भाई-बहन का पर्व भाई दूज की तिथि इस बार बदल गई है। ये पर्व कार्तिक मास में दिवाली के दूसरे दिन मनाया जाता है। इस बार तिथियों में भुगत भोग्य यानी घटने-बढ़ने के कारण भाई दूज की तिथि भी बढ़ गई है…
नईदिल्ली (ए)। भाई दूज का पर्व दिवाली के बाद मनाया जाता है। इस बार दिवाली का पांच दिवसीय उत्सव छह दिन का है। इस वजह से भाई दूज की तिथि भी बदल गई है। 14 नवंबर को जहां गोवर्धन पूजा है, वहीं भाई दूज 15 नवंबर को मनाई जाएगी। दीपावली के ठीक बाद भाई बहन का पवित्र पर्व भाई दूज मनाया जाता है. इस दिन बहनें अपनी भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं. इसके बदले में भाई बहन को उपहार देते हैं. हर साल भाई दूज का त्योहार कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. ऐसे में हम आपको इस बार भाई दूज पर तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त क्या है, इस आर्टिकल में बताते हैं।
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि की शुरूआत 14 नवंबर 2023 को दोपहर 02:36 बजे से हो रहा है और समापन अगले दिन यानि 15 नवंबर 2023 को दोपहर 01:47 बजे तक होगा।
उदया तिथि 15 नवंबर बुधवार को है तो इस दिन ही भाई दूज मनाया जाएगा. इस दिन राहुकाल को छोड़कर बहनें कभी भी भाई को तिलक कर सकती हैं. राहुकाल दोपहर 12:03 से 01:24 बजे तक रहेगा. सबसे शुभ समय सुबह 06:44 से 09:24 बजे तक है।
पौराणिक कथा के अनुसार, भाई दूज की शुरूआत यमराज की बहन यमुना ने की थी. आपको बता दें कि यमराज और यमुना जी सूर्यदेव की संतान हैं. यमराज अपनी बहन यमुना से बहुत प्रेम करते थे. एक बार उन्हें यमुना की बहुत याद आ रही थी. तब वो अचानक बहन यमुना के घर पहुंच गए. भाई को देखकर यमुना बहुत खुश हो गईं. उन्होंने भाई के लिए ढ़ेर सारा पकवान बनाया. फिर जब वो जाने लगे तो यमुना ने उनके मस्तक पर तिलक लगाया और मिठाई खिलाई और नारियल भेंट स्वरूप दिया. इसके बाद यमराज ने अपनी बहन से कहा वरदान मांगने के लिए कहा।
जिसके जवाब में यमुना जी ने कहा कि भइया मेरे पास सब कुछ है, बस आप हर साल इस दिन मेरे घर जरूर आएं. यमराज ने तथास्तु बोल दिया. साथ ही यमराज ने कहा कि आज के दिन मैं ही नहीं, बल्कि जो भाई अपनी बहन के घर जाकर उससे माथे पर तिलक करवाएगा, उस भाई को यमराज लंबी उम्र का आशीर्वाद देंगे. तब से ही यह त्योहार मनाया जाने लगा।















