दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस)। मेरा बचपना जमशेदपुर (टाटानगर) में बीता, हमारे निवास के अगल-बगल इनकम टैक्स ऑफिसर एवं पुलिस अधीक्षक का निवास था। जहां मेरे पिता एवं बड़े चाचा टाटा स्टील में सेवारत थे। मैं जब भी अपने पड़ोस के शासकीय अधिकारियों से मिलता था तो उनकी समाज के लोगों के प्रति सेवा भाव से प्रभावित होता था तथा यह लगता था कि शासकीय सेवा के माध्यम से आप आम जनता की समस्याओं का निराकरण कर सहयोग दे सकते हैं। बचपन से समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की सहायता करने की प्रबल इच्छा जागृृत हो गई थी, प्रशासनिक सेवा इसका प्रमुख मार्ग नजर आया। जहां आप लोगों से बात कर मदद एवं सहयोग कर सकते हैं। इन सबने मुझे इस बात के लिए प्रेरित किया कि मैं भी शासकीय सेवा में जाकर जनता की सेवा कर सकूं। बचपन से ही प्रशासनिक सेवा में जाने की इच्छा थी। यह सब बातें जिला पंचायत के प्रमुख कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) सच्चिदानंद आलोक ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। उन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया।सीईओ सच्चिदानंद आलोक मूलत: जमशेदपुर, बिहार (अब झारखंड प्रदेश) के हैं। इनकी प्रारंभिक एवं हायर सेकेण्डरी तक की शिक्षा टाटा स्टील द्वारा संचालित केएमपीएम मल्टीपरपस हायर सेकेण्डरी स्कूल में हुई। वर्ष 1987 में इन्होंंने प्रतिष्ठित साइंस कालेज पटना से फिजिक्स में ऑनर्स के साथ स्नातक की शिक्षा पूर्ण की। वर्ष 1989 में इन्होंने दिल्ली विश्व विद्यालय के साउथ कैंपस से स्लावोनिक स्टडी में इंटेसिव एडवांस डिप्लोमा की उपाधि विशिष्टता के साथ अर्जित की। जिसके लिए इन्हें उस वर्ष उच्च अध्ययन के लिए रसिया जाने के लिए स्कॉलरशिप मिली। वर्ष 1989 में एमपीएससी के जरिए इनका चयन ब्लाक डेवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ) के लिए हुआ। इसी वर्ष इनका चयन डीएसपी वायरलेस के लिए भी हुआ था पर उसमें वे प्रतिक्षा सूची में थे। इन्होंने नवंबर 1991 में शासकीय सेवा में प्रवेश किया और जबलपुर (मध्यप्रदेश) में प्रशिक्षु रहे। इन्होंने हृृयूमन रिसोर्स में एमबीए नौकरी में आने के पश्चात किया जो इनकी शिक्षा के प्रति रुझान को बताता है। उनका कहना है कि शिक्षा अर्थात ज्ञान वह पूंजी है जो कभी व्यर्थ नहीं जाती। इनकी प्रथम पदस्थापना मार्च 1992 में मुरैना (मध्यप्रदेश) जिले के पहाडग़ंज विकासखंड में हुई। अपनी पहली पोस्टिंग में ही इन्होंने अत्यंत पिछड़े इस क्षेत्र में अपनी पदस्थी के दौरान ग्रामीणों के जीवन स्तर के उन्नयन की दिशा में उनके लिए पेयजल व्यवस्था, सिंचाई के कूपों का निर्माण कराना, आवासहीनों के लिए आवास का निर्माण कराना, निराश्रितों को समय पर पेंशन की राशि उपलब्ध कराना तथा पहुंच मार्ग का निर्माण जैसे रचनात्मक एवं सराहनीय कार्य किए। उनके उत्कृृष्ठ कार्य हेतु जिला कलेक्टर द्वारा उन्हें ‘उत्कृृष्ठ बीडीओÓ का अवार्ड दिया गया। तीन वर्ष तक यहां सेवाएं देने के बाद इनका वर्ष 1995 में स्थानांतरण उसी जिले के विजयपुुर विकासखंड में हुआ। जहां इन्होंने एक वर्ष तक अपनी सेवाएं दी। यही नवीन पंचायत राज्य व्यवस्था के तहत इनके पद का उन्नयन कर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत के रुप में पदस्थ किया गया। वर्ष 1996 में इनका तबादला रायगढ़ जिले पुस्सौर विकासखंड में हुआ। जहां इन्होंने दो वर्ष तक अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 1998 में इनका तबादला रायपुर जिले के तिल्दा विकासखंड में हुआ। तिल्दा मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रुप में इनके द्वारा फर्जी पेंशनों की रोकथाम, नागरिक सूचना पटल स्थापित करना तथा पुराने निर्माण कार्यों को समय सीमा में पूर्ण कराना जैसे उल्लेखनीय कार्य किए गए। जिसकी प्रशंसा ग्राम संपर्क अभियान के तहत तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी की थी। इनके द्वारा प्रारंभ किया गया नागरिक सूचना पटल की स्थापना के बाद पूरे राज्य में लागू किया गया। इन सब कार्यों के फलस्वरुप इन्हें गणतंत्र दिवस के अवसर पर उत्कृष्ठ अधिकारी के रुप में सम्मानित किया गया। