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मेरी सोच ही मेरी सफलता है : व्ही. प्रभा राव…sarnathexpress.com

भिलाई (सारनाथ एक्सप्रेस): स्कूल में पढ़ते हुए एनसीसी ज्वाइन की। दिल्ली के कैंप में बेस्ट फायरिंग का पुरस्कार मिला जिससे मुझे इस फील्ड में रुचि हुई और ये लाईन मुझे टच किया। एनसीसी में देशभक्ति और अनुशासन में रहकर कार्य करना मुझे अच्छा लगा और  पढ़ाई के दौरान एनसीसी में जाना मेरी  जिंदगी का सबसे बड़ा बदलाव था। मैं इसी में रुचि ली और पुलिस विभाग में आ गई। जबकि मेरे परिवार और मेरे जिला भर में दूर-दूर तक कोई पुलिस में नहीं था। यह सब बातें दुर्ग महिला थाना प्रभारी निरीक्षक व्ही.प्रभा राव ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में बताया। उन्होंने आपने आरक्षक से लेकर निरीक्षक बनने तक के सफर को हमसे साझा किया।व्ही.प्रभा राव की प्र्रारंभिक शिक्षा बीएसपी प्रायमरी स्कूल सेक्टर-10 में हुई। बाकी की पढ़ाई बीएसपी सेक्टर-2 गल्र्स स्कूल से हुई। इन्होंने वर्ष 1983 में कल्याण कालेज से आटर्स में स्नातक किया। वर्ष 1982 में पुलिस आरक्षक भर्ती में इन्होंने भाग लिया और चयन में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए महिला आरक्षक के रुप में भर्ती हुई। वर्ष 1985 में रायपुर, माना में ट्रेनिंग की। पूरे ट्रेनिंग की जनरल कमांडर रहीं। कानून  में डिस्टेंशन माक्र्स प्राप्त करते हुए उत्तीर्ण हुई। उनकी पहली पोस्टिंग दुर्ग जिला रहा। वर्ष 1999 में गणतंत्र दिवस पर  इन्हें बेस्ट महिला प्लांटून कमांडर का प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। वर्ष 2002 में तत्कालीन दुर्ग महापौर सरोज पाण्डेय द्वारा बेस्ट लेडिस पुलिस का अवार्ड मिला। वर्ष 2004 में बेस्ट लेडिस पुलिस अवार्ड साथ ही दुर्ग-भिलाई ट्रैफिक पुलिस में रहते हुए सात माह में सबसे ज्यादा चालानी कार्रवाई 2091 चालान करते हुए 2 लाख 21 हजार 800 रुपए शमन शुल्क वसूल किया। वर्ष 2005 में हाई प्रोफाइल मर्डर केस जयेश शाह की यह जांच अधिकारी रहीं। वर्ष 2011 में इन्हें राष्ट्रपति पुलिस मेडल के लिए भी चयनित किया गया। कुल 104 बार एक्सीलेंट सार्टिफिकेट और 32 बार केस अवार्ड इन्हें पुलिस विभाग द्वारा दिया जा चुका है। यह अपने अब तक के सर्विस के दौरान रायपुर, बस्तर, राजनांदगांव जिलों में भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। वर्ष 1991 में इन्हें प्रमोट कर आरक्षक से प्रधान आरक्षक बनाया गया, वर्ष 1998 में इन्हें प्रधान आरक्षक से सहायक पुलिस निरीक्षक बनाया गया, वर्ष 2007 में इन्हें एएसआई से सब इंस्पेक्टर बनाया गया और वर्ष 2013 में इन्हें प्रमोट कर इंस्पेक्टर बनाया गया है। नवंबर 2019 से यह दुर्ग महिला थाना प्रभारी के पद पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। पुलिस अधीक्षक महोदय ने मुझे थाना प्रभारी का चार्ज देते समय यही कहा था कि बड़े लोगों की सुनवाई तो हर जगह होती है लेकिन गरीब महिलाओं की सुनवाई आपको करना है और उनकी समस्याओं का निराकरण करना है। मैं अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेश और मार्गदर्शन को सर-आंखों पर रखी और अपनी इच्छा शक्ति लगाई तो आज यह सफलता मिली है आगे भी इसी विचार और भावनाओं के साथ काम करुंगी। यहां पदस्थ रहते हुए अब तक 18 परिवार को अपने विवेक और इच्छा शक्ति से उनके घर को बसाया है। मेरी सोच ही मेरी सफलता है। मसीह गीत सुनने और अपने पिता को अपना आदर्श मानने वाली निरीक्षक व्ही.प्रभा राव ने महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि मैं अपने अनुभव के आधार पर बता रही हूं कि महिला अगर चाहेगी किसी काम को करना तो वह उसे अवश्य कर सकती है। महिला अपने इच्छा के अनुसार हर कार्य को कर सकती है वो जो चाहेगी वो करके दिखा सकती है। वह अपने इच्छा शक्ति के बल पर आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती है। महिलाओं का रिजल्ट हर क्षेत्र में बेहतर हो रहा है। महिलाओं में मातृत्व की शक्ति उसे सफलता की श्रेणी में ले जाती है।

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