दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस): विवाह के पश्चात महिलाओं पर बहुत जिम्मेदारियां आ जाती है। पति, सास-ससुर, देवर-ननद के साथ ही साथ घर की पूरी जिम्मेदारी उठाना पड़ता है। संतान के जन्म के बाद तो उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। घर-परिवार, चौके-चूल्हे, साफ-सफाई करते कब समय बीत जाता है पता ही नहीं चलता। कई गृहणी घर-परिवार अपने अरमानों का भी गला घोंट देती हैं। उन्हें इतना समय भी नहीं मिल पाता है वे अपने लिए भी जीये। परिवार के प्रति उनका यह त्याग उन्हें सम्मान का अधिकारी बनाता है। नारी ही शक्ति है नर की, नारी ही शक्ति है घर की। बच्चों में संस्कार भरने का काम मां के रूप में नारी द्वारा ही किया जाता है। यह तो हम सभी बचपन से सुनते चले आ रहे हैं कि बच्चों की प्रथम गुरु मां ही होती है। यह सब बातें दुर्ग निवासी गृहणी पूजा श्रीवास्तव ने सारनाथ एक्सप्रेस से बातचीत में कही। यह कैसे अपने घर-परिवार को चला रही है, कैसे सबकी जिम्मेदारियों उठाने के साथ अपने लिए समय निकालती है। यह सब बाते हमसे साझा की।
प्रीति श्रीवास्तव की प्रारंभिक और हायरसेकंडरी तक की शिक्षा शासकीय तुलाराम विद्यालय दुर्ग में हुई। वर्ष 2003 में इन्होंने गर्ल्स कॉलेज दुर्ग से आर्ट्स में स्नातक किया। इसी वर्ष इनका विवाह हो गया। विवाह के पश्चात इन्होंने वर्ष 2005 में साइंस कॉलेज, दुर्ग से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर किया। वर्ष 2008 में इन्होंने सुराना कॉलेज, दुर्ग से एलएलबी किया। इसके बाद यह परिवार की जिम्मेदारियों में व्यस्त रही। वर्ष 2018 में इन्होंने मानसा कॉलेज, भिलाई से योग विज्ञान में डिप्लोमा किया। अभी यह सेठ बद्रीलाल खंडेलवाल शिक्षा महाविद्यालय से बीएड कर रही है।
कुकिंग, पढ़ाई और घर डेकोरेशन में विशेष रुचि रखने वाली प्रीति श्रीवास्तव अपनी पति यशवंत श्रीवास्तव को अपना आदर्श और प्रेरणास्रोत मानती है। इन्होंने बताया कि इनके पति पढ़ाई के प्रति हमेशा इनका सहयोग और मार्गदर्शन करते है।
इन्होंने बताया कि एक गृहणी होना भी समाज और देश सेवा से कम नही है क्योंकि जो शिक्षा हम अपने बच्चों और परिवार को देते है उसी से वह बड़े होकर आईएएस, आईपीएस, वकील, वैज्ञानिक आदि बनकर देश सेवा करते है। हमे परिवार को चलाने के लिए और उनकी जरूरतों को समय पर पूरा करने के लिए पहले से ही तैयारिया करनी पड़ती है ताकि किसी को देर न हो। पति, बच्चों का टिफिन बनाने, सास-ससुर की सेवा करने से लेकर देवर-ननद की भी देखभाल करना रोजाना का काम होता है। यह सब काम करने के बाद रात को समय मिलता है तो यह पढ़ाई करती है। इसके लिए परिवार के सभी सदस्यों का सहयोग मिलना भी बहुत जरूरी होता है। सब चीज़ों को बैलेंस करके चलना पड़ता है ताकि किसी को तकलीफ़ न हो सके।
महिलाओ से यही कहना चाहती है कि अगर आप बाहर निकलकर नौकरी करना चाहती है तो खुद पर विश्वास रखे, महिलाओ को कई जगह अच्छे तो कई जगह गलत लोगो से सामना करना पड़ता है ऐसे समय मे गलत का विरोध करे, उसे सहे नही। अपने और अपने बच्चों को शिक्षित करना चाहिए। अच्छी शिक्षा और टैलेंट को दबाकर नही रखना चाहिए उसका लाभ लेना चाहिए।
इनकी बेटी पूर्वा श्रीवास्तव गायन के क्षेत्र में बहुत से पुरस्कार जीत चुकी है। इनके पति पुलिस विभाग में है।









