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चैत्र नवरात्रि का आज पांचवा दिन: संतान सुख की कामना के लिए ऐसे करें स्कंदमाता की पूजा, जानें विधि और उपाय

नवरात्रि का पांचवा दिन देवी स्कंदमाता को समर्पित है.स्कंदमाता से शिक्षा प्राप्त कर ही कार्तिकेय ने तारकासुर का अंत किया था. आज 26 मार्च को स्कंदमाता की पूजा की जाएगी…

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। 
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी॥

नईदिल्ली (ए)। बुधवार 22 मार्च 2023 से चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व की शुरुआत हो चुकी है और आस्था-भक्ति के साथ नवरात्रि का त्योहार मनाया जा रहा है. नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है और व्रत रखे जाते हैं. घटस्थापना के साथ ही नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्माचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा और चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की गई. अब नवरात्रि के पांचवे दिन आज रविवार 26 मार्च 2023 को मां दुर्गा की पांचवी शक्ति देवी स्कंदमाता की पूजा की जाएगी। स्कंदमाता का पूजा मंत्र है-

या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

देवी स्कंदमाता का स्वरूप

माता का वाहन सिंह है. स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इनका नाम स्कंदमाता पड़ा. इसकी गोद में स्कंद बालस्वरूप में विराजित हैं. देवी स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं. अपनी दाईं ओर की भुजा से देवी स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं और नीचे भुजा में कमल का फूल है. बाईं ओर ऊपर की भुजा में वरदमुद्रा में है और नीचे भुजा में भी कमल का फूल है. इनका वर्ण बिल्कुल शुभ्र है. कमल पर विराजमान होने के कारण इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है।

देवी स्कंदमाता की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, तारकासुर नाम का एक राक्षस था, जिसका आतंक बहुत बढ़ गया था. लेकिन तारकासुर का अंत कोई नहीं कर सकता था. क्योंकि भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय के हाथों की उसका अंत संभव था. ऐसे में मां पार्वती ने अपने पुत्र स्कंद यानी कार्तिकेय को युद्ध के लिए प्रशिक्षित करने के लिए स्कंदमाता का रूप धारण किया. स्कंदमाता से युद्ध का प्रशिक्षण लेने के बाद कार्तिकेय ने तारकासुर का अंत किया।

स्कंदमाता की पूजा करने और कथा पढ़ने-सुनने से संतान सुख की प्राप्ति होती है. स्कंदमाता की कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है. कहा जाता है कि, कालिदास द्वारा रचित रघुवंशम महाकाव्य और मेघदूक रचनाएं देवी स्कंदमाता की कृपा से ही संभव हुई।

चैत्र नवरात्रि 2023 पांचवे दिन का मुहूर्त

चैत्र शुक्ल पंचमी तिथि शुरू – 25 मार्च 2023, दोपहर 04.23

चैत्र शुक्ल पंचमी तिथि समाप्त – 26 मार्च 2023, दोपहर 04.32

  • शुभ (उत्तम) – सुबह 07.52 – सुबह 09.24
  • प्रीति योग – प्रात: 12.20 – रात 11.33
  • रवि योग – 26 मार्च 2023, दोपहर 02.01 – 27 मार्च 2023, सुबह 06.18

मां स्कंदमाता की पूजा विधि

सांसारिक जीवों में नवचेतना का बीज बोने वाली देवी कहलाती हैं मां स्कंदमाता. चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन स्नान के बाद पीले वस्त्र पहनें और फिर देवी को पीला चंदन, पीली चुनरी, पीली चूड़ियां, पीले फूल अर्पित करें. पूजा में ऊं स्कंदमात्रै नम: का जाप करते रहें. मां स्कंदमाता को केले का भोग अति प्रिय है. खीर में केसर डालकर भी नेवैद्य लगाया जा सकता है. मां स्कंदमाता के मंत्रों का जाप करें और आरती के बाद 5 कन्याओं को केले का प्रसाद बांटें. मान्यता है इससे देवी स्कंदमाता बहुत प्रसन्न होती है और संतान पर आने वाले सभी संकटों का नाश करती है. संतान हर कठिनाईयों को आसानी से पार करने में सक्षम बनता है.

  • प्रिय रंग – पीला
  • प्रिय भोग – केला

मां स्कंदमाता का मंत्र

  • ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:
  • या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
  • सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।

मां स्कंदमाता के उपाय

संतान प्राप्ति की कामना के लिए एक चुनरी में नारियल बांध लें और “नन्दगोपगृहे जाता यशोदागर्भ सम्भवा. ततस्तौ नाशयिष्यामि विन्ध्याचलनिवासिनी”. ये मंत्र बोलते हुए देवी को नारियल और चुनरी को देवी स्कंदमाता का ध्यान करते हुए माता के चरणों में चढ़ाएं. इसके बाद इसे शयनकक्ष में सिरहाने पर रखें. मान्यता है कि स्कंदमाता की पूजा से संतान की प्राप्ति में आ रही बाधाओं का अंत होता है।

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