
भिलाई। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों द्वारा बिछाए गये विस्फोटकों और बदमाशो की तलाश बेल्जियम शेफर्ड नस्ल के 22 डॉग करेंगे। बेल्जियम शेफर्ड डॉग को एक अत्यंत बुद्धिमान, सतर्क, संयमी और आज्ञाकारी प्रजाति का माना जाता है। इसलिए इस प्रजाति को इस कार्य के लिए अब प्रशिक्षित किया जा रहा है।
छसबल सातवीं वाहिनी, भिलाई के सेनानी विजय अग्रवाल ने बताया कि पुलिस मुख्यालय से अनुमति मिलने के बाद छग में अक्टूबर 2019 को बेल्जियम शेफर्ड प्रजाति के डॉग का प्रजनन किया गया था। जिसके फलस्वरूप 22 पप्स की प्राप्ति हुई है। छग सशस्त्र बल की सातवीं वाहिनी द्वारा वर्ष 2002 से डॉग प्रशिक्षण केंद्र का सफलतापूर्वक नियमन किया जा रहा है। बेल्जियम शेफर्ड आज्ञाकारिता, प्रशिक्षण और डॉग की फुर्ती जैसे खेलो में अच्छा प्रदर्शन करते है। इनका प्रयोग सहायता, खोज और बचाव कार्यो के साथ-साथ पुलिस, सेना और मादक पदार्थों की तलाश करने से सम्बंधित कार्यो में भी किया जाता है।
इन्हें सूंघने वाले डॉगो की सबसे अच्छी किस्मो में से एक माना जाता है। इस प्रजनन प्रक्रिया के सफल कार्यान्वयन और विनियमन के साथ, छग सशस्त्र बल की सातवीं वाहिनी ने सरकारी धन की बचत में सफलता हासिल की है। डॉग ट्रेनिग सेंटर में पूरी तरह से सुसज्जित आधुनिक डॉग केनेल स्थापित किए गए है। पच्चीस प्रशिक्षकों और डॉग हैंडलर्स को इस कार्य के लिए प्रशिक्षित कर उन्हें वहां नियुक्ति किया गया है। स्विमिंग प्रशिक्षण के लिए एक स्विमिंग पूल भी बनवाया गया है। प्रत्येक केनेल के सामने एक विवरण बोर्ड रखा गया है, जो विशेष डॉग के विवरण को निर्दिष्ट करता है। बेल्जियम शेफर्ड के 22 पप्स के अलावा एक लेब्राडोग और रोटिवलर पप्स भी वहां प्रशिक्षण ले रहे है। आमतौर पर ग्रूमिंग तीन महीने की उम्र से शुरू होती है और ट्रेनिंग छह महीने से शुरू होती है। डॉग की विभिन्न किस्मों के लिए प्रशिक्षण के विभिन्न तरीकों को अपनाया जाता है। स्निफर डॉग को नक्सल क्षेत्रो, नहरों और एंटी सबोटेज यूनिट में तलाशी अभियान के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। ट्रैकिंग डॉगो को जमीन की सतह की जांच के लिए प्रशिक्षित किया जाता है और बचाव प्रबन्धन के लिए बचाव डॉग को औपचारिक रूप से प्रशिक्षित किया जाता है।
इनका उपयोग अमेरिकी एजेंसियों द्वारा ओसामा बिन लादेन को ट्रैक करने के लिए किया गया था।
17 लाख की बचत हुई
बेल्जियम शेफर्ड के प्रजाति के सभी डॉग की कीमत करीब 17 लाख रुपये है। इसमें से प्रत्येक की कीमत करीब 70-80 हज़ार रुपये बताई जाती है। बता दे कि इस समय राज्य पुलिस और नक्सली मोर्चे पर 73 प्रशिक्षित डॉग को तैनात किया गया है। इन सभी को हैदराबाद और चंडीगढ़ से खरीदा गया था। उस समय वह 2 महीने के थे।
छत्तीसगढ़ी में हुआ नामकरण
प्रजनन के बाद सभी पप्स के नामकरण छत्तीसगढ़ी में किया गया है। इनके नाम भूरी, गुड्डू, गेंडू, चोवा, दुलार और सुनिता रखा गया है। यह सभी नाम से बुलाये जाने पर तुरन्त अभिवादन करने के साथ ही बिना किसी बहानेबाजी के प्रशिक्षण भी लेते है।







