रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास के बाद आज दिल्ली रवाना हो गई। राष्ट्रपति को राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विदाई दी।
राष्ट्रपति को राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध मिलेट्स उत्पाद एवं स्मृति चिन्ह किये भेंट: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के छत्तीसगढ के प्रवास के अंतिम दिन राजभवन में उन्हें ससम्मान बिदाई दी गई। राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन द्वारा श्रीमती मुर्मु को छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध मिलेट्स उत्पाद भेंट किये गये, जिसमें रागी, कोदो, कुटकी, ज्वार, आदि के उत्पाद शामिल थे। साथ ही श्रीमती मुर्मु कोे छत्तीसगढ़ की पहचान, विश्व प्रसिद्ध कोसा के वस्त्र और छत्तीसगढ़ के जनजाति समुदाय के नृत्य को दर्शाता हुआ बेल मेटल से निर्मित स्मृति चिन्ह भी भेंट किया गया। इस अवसर पर राज्य की प्रथम महिला सुप्रभा हरिचंदन भी उपस्थित थी। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने श्री हरिचंदन को ‘राष्ट्रपति भवन चित्रित‘ काष्ठकला भेंट की।

राष्ट्रपति को राज्यपाल ने भेंट की आत्मकथा “बेटल नाॅट यट ओवर”: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को राज्यपाल श्री हरिचंदन ने स्वलिखित आत्मकथा ‘‘बेटल नाॅट यट ओवर‘‘ की प्रति भेंट की। इस पुस्तक में श्री हरिचंदन के जीवन संघर्षों और उनसे मिले अनुभव और सीख को साझा किया गया है। यह किताब मूलरूप से ओडिया भाषा में ‘‘संग्राम सारी नाही‘‘ के नाम से प्रकाशित की गई है। जिसका अंग्रेजी अनुवाद ‘‘बेटल नाॅट यट ओवर‘‘ का विमोचन गत माह नई दिल्ली में किया गया था।

राष्ट्रपति को मुख्यमंत्री ने स्मृति चिन्ह भेंट किये: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के छत्तीसगढ़ के प्रवास के दौरान आज यहां मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन्हें छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान कोसा के वस्त्र भेंट किए। साथ ही उन्होंने राज्य के मिलेट्स कोदो, कुटकी, रागी, ज्वार आदि से तैयार उत्पाद और बस्तर के बेल मेटल से निर्मित कलाकृति भी राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु को भेंट की। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने श्री बघेल को ‘राष्ट्रपति भवन चित्रित‘ काष्ठ कलाकृति और स्मृति चिन्ह भेंट किया।















