पूर्व मेयर सुनीता देवी ने निर्वाचित राखी गुप्ता के खिलाफ राज्य निर्वाचन आयोग में शिकायत की थी. इस मामले में गुरुवार को निर्वाचन आयोग फैसला सुनाया…
छपरा (ए)। राज्य निर्वाचन आयोग ने सारण की मेयर राखी गुप्ता को बर्खास्त कर दिया है. छपरा नगर निगम की मेयर राखी गुप्ता की कुर्सी चली गई है. गुरुवार को तीन बच्चों के मामले में राज्य निर्वाचन आयोग में सुनवाई हुई थी. छपरा नगर निगम की मेयर राखी गुप्ता के नामांकन हलफनामा में बच्चों को लेकर गलत जानकारी दी गई थी. इस मामले में राज्य निर्वाचन आयोग ने एक्शन लिया है. बता दें कि 2022 के दिसंबर में राखी गुप्ता को छपरा नगर निगम से बड़ी जीत मिली थी।
पूरे प्रकरण के बाद हलफनामे में दो बच्चों के जिक्र की बात पूरी तरह से गलत बताया गया, लेकिन छपरा रजिस्ट्री ऑफिस से मिले कागजात के अनुसार राखी गुप्ता को तीन बच्चे होने की बात सामने आई है. इनमें से दो बेटी और एक बेटा शामिल है. इस मामले के बाद एक बच्चे को रिश्तेदार को लिखित रूप से भेंट कर दिया गया था. वहीं, इस मामले को लेकर पर राखी गुप्ता ने कहा कि जब मैं चुनाव जीती थी तो वो मेरी नहीं, जनता की जीत थी. लोगों को लगता है कि राखी गुप्ता हारी है तो यह मेरी हार नहीं, जनता की हार है, जो हमारे पीछे लगे थे उनकी जीत हो गई।
इस मामले में पूर्व मेयर सुनीता देवी को जानकारी मिली थी. चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए राखी गुप्ता की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी. बताया जा रहा है कि करीब पांच महीनों तक लगातार सुनवाई चलती रही. पांच जून को निर्वाचन आयोग द्वारा अंतिम तारीख पर पेशी के दौरान दोनों पक्षों को सुनते हुए फैसला को सुरक्षित रख लिया था. इसके बाद गुरुवार को चुनाव आयोग ने राखी गुप्ता को अयोग्य करार देते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया. वहीं, बिहार के छपरा नगर निगम की मेयर पद के लिए चुनाव कराए जाएंगे. राज्य निर्वाचन आयोग ने सारण के जिला अधिकारी को निर्देश दिया है कि हलफनामे में गलत सूचना देने को लेकर राखी गुप्ता के खिलाफ नगर पालिका एक्ट 2007 के तहत कार्रवाई की जाए।
मॉडल रह चुकी हैं राखी गुप्ता: बता दें ति राखी गुप्ता मॉडल रह चुकी हैं. साल 2021 में आई ग्राम मिसेज बिहार की प्रतियोगिता में भाग ले चुकी हैं, जीत के बाद राखी पहली बार सुर्खियों में आई थीं. राखी का मायका पटना के अलंकार परिवार है. राखी ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई की है. वहीं, शादी के बाद अपने ससुराल के स्वर्ण व्यवसायी कारोबार को लगातार संभालती आ रही हैं. वहीं, एक सितंबर 2022 में उम्मीदवार को लेकर एक नए नियम जारी किए गए थे।
इसमें दो से अधिक बच्चों के माता-पिता निकाय चुनाव के उम्मीदवार नहीं बन सकते हैं. साथ ही प्रस्तावित और समर्थन नहीं बन सकते हैं. इसमें ही स्पष्ट किया गया था कि दो से अधिक संतान वाले लोग अगर किसी दूसरे बच्चों को गोद लेते हैं, तब वह बच्चे जैविक माता-पिता माने जाएंगे. इसका मतलब कि अपने बच्चों को गोद देने के बाद भी चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ही रहेंगे।
निर्वाचन आयोग के फैसला आते ही मेयर समर्थक उग्र हो गए और हंगामा करने लगे। मेयर राखी गुप्ता का कहना है कि उनके दो ही बच्चे हैं, तीसरे बच्चे को गोद लिया था। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर हाईकोर्ट की शरण में हैं। निर्वाचन आयोग ने जो फैसला सुनाया है, उसका वह सम्मान करती हैं।
दरअसल, बिहार नगर पालिका अधिनियम 2007 की धारा 18 (1) (एम) के मुताबिक, अगर किसी नागरिक को 4 अप्रैल, 2008 के बाद तीसरी संतान हुई, तो वह नगरपालिका निर्वाचन में चुनाव नहीं लड़ सकता है. इस अधिनियम में ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि दो से अधिक संतान वाले लोग अगर किसी को बच्चा गोद दे देते हैं तब भी वो उस बच्चे के जैविक माता-पिता माने जाएंगे।