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण हुआ उस समय वह तिल्दा में मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रुप में पदस्थ थे। वर्ष 2002 में इन्हें पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी के रुप में अल्प समय के लिए पदस्थ किया गया था। इनके पश्चात ये राजधानी के विकासखंड धरसींवा में पदस्थ हुए। जहां उन्होंने 2005 तक अपनी सेवाएं दी। इसी वर्ष इनकी पदोन्नति डिप्टी कमिश्नर के रुप में हुई और वे विश्व बैंक पोषित गरीब उन्मूलन परियोजना की ओर से सिंगापुर एवं इंडोनेशिया की यात्रा की। डिप्टी कमिश्नर के रुप में इनकी प्रथम पोस्टिंग राजनांदगांव जिला पंचायत में हुई। जहां वे प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत एवं अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रुप में अपनी सेवाएं दीं। इसी दौरान फरवरी-2006 में जिले के डोंगरगांव विकासखंड में राज्य स्तरीय महात्मा गांधी नरेगा योजना भी शुभारंभ हुआ। इन्होंने सात माह तक राजनांदगांव जिला पंचायत में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2006 में इनकी पदस्थापना उपायुक्त, विकास के रुप में विकास आयुक्त कार्यालय, रायपुर में हुई। जहां इन्होंने क्रमश: महात्मा गांधी नरेगा, इंदिरा आवास स्थापना, गरीबी उन्मूलन परियोजना आदि विभिन्न परियोजनाओं के सफल संचालन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। शासन द्वारा वर्ष 2006 में ही ग्रामीण विकास विभाग के लिए स्टेट का नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया गया। इस दौरान इनके द्वारा राज्य के विभिन्न जिलों को ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जारी की जाने वाली राशियों के समन्वय का कार्य किया गया। वर्ष 2011 में लोकल सेल्फ गर्वनेंस की उच्च स्तरीय प्रशिक्षण के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ फेडरलिज्म, फ्रिबार्ग, स्विटरलैंड से स्कॉलरशिप प्राप्त हुआ। उक्त प्रशिक्षण के लिए भारत से सिर्फ दो प्रतिभागियों का चयन हुआ था। इस दौरान वे स्विटरलैंड और फ्रांस भी गए थे। वर्ष 2012 में इनकी पदोन्नति संयुक्त आयुक्त के रुप में हुई। इस दौरान विकास आयुक्त कार्यालय में विभिन्न पदों पर इन्होंने अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2014 में नवसृजित जिला बेमेतरा के परियोजना निदेशक की जिम्मेदारी दी गई। जहां इन्होंने स्वच्छ भारत अभियान, पंचायत निर्वाचन एवं महात्मा गांधी नरेगा के अभिसरण से कृषि उत्पादन में वृद्धि की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए। वर्ष 2015 में राज्य के प्रशिक्षण संस्थान एसआईआरडी का इन्हें संयुक्त संचालक बनाया गया। यहां इन्होंने प्रशिक्षण संस्थान को नई ऊंचाई तक पहुंचाने की दिशा में वरिष्ठों के साथ सराहनीय कार्य किया। जिसके फलस्वरुप महात्मा गांधी नरेगा के राष्ट्रीय कार्य शाला एवं न्यायपालिका के राज्य स्तरीय कार्यशालाओं का आयोजन संभव हो सका। इस दौरान प्रशिक्षण संस्थान से नियमित पत्रिका के प्र्रकाशन में भी रुचि ली एवं प्रकाशन प्रारंभ हुआ। वे राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान हैदराबाद में विजिटिंग फैक्लटी के रुप में व्याख्यान दे चुके हैं। साथ ही इंदिरा आवास के संशोधित मार्गदर्शिका निर्माण के राष्ट्रीय दल के सदस्य भी रहे थे। वर्ष 2016 में इन्हें पंचायत संचालनालय का संयुक्त संचालक बनाया गया जहां इन्होंंने पंचायती राज्य सशक्तिकरण के लिए कई अभिनव प्रयास किए। वे चार माह के लिए