भिलाई (सारनाथ एक्सप्रेस): हम छ: बहन और एक भाई थे। माता पिता पढ़ें- लिखे नही थे, परिवार में भी कोई पढ़ा-लिखा नही था। उस वक्त बच्चियों को पढ़ाना अच्छा नही समझते थे। मैं भाई बहनों में पांचवे नम्बर की थी। एससी जाति होने के कारण छोटे उम्र में ही भाई बहन की शादी हो गई थी। पांचवी के बाद से मुझे भी पढ़ाना नही चाहते थे। मैं पढऩे में अच्छी थी तो मेरे शिक्षकों ने मेरी माता से कहा कि इसको पढ़ाओ, आगे कुछ अच्छा करेगी। तब माता के सहयोग से आगे पढ़ी। आठवी तक अपने गांव में ही पढ़ी फिर आगे के पढ़ाई के लिए बड़ी बहन के यहां चली गई और वहां जाकर पढ़ी। जब होश संभाला तब पढ़ाई का महत्व समझी और आगे पढ़ लिखकर यहां तक पहुंची। बिना किसी कोचिंग, सहयोग के स्वयं से पढ़ लिखकर यहां तक पहुंची हूँ। घोर नक्सली क्षेत्र से निकलकर पहली महिला थी जो शासकीय नौकरी में आई थी। यह सब बातें सारनाथ एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए दुर्ग जिले में पदस्थ ट्रैफिक इंस्पेक्टर लता चौरे ने कही। इंस्पेक्टर लता चौरे की प्रारम्भिक शिक्षा राजनंदगांव जिले के डूमरटोला शासकीय विद्यालय में हुआ था। हायरसेकंडरी तक कि शिक्षा इन्होंने अम्बागढ़ के कौडि़कसा शासकीय विद्यालय में हुई थी। वर्ष 1997 में इन्होंने अम्बागढ़ शासकीय महाविद्यालय से बायोलॉजी में स्नातक की डिग्री हासिल किया। वर्ष 1997 में पुलिस कांस्टेबल भर्ती में इन्होंने हिस्सा लिया और चयनित हुई। करीब 15 माह नौकरी करने के बाद वर्ष 1998 में सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में भाग ली और चयनित हुई। वर्ष 1999 में सागर (मप्र) में ट्रेनिंग के बाद जुलाई 2000 में रतलाम के नामली थाना में पीएसआई पद पर दिसम्बर 2000 तक पदस्थ रही। छग राज्य बनने के बाद वर्ष 2001 में रायगढ़ में पदस्थ हुई जहां इन्होंने वर्ष 2002 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2002 से 2003 तक धमतरी में अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2003 से 2004 तक दुर्ग में अपनी सेवाए दी। वर्ष 2004 में रायपुर में पदस्थ हुई। रायपुर में छ: माह अपनी सेवाएं देने के बाद वर्ष 2004 में ही सरगुजा पोस्टिंग हो गई एक वर्ष तक अपनी सेवाएं दी। नया जिला सूरजपुर बना तब इनका तबादला सूरजपुर हुआ जहाँ इन्होंने वर्ष 2005 से 2008 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2008 में इनका तबादला कांकेर हुआ जहा इन्होने एक वर्ष तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2009 में इनका प्रमोशन हुआ और इन्हें इंस्पेक्टर बनाया गया साथ रायपुर पोस्टिंग की गई जहां इन्होंने वर्ष 2013 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2013 में पुन: इनका तबादला सरगुजा हुआ जहाँ इन्होंने वर्ष 2016 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2016 में इनका तबादल दुर्ग हुआ अब से यह अपनी सेवाएं यहाँ दे रही है। दार्शनिक स्थल घूमना और उनको जानने में विशेष रुचि रखने वाली लता चौरे ने बताया कि शासकीय नौकरी करने का सोची थी इसलिए जो वेकेंसी निकली उसको भरी और नौकरी कर रही हु। महिलाओ से यही कहूंगी की लगन और मेहनत करे,जो लक्ष्य चाहते है उसके लिए मेहनत करें। किसी के भरोसे न रहकर खुद पर विश्वास रखे। अपने ऊपर कॉन्फिडेंस लाना होगा कि मैं यह कर सकती हूं तभी हो पायेगा। आर्थिक रूप से सशक्त बनना चाहती है तो कुछ न कुछ कार्य करे। किसी भी कार्य को नकारे नही,जरूरी नही की शासकीय नौकरी से ही सब सम्भव हो,वो जो काम करना चाहती है वो करे और आर्थिक रूप से सशक्त बने।









