कार्य समूहों के दस्तावेज उन्हीं शहरों व क्षेत्रों के नाम से जारी हुए हैं, जहां बैठकें हुई थीं। इससे दस्तावेज के साथ भारत की पहचान भी जुड़ गई। इन्हें डेक्कन-खाद्य सुरक्षा व पोषण और चेन्नई-नीला महासागर इको के लिए उच्च स्तरीय सिद्धांत कहा गया है…
नईदिल्ली (ए)। भारत की अध्यक्षता में जी-20 शिखर सम्मेलन अपने मूल एजेंडा और परिणामों के मामले में इतिहास का सबसे महत्वाकांक्षी व सफल सम्मेलन साबित हुआ है। इसमें कुल 112 परिणाम दस्तावेज व अध्यक्षीय दस्तावेज तैयार किए गए। पिछले सम्मेलन से तुलना करें, तो यह दोगुने से भी ज्यादा है। इसी वजह से इसे अब तक का सबसे सफल सम्मेलन माना जा रहा है।
इनमें 73 परिणाम दस्तावेज यानी आउटकम डॉक्यूमेंट्स हैं, जो सदस्य देशों के मंत्रियों की ओर से बीते महीनों में देश के विभिन्न शहरों में हुई बैठकों में बनी सहमति पर तैयार हुए हैं। इन्हें लाइन ऑफ एफर्ट दस्तावेज भी कहते हैं। वहीं, 39 संलग्न दस्तावेज हैं, जिन्हें कार्य समूह के दस्तावेजों से अलग अध्यक्षीय दस्तावेज कहा जाता है।
शहरों से पहचान
कार्य समूहों के दस्तावेज उन्हीं शहरों व क्षेत्रों के नाम से जारी हुए हैं, जहां बैठकें हुई थीं। इससे दस्तावेज के साथ भारत की पहचान भी जुड़ गई। इन्हें डेक्कन-खाद्य सुरक्षा व पोषण और चेन्नई-नीला महासागर इको के लिए उच्च स्तरीय सिद्धांत कहा गया है।
भारत की अध्यक्षता में 9 सितंबर को शुरू हुए दो दिनों का G20 शिखर सम्मेलन का आज दूसरा और आखिरी दिन है. आज समिट का तीसरा सेशन होगा. कल दो सेशन हुए थे. पहले सेशन में ही नेताओं में डिक्लरेशन पर सहमति बन गई।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को दिल्ली के भारत मंडपम में जी20 नेताओं के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया. मेनू की शुरुआत यह दर्शाती है कि भारत अपनी सारी विविधता के साथ ‘स्वाद’ से कैसे जुड़ा है. मेनू में लिखा है, “परंपराओं, रीति-रिवाजों और जलवायु का मिश्रण, भारत कई मायनों में विविध है, स्वाद हमें जोड़ता है।”
दिल्ली घोषणा पर शुक्रवार रात ही बन गई थी सहमति
जी20 समिट में सभी देशों के बीच दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति बन गई है. दिल्ली घोषणा में सभी देशों से “क्षेत्रीय अधिग्रहण के लिए बल प्रयोग से बचने” का आग्रह किया गया है. हालांकि, पूरे दस्तावेज़ में रूस का कोई संदर्भ नहीं है।
जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने कहा, यह लगभग 200 घंटे की लगातार बातचीत का नतीजा था और शुक्रवार रात को ही इस पर सहमति बन गई थी. यह भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया और बाद में मैक्सिको, तुर्की और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले शेरपाओं और उभरते बाजारों का संयुक्त प्रयास था जिसने जी7 देशों पर दबाव डाला और उन्हें मेज पर लाया. पहले मसौदे से बातचीत दूसरे और फिर तीसरे तक चली गई, जबकि सभी देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकों से भी मदद मिली. इसके बाद भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया के साथ-साथ मैक्सिको, तुर्की और सऊदी अरब ने दबाव बनाने के लिए मिलकर काम किया।















