दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस)। जब मैं गांव था तब वहां के कलेक्टर जब गांव में आते थे तब उनका वर्किंग स्टाइल देखता था, उनके काम करने के तौर-तरीकों ने मुझे बहुत प्रभावित किया। तब मुझे पता चला कि कलेक्टर कार्यालय से ही सभी कार्य होते है। यही सब देखकर मुझे प्रेरणा मिली कि मैं भी आईएएस बनूगा और समाज और देश की सेवा करूंगा। यह फील्ड ऐसा है कि मैं सीधे तौर पर आम जनता से जुड़कर कार्य कर उनको शासन की योजनाओं का लाभ दिला सकता हु। जनता की सेवा के उद्देश्य से ही मैंने एमबीबीएस भी किया। यह सब बातें दुर्ग जिला के नवपदस्थ कलेक्टर डॉक्टर सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही, उन्होंने अपने आगे की कार्य योजना से भी अवगत कराया। डॉ सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे की प्रारंभिक व हायरसेकंडरी तक कि शिक्षा महाराष्ट्र के भंडारा जिले के ग्राम पंचायत के शासकीय स्कूल में पूरी हुई। वर्ष 2008 में उन्होंने महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस, नासिक से एमबीबीएस की डिग्री हासिल किया। यूपीएससी की तैयारियों में जुट गए और वर्ष 2010 में अपने पहले ही प्रयास में आईपीएस के लिए चयनित हुए। आईपीएस की ट्रेनिंग के दौरान ही वर्ष 2011 में इनका चयन आईएएस के लिए हुआ। ट्रेनिंग के पश्चात वर्ष 2012-13 में उनकी पहली पोस्टिंग बस्तर में हुई। फिर उनका ट्रांसफर बतौर सीईओ जिला पंचायत बिलासपुर में हुई जहाँ उन्होंने करीब ढाई साल तक अपनी सेवाएं दी फिर उनका स्थानांतरण कवर्धा जिला पंचायत सीईओ के लिए हुआ जहां उन्होंने करीब दो वर्ष तक अपनी सेवाएं दी फिर उनका तबादला बतौर कलेक्टर मुंगेली के लिए हुआ जहां उन्होंने डेढ़ साल तक अपनी सेवाएं देने के बाद मई 2020 को दुर्ग कलेक्टर नियुक्त किया गया है। क्रिकेट खेलने, गाना सुनने,बच्चों और फैमिली के साथ समय बिताने और ट्रैवलिंग में विशेष रुचि रखने वाले डॉ भूरे ने कहा कि सरकार की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना और समय पर उनको लाभ दिलाना मेरा उद्देश्य रहता है और मैं इसी योजना के साथ काम करता हु। अपने कार्ययोजना पर बात करते हुए डॉ भूरे ने कहा कि अभी कोरोना महामारी से निपटने के लिए बेहतर प्लान बना रहे है ताकि कोरोना के मरीजों को खोजकर कोरोना वायरस के संक्रमण को जिले में रोका जा सके। क्वारनटाईन सेंटरों में समुचित व्यवस्था किया जाएगा। पीलिया और डेंगू को रोकने के दिशा में भी काम किया जाएगा। डॉ भूरे न कहा कि मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट नरवा, गरुवा, घुरवा, बाड़ी पर भी फोकस कर बेहतर कार्य किया जाएगा। दुर्ग जिला 2 तिहाई शहरी आबादी है। शहरी विकास के साथ-साथ कृषि और ग्रामीण विकास के लिए भी प्रभावी कदम उठाएंगे। एजुकेशन हब होने के नाते दसवीं-बारहवीं के बच्चों के लिए कार्यक्रम बनाया हूं, शिक्षा के क्षेत्र में भी बेहतर कार्य किया जाएगा। एजुकेशन हब होने के नाते जिले के युवाओं से यही कहना चाहूंगा कि उनमें जो ऊर्जा है उसका उपयोग सही दिशा में करे, समाज, राज्य और राष्ट्र के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाये। जो भी जिस फील्ड में काम कर रहे है चाहे वो डॉक्टर हो, स्वास्थ्यकर्मी हो, स्पोट्र्समैन हो, बिजनेसमैन हो, वकील हो सभी अपना योगदान राष्ट्र निर्माण में देवे।









