पूरे देश में आज यानि 15 जनवरी, 2024 सोमवार के दिन मनाया जा रहा है मकर संक्रांति का पर्व. मकर संक्रांति की तिथि अर्धरात्रि 02:54 मिनट से लग चुकी है. जो आज पूरे दिन चलेगी…
नईदिल्ली (ए)। मकर संक्रांति पूरे भारतवर्ष में हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाने वाला त्योहार है. लेकिन अलग-अलग प्रांतों में इसे अलग-अलग नाम और रीतियों के साथ मानाया जाता है. मकर संक्रांति को पोंगल, माघी, खिचड़ी, उत्तरायण और संक्रांति आदि जैसे विभिन्न नामों से जाना जाता है. मकर संक्रांति का पर्व विभिन्न नामों के साथ देशभर में मनाया जाता है. उत्तर भारत में हिंदू और सिख इसे माघी कहते हैं. महाराष्ट्र, गोवा, आंध्रपदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तेलंगाना में इसे पौष संक्रांति कहते हैं. मध्य भारत में इसे सुकरात नाम से मनाया जाता है, असम में माघ बिहू, गुजरात और राजस्थान में उत्तरायण, तमिलनाडु में पोंगल तो वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में खिचड़ी कहा जाता है।
14 जनवरी को क्यों नहीं मकर संक्रांति: वैसे तो हर साल मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी के दिन ही मनाया जाता है, लेकिन पंचांग के अनुसार इस साल मकर संक्रांति सोमवार, 15 जनवरी 2024 को मनाई जाएगी. इसका कारण यह है कि, मकर संक्रांति तब मनाई जाती है, जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. ज्योतिष के अनुसार सूर्य 14 जनवरी की अर्धरात्रि को 02 बजकर 42 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, 15 जनवरी को मकर संक्रांति मान्य होगा।
मकर संक्रांति 2024 शुभ मुहूर्त: मकर संक्रांति के दिन 15 जनवरी को महापुण्य काल सुबह 07:15 मिनट से सुबह 09:00 बजे रहेगा. यानी महापुण्य काल में आपको स्नान,दान और पूजा पाठ के लिए 1 घंटा 45 मिनट का समय मिलेगा. वहीं पुण्यकाल सुबह 07:15 से शाम 06:21 तक रहेगा. यदि किसी कारण आप महापुण्य काल में मकर संक्रांति का दान आदि न कर पाएं तो पुण्य काल में भी कर सकते हैं।
मकर संक्रांति तिथि और मुहूर्त
- मकर संक्रांति तिथि: सोमवार, 15 जनवरी 2024
- मकर संक्रांति महापुण्यकाल: सुबह 07:15 से 09:00 बजे तक (1 घंटे 45 मिनट)
- मकर संक्रांति पुण्यकाल: सुबह 07:15 से शाम 06:21तक
- मकर संक्रांति का क्षण: अर्धरात्रि 02:54
15 जनवरी को मकर संक्रांति पर कई शुभ योगों का एक साथ निर्माण होगा, जिसे ज्योतिष में बहुत ही दुर्लभ बताया जा रहा है. बताया जा रहा है कि ऐसा शुभ संयोग पूरे 77 साल बाद बनेगा, जिसमें मकर संक्रांति रवि योग और वरियान योग के साथ शतभिषा नक्षत्र में मनाई जाएगी।
मकर संक्रांति पर दान का महत्व: हिंदू धर्म में वैसे तो दान को बहुत ही पुण्य माना जाता है और कई मौकों पर दान करने का महत्व है. लेकिन मकर संक्रांति पर दान-दक्षिणा का खास महत्व होता है. मान्यता है कि, इस दिन किए दान का कई गुणा पुण्यफल प्राप्त होता है. साथ ही मकर संक्रांति पर गुड़, तिल, खिचड़ी, वस्त्र आदि का दान करने से कुंडली के ग्रह-दोष भी दूर होते हैं. इसलिए मकर संक्रांति पर अपने सामर्थ्यनुसार जरूर दान करें।















