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आज देशभर में दिवाली की धूम: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को दी बधाई; जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और भी डिटेल?

दिवाली पर प्रधानमंत्री सहित कई राज्यों के राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों और कई हस्तियों ने देशवासियों बधाई दीं. सीएम योगी ने प्रदेशवासियों के लिए सुख, समृद्धि व शांति की कामना की…

नईदिल्ली (ए)। आज पूरे देशभर में दीपोत्सव का पर्व दीपावली मनाई जा रही है। यह हिन्दू धर्म का एक प्रमुख पर्व है। यह पर्व पूरे भारत में बड़े ही धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाता है। दीपावली को रोशनी, उल्लास और शुभकामनाओं का प्रतीक माना जाता है। दिवाली की रात लक्ष्मी-गणेश की पूजा का सबसे अधिक महत्व होता है। मान्यता है कि यदि आप सच्चे मन और विधि विधान से पूजा करते हैं, तो धन की देवी मां लक्ष्मी और बुद्धि के देवता गणेश आपसे प्रसन्न रहेंगे। आपका पूरा साल अच्छा बीतेगा और आप पर लक्ष्मी-गणेश जी की कृपा बनी रहेगी। दिवाली की रात सर्वार्थ सिद्धि की रात मानी जाता है। ऐसे में शुभ मुहूर्त पर विधि-विधान के साथ पूजन करने से जीवन में खुशियां आती हैं। तो चलिए जानते हैं दिवाली की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, महत्व और इस दिन क्या करें क्या नहीं…

दिवाली 2023 पूजा का शुभ मुहूर्त
दिवाली की पूजा का शुभ मुहूर्त 12 नवंबर की शाम 5 बजकर 40 मिनट से लेकर 7 बजकर 36 मिनट तक है। वहीं लक्ष्मी पूजा के लिए महानिशीथ काल मुहूर्त रात 11 बजकर 39 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 31 मिनट तक है। इस मुहूर्त में लक्ष्मी पूजा करने से जीवन में अपार सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी।

दिवाली पूजा सामग्री लिस्ट

  • मां लक्ष्मी, गणेश जी, माता सरस्वती और कुबेर देव की मूर्ति
  • अक्षत्, लाल फूल, कमल के और गुलाब के फूल, माला, सिंदूर, कुमकुम, रोली, चंदन
  • पान का पत्ता और सुपारी, केसर, फल, कमलगट्टा, पीली कौड़ियां, धान का लावा, बताशा, मिठाई, खीर, मोदक, लड्डू, पंच मेवा
  • शहद, इत्र, गंगाजल, दूध, दही, तेल, शुद्ध घी, कलावा, पंच पल्लव, सप्तधान्य
  • कलश, पीतल का दीपक, मिट्टी का दिया, रुई की बत्ती, नारियल, लक्ष्मी और गणेश के सोने या चांदी के सिक्के, धनिया
  • आसन के लिए लाल या पीले रंग का कपड़ा, लकड़ी की चौकी, आम के पत्ते
  • लौंग, इलायची, दूर्वा आदि।

दिवाली 2023 पूजा विधि
दिवाली पर मुख्य रूप से मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा की जाती है। ऐसे में पूजा के लिए सबसे पहले पूजा स्थान को साफ करें और एक चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। फिर इस चौकी पर बीच में मुट्ठी भर अनाज रखें। कलश को अनाज के बीच में रखें। इसके बाद कलश में पानी भरकर एक सुपारी, गेंदे का फूल, एक सिक्का और कुछ चावल के दाने डालें। कलश पर 5 आम के पत्ते गोलाकार आकार में रखें। बीच में देवी लक्ष्मी की मूर्ति और कलश के दाहिनी ओर भगवान गणेश की मूर्ति रखें। अब एक छोटी-सी थाली में चावल के दानों का एक छोटा सा पहाड़ बनाएं, हल्दी से कमल का फूल बनाएं, कुछ सिक्के डालें और मूर्ति के सामने रखें दें। इसके बाद अपने व्यापार/लेखा पुस्तक और अन्य धन/व्यवसाय से संबंधित वस्तुओं को मूर्ति के सामने रखें। अब देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश को तिलक करें और दीपक जलाएं।

इसके साथ ही कलश पर भी तिलक लगाएं। इसके बाद भगवान गणेश और लक्ष्मी को फूल चढ़ाएं और पूजा के लिए अपनी हथेली में कुछ फूल रखें। अपनी आंखें बंद करें और दिवाली पूजा मंत्र का पाठ करें। हथेली में रखे फूल को भगवान गणेश और लक्ष्मी जी को चढ़ाएं। लक्ष्मी जी की मूर्ति लें और उसे पानी से स्नान कराएं और उसके बाद पंचामृत से स्नान कराएं। मूर्ति को फिर से पानी से स्नान कराकर, एक साफ कपड़े से पोछें और वापस रख दें। मूर्ति पर हल्दी, कुमकुम और चावल डालें। माला को देवी के गले में डालकर अगरबत्ती जलाएं। फिर नारियल, सुपारी, पान का पत्ता माता को अर्पित करें। देवी की मूर्ति के सामने कुछ फूल और सिक्के रखें। थाली में दीया लें, पूजा की घंटी बजाएं और लक्ष्मी जी की आरती करें।

दिवाली पूजा मंत्र
मां लक्ष्मी मंत्र
ऊँ श्रींह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मी नम:॥

श्री गणेश मंत्र
गजाननम्भूतगभू गणादिसेवितं कपित्थ जम्बू फलचारुभक्षणम्।
उमासुतं सु शोक विनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्।

कुबेर मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥

दिवाली पर क्या करें?

