भिलाई। “जंगल मानव संस्कृति की धरोहर हैं,” इस उक्ति को केन्द्र में रखकर शकुन्तला ग्रुप ऑफ स्कूल्स द्वारा शकुन्तला विद्यालय आडिटोरियम में शारदा विद्यालय एवं शकुन्तला विद्यालय के नन्हे-मुन्नों के लिए जंगल सफारी थीम के तहत् कई गतिविधियों का आयोजन किया गया।
इन तीन दिवसीय गतिविधियों के मध्य विद्यार्थियों में नवीन उत्साह बिखेरते रहे शकुन्तला ग्रुप ऑफ स्कूल्स के डायरेक्टर संजय ओझा। अभ्यारण्य के इस उत्सव में उन्होंने मुख्य अतिथि की भूमिका भी निभाई। कार्यक्रम का प्रारम्भ मुख्य अतिथि
एवं अन्य गणमान्य अतिथियों को पुष्प हार पहनाकर किया गया।
इसके पश्चात् बाल-वाटिका के विद्यार्थियों को बैलगाड़ी के माध्यम से जंगल का रूप लिए आडिटोरियम में प्रवेश कराया
गया। जंगली जानवरों के प्रतिरूपों के मध्य विद्यार्थियों ने कई मनोरंजक गतिविधियों में भाग लिया। जंगल की समझ को विकसित करने के उद्देश्य से विद्यार्थियों को वन्य जीवन पर
आधारित फिल्म भी दिखाई गई।
जंगल का हमारे जीवन में महत्व बताते हुए शिक्षिकाओं ने
आकर्षक नृत्य की प्रस्तुति भी दी। इसी सुरम्य वातावरण में विद्यार्थियों ने भोजन ग्रहण किया। सभी गतिविधियों में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सुन्दरता एवं शिक्षा के इस मेले में विद्यार्थियों को प्रकृति के साथ जोड़ा गया, उसका महत्व समझाया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि संजय ओझा ने बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जंगल वह सच है जिसके बिना मानव का हर कार्य अधूरा है। वन तथा वन्य पशु ही प्रकृति
के चक्र को व्यवस्थित रखते हैं। उनका आदर करते हुए हमें उन्हें हानि नहीं पहुँचानी चाहिए।
अरण्य विहार के इस शैक्षिक पर्व में प्राचार्य विपिन कुमार (शकुन्तला विद्यालय), मैनेजर ममता ओझा (शारदा विद्यालय रिसाली सेक्टर), व्ही. दुबे, अभय दुबे, प्राचार्या सुतापा सरकार (शारदा विद्यालय रिसाली), प्राचार्या आरती मेहरा (शकुन्तला विद्यालय क्र—2), उपप्राचार्या जी. रंजना कुमार, अनिता नायर, हेड मिस्ट्रेस पुष्पा सिंह, सीनियर मिस्ट्रेस बलजीत कौर, रेन्जिनी एम.आर. गतिविधि प्रभारी पूजा बब्बर, राजेश वर्मा, प्रतीक ओझा, वनिता ओझा एवं प्री- प्रायमरी शिक्षक-शिक्षिकायें भी भागीदार बने।









