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पिताजी मेरे हाथों को देखकर कहा करते थे कि यह तो एक सर्जन का हाथ है : डॉ स्मिता सिन्हा

दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस): पढ़ाई के दौरान ही मेरे पिताजी का देहांत हो गया था। हम चार बहने है, हमने संघर्ष करते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त किया। मेरे पिताजी मुझे हमेशा प्रेरित करते थे वो मेरे हाथों को देखकर अक्सर कहा करते थे कि यह तो एक सर्जन का हाथ है, उनके इस बातों से प्रेरित होकर ही मैंने डॉक्टर बनने का निर्णय लिया और इस फील्ड का चयन किया। यह सब बातें दुर्ग जिला अस्पताल में पदस्थ स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉक्टर स्मिता सिन्हा ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया।डॉ स्मिता सिन्हा की प्रारंभिक शिक्षा इंदिरा गांधी आवासीय विद्यालय हजारीबाग (उस वक्त बिहार अब झारखंड) में हुई।

इन्होंने हायरसेकंडरी की शिक्षा साइंस कॉलेज पटना ने पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए इन्होंने पटना मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया। वर्ष 2001 में इन्होंने पटना मेडिकल कॉलेज से डॉक्टरी की डिग्री हासिल किया। पढ़ाई के दौरान ही वर्ष 2000 में इनका विवाह हो गया। विवाह के बाद यह छत्तीसगढ़ आ गई। वर्ष 2007 में इन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, रायपुर से स्त्रीरोग विशेषज्ञ (गाईनी) की डिग्री हासिल किया। वर्ष 2007 में इनकी पहली पोस्टिंग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवरीखुर्द (बिलासपुर) में स्त्रीरोग विशेषज्ञ के पद पर हुई जहां इन्होंने वर्ष 2011 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2011 में इनका तबादला जिला अस्पताल, रायपुर में स्त्रीरोग विशेषज्ञ के पद पर हुआ जहां इन्होंने वर्ष 2013 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2013 में यह डेपुटेशन पर दिल्ली गई जहां छत्तीसगढ़ भवन में इन्होंने स्त्रीरोग विशेषज्ञ के पद पर वर्ष 2017 तक अपनी सेवाएं दी। डेपुटेशन से आने के बाद वर्ष 2017 में इन्हें दुर्ग जिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ की जिम्मेदारी सौंपी गई जिसे यह अभी तक जिम्मेदारी से निभा रही है।गार्डनिंग और लेखन में विशेष रुचि रखने वाली डॉ स्मिता सिन्हा भगवान को अपना आदर्श मानती है।इन्होंने बताया कि समाजसेवा करना मुझे विरासत में मिली है। इनके दादाजी और पिताजी समाजसेवा के क्षेत्र में बड़ा योगदान रहा है। इनके पैतृक गाँव में इनके दादाजी ने स्कूल खोलने के लिए जमीन दान किया ताकि गाँव के बच्चे पढ़ लिखकर शिक्षित हो और समाज, देश सेवा करे। आज उस जमीन पर कॉलेज बन गया है जिसका लाभ आसपास गांव के स्टूडेंट्स ले रहे है। समाजसेवा की प्रेरणा इन्हें घर से ही मिली है। डॉ स्मिता सिन्हा ने बताया कि गरीबो की मदद करना, जच्चा-बच्चा को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना, शिशु का सुरक्षित प्रसव करना, शिशु और मातृत्व मृत्युदर में कमी लाना, कम संसाधन में भी अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देना मेरी प्राथमिकता में शामिल है और मैं इन्ही उद्देश्यों के साथ काम करती हूं। महिलाओं को यही संदेश देना चाहती है कि किसी भी काम को करने के लिए आपका सही लक्ष्य होना चाहिए, दृढ़ इच्छाशक्ति रहे तो कोई भी मंजिल हासिल करना मुश्किल नही रहता। नई पीढ़ी अपने आप पर विश्वास रखे, कठिन परिस्थितियों में भी अपने आप को मजबूत रखते हुए अपने सफर को जारी रखना चाहिए। इनके पति सीनियर पुलिस अफसर है।

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