पीएम मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ राजकीय रात्रिभोज में शामिल होने के लिए पेरिस के एलिसी पैलेस पहुंचे हैं. इस दौरान दोनों ने गर्मजोशी के साथ गले भी मिले हैं…
नईदिल्ली (ए)। भारतीय समुदाय को संबोधित करने के बाद पीएम मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ राजकीय रात्रिभोज में शामिल होने के लिए पेरिस के एलिसी पैलेस पहुंचे हैं. इस दौरान दोनों ने गर्मजोशी के साथ गले भी मिले हैं। रात्रिभोज के लिए पीएम मोदी के पहुंचने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट किया, ”घनिष्ठ मित्र से एक मुलाकात. ऐतिहासिक एलिसी पैलेस में एक निजी रात्रिभोज के लिए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पीएम नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया. यह दोनों नेताओं के लिए अपनी दोस्ती के बंधन को और मजबूत करने और गहरे भारत-फ्रांस संबंधों को संजोने का अवसर है.”
भारतीय समुदाय को संबोधित करने के बाद पीएम मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ राजकीय रात्रिभोज में शामिल होने के लिए पेरिस के एलिसी पैलेस पहुंचे हैं. इस दौरान दोनों ने गर्मजोशी के साथ गले भी मिले हैं। पीएम मोदी ने कहा, ”पिछली बार जब मैं फ्रांस आया था तब तय हुआ था कि फ्रांस में पढ़ने वाले भारतीय स्टूडेंट्स को दो साल का पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा दिया जाएगा. अब यह भी निर्णय लिया गया है कि फ्रांस में मास्टर्स करने वाले भारतीयों को पांच साल का लॉन्ग टर्म पोस्ट-स्टडी वीजा दिया जाएगा.”
पीएम मोदी ने कहा, ”कुछ वर्ष पहले जब नीति आयोग बना तो हमने इंडियन डायस्पोरा के सामर्थ्य और योगदान को उचित स्थान दिया है. मुझे कहते हुए खुशी है कि रीयूनियन आईलैंड में ओसीआई कार्ड को लेकर जो दिक्कतें थीं, अब वो दूर हो गई हैं. अब वहां ओसीआई कार्ड इश्यू होने लगे हैं. हम कोशिश कर रहे हैं कि मार्तिनीक और गवादेलूप में भी इसका समाधान निकाला जाए.”
पीएम मोदी ने कहा, ”भारत दुनिया का पहला देश है जहां विदेश में रहने वाले भारतीय समुदाय के माध्यम से भेजा गया धन 100 बिलियन डॉलर को पार चुका है. खुशी की बात है कि आपका ये योगदान निरंतर बढ़ रहा है. मेरा आपसे एक और आग्रह है कि आपको अब भारत में निवेश के लिए भी पूरे उत्साह से आगे आना होगा. भारत अब अगले 25 वर्षों में विकसित होने के लक्ष्य पर काम कर रहा है. इसमें आपकी भूमिका भी बड़ी है. आप जिस भी सेक्टर में काम कर रहे हैं, उससे जुड़ी संभावनाओं को जरूर भारत में एक्सप्लोर करें.”
पीएम मोदी ने कहा, ”मुझे खुशी है कि भारत-फ्रांस इस दिशा में भी मिलकर काम कर रहे हैं. फ्रांस में भारत के यूपीआई के उपयोग को लेकर भी समझौता हो गया है. मैं तो समझौता करके चला जाऊंगा, आगे बढ़ाने का काम आपका है. आने वाले दिनों में इसकी शुरुआत एफिल टावर से की जाएगी. यानी अब भारतीय टूरिस्ट मोबाइल ऐप के जरिये एफिल टावर पर रुपये में भुगतान कर पाएगा.”