संचालक, सामाजिक अंकेक्षण के पद पर भी रहे। इस अवधि में पहली बार 50 प्रतिशत से ज्यादा ग्राम पंचायतों का सामाजिक अंकेक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ जो कि एक उपलब्धि है। वर्ष 2017 में वे राज्य स्तरीय अध्ययन दल के सदस्य के रुप में सिंगापुर, मलेशिया एवं चीन के विभिन्न प्रांतों का दौरा किया। अप्रैल-2017 में शासन द्वारा इन्हें मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बेमेतरा की जिम्मेदारी दी गई जहां इन्होंने न सिर्फ जिले को खुले में शौचमुक्त कराया बल्कि महात्मा गांधी नरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना एवं एनआरएलएम के तहत शत प्रतिशत लक्ष्य की पूर्ति कर जिले को राज्य के प्रथम पंक्ति के जिलों में खड़ा किया। इस उपलब्धि पर इन्हें उप राष्ट्रपति वैंकया नायडू के हाथों सम्मानित किया गया। फरवरी-2019 में इन्हें मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दंतेवाड़ा की जिम्मेदारी दी गई। अपनी दंतेवाड़ा पदस्थी के दौरान मुख्यमंत्री के निर्देश पर कुपोषण को दूर करने, आम जनता तक स्वास्थ्य सेवा को सुलभ कराने, आदिवासी महिलाओं को स्व सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका से जोडऩे, शिक्षा के स्तर को बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया गया। इनकी दुर्गम क्षेत्र में कुपोषण दूर करने की मुहिम के सफल संचालन के कारण दिल्ली में सिल्वर स्कॉच अवार्ड से सम्मानित किया गया। जनजाति प्रमुख एवं दुर्गम क्षेत्र दंतेवाड़ा में कुपोषण दूर करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाने के पश्चात इन्हें प्रतिष्ठित टॉक शो टेडेक्स में स्पीकर के रुप में आमंत्रित किया गया। इस दौरान जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के सहयोग से दंतेवाड़ा जिले के दुर्गम नक्सली क्षेत्र में प्रशासन की पहुंच को सुनिश्चित करते हुए विकास कार्यों की आधारशिला रखी गई। इस दौरान मेहरार चो मान कार्यक्रम के तहत दंतेवाड़ा जिले में 40 ग्रामों में महिलाओं को मेन्सटुरल हाईजिन की दिशा में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में स्व सहायता समूहों एवं आंगनबाड़़ी कार्यकर्ताओं के सहयोग से उल्लेखनीय कार्य किया गया। मई-2020 में इनके कार्यों और अनुभवों को देखते हुए मुख्यमंत्री के गृह जिले के जिला पंचायत सीईओ की अहम जिम्मेदारी दी गई। जिसे वे पूरे मनोयोग के साथ निभा रहे हैं।बच्चों की क्लास लेने, उन्हें नई-नई जानकारी देने, शिक्षण के स्तर को सुधार करने तथा त्वरित गति से नस्तियों पर निर्णय लेने एवं क्रियान्वयन करने के लिए हमेशा प्रयासरत रहने वाले सीईओ सच्चिदानंद आलोक परिवार के साथ समय बिताने, बैंडमिटन खेलने तथा विभिन्न देशों के सिक्कों के संग्रहण करने में विशेष रुचि रखते हैं। इनके पास लगभग 80 देशों के सिक्कों का संग्रहण हैं। इन्होंने कई राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय क्वीज प्रतियोगिताओं में भाग लिया है। जिनमें से ऑफ मेन एंड मैटर का प्रसारण दूरदर्शन पर हो चुका है। नवीन भाषाएं सीखना इनका शौक है। वे कई भाषाओं के ज्ञाता हैं। स्कूल के दिनों में इन्होंने कई निबंध एवं क्वीज प्रतियोगिताएं जीती हैं। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग सच्चिदानंद आलोक ने कहा कि मैं जहां भी पदस्थ रहा वहां गरीबों को मूूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने, शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने, युवाओं को नई व सही दिशा में लाने, जनता को रोजगार एवं स्वरोजगार उपलब्ध कराने, महिलाओं को स्वास्थ्य, स्वरोजगार उपलब्ध कराने, बच्चों में कुपोषण को दूर करने तथा सिंचाई के संशाधनों में वृृद्धि करने का कार्य पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी से करते आया हूं व आगे भी करता रहूंगा।









