप्ता की प्रारंभिक शिक्षा शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बलौदाबाजार में हुई। इन्होंने वर्ष 1992 में डीके महाविद्यालय बलौदाबाजार में आट्र्स विषय में स्नातक किया। वर्ष 1994 में इन्होंने स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। वर्ष 1997 में इन्होंने एलएलबी की। वर्ष 2000 में इनका विवाह हुआ। शुरु से ही इनमें नेतृत्व करने का गुण रहा। स्कूल के दिनों में भी यह वोटिंग के जरिए शाला नायक रहीं। साथ ही उन्होंने कॉलेज में मताधिकार द्वारा को एजुकेशन में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की  शादी के बाद यह वनबंधु परिषद के एक कार्यक्रम में गई यह संस्था वनांचल एकल अभियान के तहत ग्रामीण बच्चों को शिक्षा देती है और उन्हें गोद लेती है। वहां इन्हें इस संस्था के द्वारा समाजसेवा क्षेत्र से जुडऩे का मौका मिला और वह इस संस्था से जुड़ी फिर इनकी एक सहेली ने  इन्हें जेसीआई ले गईं वहां इनकी प्रतिभा को मंच मिला। जेसीआई से जुडऩे के बाद इन्होंने स्कूल लाइफ के समय से जुड़े हर कार्य डांस, रंगमंच, नाटक, प्ले करना, मैनेजमेंट सीखना आदि उस संस्था ने इन्हें सिखाया। वहां से इनको एक पहचान मिली लोग इन्हें जानने लगे। इनकी सक्रियता से बहुत से सदस्य प्रभावित हुए। उसके बाद यह तेजस्वनी फाउंडेशन संस्था से जुड़ी। जहां पर उनकी पहचान का दायरा और ज्यादा बढ़ गया और लोग उन्हें  एक अच्छे समाजसेवी के रूप में जानने लगे।  यह संस्था प्रत्येक तीन माह में तीस महिलाओं का सम्मान करती हैं वो महिलाएं जो समाज के अनभिज्ञ रहती हैं जिसे कोई नहीं जानता। इनको मंच के माध्यम से मोटिवेट करना वह ऐसी महिलाएं है जों ई-रिक्शा चलाती हैं, पेट्रोल पंप पर काम करती हैं, हैंडीकैप, जो सिलाई आदि करके अपना घर-परिवार चलाती हैं। इसके साथ ही तेजस्विनी फाउंडेशन में डायल 112 के लिए भी समय समय पर काम करते हैं और सड़क सुरक्षा सप्ताह में नागरिकों को यातायात के नियमों की जानकारी देने में भी सहयोग करते हैं। इनके कार्य व निष्ठा से प्रभावित होकर  तेजस्वनी फाउंडेशन के संस्थापक मोहम्मद सिराज सर ने इन्हें तेजस्विनी अवार्ड कार्यकारिणी का अध्यक्ष चुना जिस पद पर यह अभी तक विद्यमान हैैं। यह बुजुर्गों की चौपाल से भी जुड़ी  हैं जिसमें बुजुर्गो की सेवा करना, उनका सहयोग करना आदि कार्य निरंतर   करती रहती हैं।डांस, अभिनय, कुकिंग और समाजसेवा में विशेष रुचि रखने वाली सरिता गुप्ता जेसीआई के चैप्टर इनचार्ज राजेश अग्रवाल, तेजस्वनी फाउंडेशन के संस्थापक, सिराज सर और डॉ. अनन्या मिश्रा को अपना आदर्श मानती हैं। इन्हें स्कूल के दौरान स्काउट एंड गाईड के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानीजैल सिंह के द्वारा अवार्ड भी मिल चुका है। यह टेबल टेनिस की स्टेट लेबल खिलाड़ी भी रह चुकी हैं। इन्हें सद्भावना साहित्य संस्था सम्मान 2019, मानव अधिकार व भ्रष्टाचार उन्मूलन सम्मान 2020, महिला सामाजिक संगठन सम्मान, प्रतिष्ठित महिला नारी उत्थान सम्मान, तेजस्वनी में उत्कृृष्ठ कार्य हेतु सम्मान, अपराजिकता सम्मान, महतारी सम्मान,  सद्भावना नारी शक्ति सम्मान, स्वर्णकार विचार मंच सम्मान, वुमेन इन पावरमेंट सम्मान, बेस्ट प्रोग्राम डायरेक्टर सम्मान, नारी उत्थान संगम सम्मान, इंटरनेशनल लायंस सम्मान, बेस्ट नारी सामाजिक संगठन सम्मान, पर्यावरण संरक्षण योगदान सम्मान, सक्रिय सर्पोटर ब्लड डोनेशन कैंप सम्मान, तड़का वुमेन रिकोनाइज सम्मान, सुपर सावन क्वीन सम्मान, संरक्षक मंडल सम्मान, महिला शक्ति अलंकार सम्मान, बेस्ट एनरजेटिक सम्मान सहित सैकड़ों संस्थाओं द्वारा इन्हें सम्मानित किया जा चुका है। यह वर्तमान में महिला सोनी समाज की प्रदेश अध्यक्ष, तेजस्वनी फाउंडेशन कार्यकारिणी अध्यक्ष, वनबंधु परिषद की सचिव, उद्गम सामाजिक संस्था की सहसचिव, जेसीआई   वमांजलि की उपाध्यक्ष, चितवन वृद्धा आश्रम की सलाहकार सदस्य, ऑल मुस्लिम वेलफायर की सम्मानीय सदस्य तथा नारी शक्ति सामाजिक संस्था की सक्रिय सदस्य हैं। इनके पति मेडिकल में एकाउंटेट हैं तथा पुत्र कक्षा 12वीं में अध्ययनरत हैं। संयुक्त परिवार में अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए भी समाज में अपना विशेष योगदान देती हैं यही इनकी बहुत बड़ी उपलब्धि है इन सब का श्रेय वह ईश्वर को देती है  जिसके कारण ही वह आज यह सब कर पा रही हैं विश्व महिला दिवस पर यह महिलाओं को संदेश देना चाहती हैं कि महिलाएं समाज के आधार की निर्माण होती हैं महिलाओं का सम्मान व सहयोग करें ताकि वह समाज में पुरुषों से  कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ें। मेरे दोस्त और मेरी संस्था के सहयोग से ही मैं यह सब कार्य कर रही हूं।

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