डिजिटल इंडिया की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ”मैं आपको भी चुनौती देता हूं कि अगली बार आप भारत में आएं तो जेब में एक भी पैसा लिए बगैर निकलिए घर से, खाली जेब, सिर्फ मोबाइल फोन पर यूपीआई ऐप को डाउनलोड करके रख लीजिए, आप पूरा हिंदुस्तान घूमकर के आएंगे, एक नए पैसे कैश की जरूरत के बिना आप अपना गुजारा कर सकते हैं।
पीएम मोदी ने कहा, ”इक्कीसवीं सदी की दुनिया टेक्नोलॉजी और टैलेंट के दम पर ही आगे बढ़ेगी. भारत और फ्रांस के बीच साझेदारी का यह बहुत बड़ा आधार है. हमारा स्पेस प्रोग्राम इसका प्रमाण है. थुंबा में जब साउंडिंग रॉकेट स्टेशन के निर्माण की बात आई तो फ्रांस ही था जो मदद के लिए आगे आया. उसके बाद से हम दोनों देशों ने स्पेस सेक्टर में बहुत लंबा सफर तय किया है. आज हम एक-दूसरे के सैटेलाइट्स लॉन्च कर रहे हैं. आपको खुशी होगी अभी जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो भारत में चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग के लिए रिवर्स काउंटिंग की गूंज सुनाई दे रही है.”
पीएम मोदी ने कहा, ”फ्रांस का गौरवगान करते हुए महात्मा गांधी ने कहा था- लिबर्टी, इक्वलिटी एंड फ्रेटरनिटी दुनिया को इन तीन शब्दों की शक्ति समझाने वाला देश फ्रांस है. जिस समय विश्व के अधिकांश देश भारत को सिर्फ आधिपत्य जमाने की दृष्टि से देख रहे थे तब नोबेल पुरस्कार विजेता रोमा रोला ने कहा था इंडिया इज द मदर ऑफ अवर सिविलाइजेशन.”
पीएम मोदी ने कहा, ”मेरा खुद का व्यक्तिगत रूप से फ्रांस के प्रति लगाव बहुत पुराना रहा है. मैं उसे कभी भूल नहीं सकता. करीब-करीब 40 साल पहले गुजरात के अहमदाबाद में फ्रांस के एक कल्चरल सेंटर अलायंस फ्रांसे की शुरुआत हुई थी और भारत में फ्रांस के उस कल्चरल सेंटर का पहला मेंबर आज आपसे बात कर रहा है. मजा इस बात का है कि कुछ साल पहले फ्रांस सरकार ने पुराने रिकॉर्ड में से मेरा वहां का आईकार्ड निकालकर उसका जेरोक्स मुझे दिया था, वो उपहार मेरे लिए आज भी अनमोल है.”
पीएम मोदी ने कहा, ”फ्रांस का नेशनल एंथम कहता है मार्शॉ-मार्शॉ यानी लेट अस मार्च, लेट अस मार्च, हमारे यहां भी वैदिक काल से जो मंत्र हमें प्रेरणा देता रहा है, वो है चरैवेती-चरैवेती, यानी चलते रहिए, लेट्स मार्च… और यही भावना कल हमें नेशनल डे परेड में भी दिखाई देने वाली है. जल, थल, नभ में भारत की रक्षा करने वाली तीनों सेनाओं के जवान कल परेड में हिस्सा लेने वाले हैं. ये जो संग है न, कुछ विशेष संग है. संग भी है, अलग-अलग रंग भी है और चारों तरफ उमंग भी है. ये वाकई अद्भुत है.”
पीएम मोदी ने कहा, ”मुझे आज बताया गया कि आज इस समारोह में, बहुत लोग ऐसे हैं, जो 11-11, 12-12 घंटे सफर करके यहां पहुंचे हैं. इससे बड़ा प्यार क्या हो सकता है जी, हम जानते हैं कि टेक्नोलॉजी के जमाने में किसी के लिए भी घर बैठकर के मोबाइल फोन पर लाइव टेलीकास्ट सुनना तो मुश्किल काम नहीं है लेकिन उसके बावजूद भी इतनी बड़ी तादात में, इतने दूर से लोगों का आना, समय निकालकर आना… मेरे लिए तो एक बहुत बड़ा सौभाग्य का अवसर है कि मुझे आप सबके दर्शन करने का अवसर मिला है. मैं आप सभी का यहां आने के लिए हृदय से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं.”









