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चैत्र नवरात्रि का आज छठवां दिन: मां कात्यायनी की पूजा से दूर होगी विवाह की बाधा, जानें पूजा विधि और उपाय

चैत्र नवरात्रि के छठे दिन यानी 27 मार्च 2023 को मां कात्यायनी की पूजा होगी. जानते हैं मां कात्यायनी की पूजा विधि, मंत्र, उपाय और मुहूर्त….

नईदिल्ली (ए)। नवरात्रि के छठवें दिन मां दुर्गा की छठी शक्ति मां कात्यायनी की पूजा-अराधना के लिए समर्पित होता है. बता दें कि 22 मार्च 2023 से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है और भक्ति-उपासना का पर्व नवरात्रि देशभर में मनाया जा रहा है. नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है. 22 मार्च को घटस्थापना के साथ ही नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्माचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कुष्मांडा और पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा की गई. अब नवरात्रि के छठवें दिन सोमवार 27 मार्च 2023 को मां दुर्गा के छठवें अवतार मां कात्यायनी की पूजा की जाएगी. मां कात्यायनी का पूजा मंत्र है-

या देवी सर्वभू‍तेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

चैत्र नवरात्रि 2023 छठवें दिन का मुहूर्त

चैत्र शुक्ल षष्ठी तिथि शुरू – 26 मार्च 2023, दोपहर 04.32

चैत्र शुक्ल षष्ठी तिथि समाप्त – 27 मार्च 2023, शाम 05.27

गोधूलि मुहूर्त – शाम 06.35 – शाम 06.

मां कात्यायनी की पूजा के शुभ योग

  • रवि योग – सुबह 06.18 – दोपहर 03.27
  • सर्वार्थ सिद्धि योग – पूरे दिन
  • अमृत सिद्धि योग – 27 मार्च 2023, दोपहर 03.27 – 28 मार्च 2023, सुबह 06.16
  • आयुष्मान योग – 26 मार्च 2023, रात 11.33 – 27 मार्च 2023, रात 11.20

मां कात्यायनी की पूजा विधि

मां कात्यायनी का संबंध बृहस्पति और आंशिक संबंध शुक्र से भी है. ऐसे में इनकी पूजा में पीले रंग का ज्यादा प्रयोग करें. देवी कात्यायनी की उपासना गोधूलि वेला में करें. इस समय दूध में केसर मिलाकर देवी कात्यायनी का अभिषेक करें. रोली, मौली, हल्दी, अक्षत, फूल अर्पित करें. ॐ देवी कात्यायन्यै नमः का एक माला जाप करें. माता को शहद का भोग बहुत प्रिय है. आरती करें और फिर जागरण कर देवी के भजन-कीर्तन करें.

  • प्रिय रंग – पीला
  • प्रिय भोग – शहद

मां कात्यायनी के उपाय

शीघ्र विवाह  या प्रेम संबंधी मामलों के लिए चैत्र नवरात्रि के छठवें दिन शाम के समय मां कात्यायनी को हल्दी की 3 गांठ चढ़ाएं अब सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए पीले फूल चढ़ाते हुए ‘ॐ कात्यायनी महामये महायोगिन्यधीश्वरी। नंद गोप सुतं देहि पतिं में कुरुते नम:।।’ मंत्र का 108 बार जाप करें. हर मंत्र के बाद एक पीला फूल माता को चढ़ाए. गोबर के उपले जलाकर उस पर लौंग व कपूर की आहुति दें. मान्यता है विवाह और वैवाहिक जीवन संबंधी हर समस्या का निवारण होता है.

मां कात्यायनी के मंत्र

  • क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:।
  • चंद्र हासोज्ज वलकरा शार्दू लवर वाहना कात्यायनी शुभं दद्या देवी दानव घातिनि
  • या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत भव्य और दिव्य है और इनका वर्ण चमकीला है.  मां कात्यायनी की सवारी सिंह है. इनकी चार भुजाएं हैं, जिस कारण इन्हें चतुर्भुज देवी भी कहा जाता है. मां कात्यायनी ने अपनी प्रत्येक भुजा में तलवार, कमल, अभय मुद्रा और वर मुद्रा धारण की है. इनकी पूजा करने से रोग-शोक, कष्ट और भय दूर होते हैं और जन्मों के संताप दूर हो जाते हैं. साथ ही इनकी पूजा से शीघ्र विवाह के योग भी बनते हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार,कात्य गोत्र में एक विश्वप्रसिद्ध महर्षि थे, जिनका नाम कात्यायन था. उनकी कोई पुत्री नहीं थी. महर्षि ने पुत्री प्राप्ति की इच्छा के लिए भगवती जगदम्बा की उपासना और कठिन तपस्या की. महर्षि की कठिन तपस्या से मां जगदम्बा प्रसन्न हुईं और उन्होंने महर्षि कात्यायन के यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया. यही देवी मां कात्यायनी के नाम से विख्यात हुईं. कहा जाता है कि महर्षि कात्यायन के यहां पुत्री के रूप में जन्म लेने वाली मां कात्यायनी बेहद गुणवती कन्या थी. इनके जैसी गुणवान, रूपवती और ज्ञानवान कन्या पूरे संसार में नहीं थी।

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