  • दिवाली के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ एवं सुन्दर वस्त्र धारण करें।
  • दिन में पकवान बनाएं और घर सजाएं। अपने से बड़ों का आशीर्वाद लें।
  • शाम को पूजा से पहले पुनः स्नान करें।
  • इसके बाद लक्ष्मी-गणेश की विधि-विधान से पूजा करें।
  • व्यावसायिक प्रतिष्ठान, गद्दी की भी विधिपूर्वक पूजा करें।
  • घर के मुख्य द्वार पर दिपक जलाएं।

मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम, माता सीता और उनके भाई लक्ष्मण चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या अपने घर लौटे थे. उनके वापस आने की खुशी में अयोध्यावासियों ने दीये जलाकर उनका भव्य स्वागत किया था. तभी से दीपावली मनाया जाता है. दिवाली पर प्रदेश के नेताओं ने भी बधाई दी है।

दीपावली के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की जनता को बधाई दी है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “देश के अपने सभी परिवारजनों को दीपावली की ढेरों शुभकामनाएं. ये खास त्योहार आपके जीवन में खुशियां, समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य लाए।” देश के अपने सभी परिवारजनों को दीपावली की ढेरों शुभकामनाएं।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए एक्स पर लिखा, “असत्य पर सत्य, अत्याचार पर सदाचार, अंधकार पर प्रकाश की विजय के महापर्व दीपावली की प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं. प्रभु श्री राम व माता जानकी की कृपा से यह पावन पर्व आप सभी के जीवन को सुख, समृद्धि, सौभाग्य एवं आरोग्यता के धवल प्रकाश से दीप्त करे. जय श्री राम।”

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिवाली से पहले शनिवार को देहरादून में कुम्हार मंडी क्षेत्र का दौरा किया और दिवाली के लिए स्थानीय कुम्हारों से मिट्टी के दीये खरीदे. सीएम धामी ने लोगों से स्थानीय उत्पाद खरीदने और ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को आत्मसात करने की अपील की. उन्होंने कहा, ”मिट्टी के दीये दिवाली के त्योहार को पवित्रता प्रदान करते हैं.”

पूजा का मुहूर्त

उदय तिथि के अनुसार 12 नवम्बर को दीपावली पूजन के लिए मुहूर्त इस बार सिंह लग्न रात्रि 12 बजकर 28 मिनट से रात्रि 2 बजकर 43 मिनट तक है. देर रात संभव नहीं हो तो फिर वृषभ लग्न में शाम 6 बजे से 7 बजकर 57 मिनट के बीच करें.

दिवाली की संपूर्ण पूजा विधि

  •  दिवाली के दिन सर्वप्रथम गणेशजी की पूजा करें. फिर पूजन कलश स्थापना करें, लक्ष्मी प्रिय कल्पों की पूजा करें जैसे कौड़ी, शंख आदि.
  • धनतेरस के दिन जिन नये सिक्कों को खरीदा है उनकी पूजा करें.  ध्यान रखें, इस पूजा के समय आप घर में जितने भी पुराने सिक्के हैं, जो आपने पिछली धनतेरसों पर खरीदे हैं, उन्हें भी नये सिक्कों के साथ अभिषेक कर पूजा करें.
  • साथ ही घर में जितनी सुहागिने हैं, उनके पहनने के जेवर आदि भी पूजा में शामिल करें एवं रात्रि भर उन्हें पूजन सामग्री के साथ पूजा स्थल पर ही रहने दें.
  • पूजा के बाद महालक्ष्मी को अंजरी मुद्रा बनाकर सुख-समृद्धि का वर मांगे. याद रखें, महालक्ष्मी को हाथ नहीं जोड़ने हैं, अंजरी मुद्रा बनानी है. फिर नैवेद्य को प्रसाद रूप में ग्रहण करें.
  • पहले महालक्ष्मी के समक्ष ही यानी पूजा स्थल पर एक-दो पटाखे शगुन रूप से छोड़ें और फिर बाहर जाकर पटाखे छोड़ें, पूजन सामग्री को वहीं छोडकर आप पूजा कक्ष से बाहर आ जाएं.
  •  याद रखें कि आपको न तो हाथ जोडने हैं और न ही पूजा समाप्ति के पश्चात आरती उतारनी है. हाँ, आरती के स्थान पर संभव हो तो स्वस्ति वाचन कर लें.

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