रायपुर (सारनाथ एक्सप्रेस): हम नर्से हर पल बीमार, घायल और बुजुर्ग मरीजो की सेवा के लिए तत्पर रहती है। नर्स स्नेह और ममता के साथ मरीजो की देखभाल करती है,उनकी हिम्मत बढ़ाती है और उनकी रक्षा करती है। हम मरीजों को अच्छा उपचार देने, उनको क्या जरूरत है, क्या कमी है, नर्सिंग केयर आदि उपलब्ध कराते है साथ मितव्ययिता पूर्वक व्यवहार भी करते है ताकि मरीजो को हॉस्पिटल में भी घर जैसी सुविधाएं मिल सके। इन्ही उद्देश्यों के साथ हम काम करते है और यही हमारी प्राथमिकता रहती है। यह सब बातें डॉ भीमराव अंबेडकर (मेकाहारा) हॉस्पिटल रायपुर में पदस्थ स्टॉफ नर्स नीता कट्टर ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया।नीता कट्टर की प्रारंभिक शिक्षा शासकीय प्राथमिक शाला, बरभाठा (जांजगीर-चांपा) में पूरी हुई। हायरसेकंडरी तक कि शिक्षा इन्होंने सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गोधना (जांजगीर-चांपा) में हुई थी। इन्होंने आगे की पढ़ाई बीएससी (नर्सिंग) के लिए वर्ष 2008 में सेंट्रल इंडिया कॉलेज ऑफ नर्सिंग, देवादा (राजनंदगांव) में प्रवेश लिया। वर्ष 2012 में इन्होंने नर्सिंग की डिग्री हासिल लिया साथ ही ट्यूटरशिप भी वही से पूर्ण किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद यह शासकीय जॉब के लिए तैयारियो में लग गई। वर्ष 2013 में संविदा स्टॉफ नर्स के पद पर इनका चयन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बंधवापारा, हेमुनगर (बिलासपुर) के लिए हुए। यहाँ इन्होंने एक वर्ष तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2014 में इनका चयन शासकीय स्टॉफ नर्स के लिए हुआ। इन्हें डॉ भीमराव अंबेडकर (मेकाहारा) हॉस्पिटल, रायपुर के पदस्थ किया गया तब यह अपनी सेवाएं यहां दे रही है। पढऩे, गाना गाने और सुनने में विशेष रुचि रखने वाली नीता कट्टर अपने पिताजी को अपना आदर्श और प्रेरणास्रोत मानती है। इन्होंने बताया कि मेरे पिताजी ने शुरू से ही मुझे लोगो की सेवा करने के लिए प्रेरित किया। हमारे घर मे सभी पढ़े-लिख है, मेरे पिताजी एमबीए किये है लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण जॉब नही किये वो किसान है। मेरे चाचाजी शासकीय टीचर है, मेरी छोटी बहन एमएसडब्लू की है और भाई बीसीए अध्यनरत है। मुझे मेरे परिवार से ही समाजसेवा करने की प्रेरणा मिली इसलिए मैं चिकित्सा क्षेत्र को चुना ताकि में सीधे लोगो से मिलकर उनका सहयोग कर सकती हूं। मैंने डॉ बनने के लिए भी एग्जाम दिए पर कुछ अंको से पीछे रह गई थी फिर मैने नर्सिंग के माध्यम से ही लोगो की सेवा कर रही हु।महिला दिवस पर महिलाओ से यही कहूंगी की ग्रामीण क्षेत्र के माता-पिता अपनी बेटियों को पढ़ाने से कतराते है उन्हें अब अपनी सोच को बदल देना चाहिए। महिलाये आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। महिलाये डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक आदि बनकर देश सेवा कर रही है। सरकार की बहुत सी योजनाएं चल रही है बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सुकन्या योजना, सर्व शिक्षा अभियान इसका लाभ लेवे। हमारे समाज मे महिला अपने जन्म से लेकर मृत्यु तक एक अहम किरदार निभाती है। अपनी सभी भूमिकाओं में निपुणता दर्शाती है। महिलाओ को अपने जिंदगी का ख्याल तो रखना ही पड़ता है साथ में पूरे परिवार का ध्यान भी रखना पड़ता है। वह पूरी जिंदगी बेटी, बहन, पत्नी, माँ, सास और दादी जैसे रिश्तों को ईमानदारी से निभाती है। इन सब जिम्मेदारियों को निभाने के बाद भी वह पूरी शक्ति से नौकरी करती है ताकि अपना, परिवार का और देश का भविष्य उज्ज्वल बना सके इसलिए लड़की-लड़का में भेदभाव नही करना चाहिए चुकी मैं एक नर्स हु उस नाते यह भी कहना चाहूंगी कि किसी भी बीमारी को छोटा न समझे, कई लोग सोचते है कि छोटा बीमारी है ठीक हो जाएगा और वही बीमारी विकराल रूप धारण कर लेता है जिससे लोगो को जान गवानी पड़ जाती है इसलिए छोटे बीमारी में भी डॉक्टर का परामर्श ले ताकि समय रहते उस बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सके।









