दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस): ईश्वर ने स्त्री को अत्यंत स्नेह के प्रतीक के रूप में बनाया है जो न केवल अपने लिए सही जीवन का नेतृत्व करती हैं बल्कि दूसरों के लिए भी सशक्त रूप से मजबूत आधार बनती है। महिलाये न केवल कार्यालय का प्रबंधन करती हैं बल्कि यह भी सुनिश्चित करती हैं कि आपके घर की हर जरूरत पूरी हो। अगर पृथ्वी पर कोई औरत नहीं बची तो मानव जाति का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा क्योंकि स्त्री ही है जो इस धरती पर जीवन लाती है। वह बच्चों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है,महिला ही परिवार और समाज का केंद्रबिंदु है। यह सब बातें लायंस क्लब इंटरनेशनल पैटल्स की प्रेसीडेंट शीतल सरवैया ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया।
इनकी प्रारम्भिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर, काटाभाजी (ओडि़सा) में हुई। वर्ष 1998 में इन्होंने एमएलए वुमेन्स कॉलेज, काटाभाजी से कॉमर्स विषय में स्नातक की डिग्री हासिल किया। वर्ष 2000 में इनका विवाह हो गया और यह भिलाई आ गई। वर्ष 2006 यह लायंस क्लब से जुड़कर समाजसेवा में जुट गई। महिला मंडल, सेक्टर-4 भिलाई से भी जुड़ी है और अपना सहयोग प्रदान करती है। गुजराती समाज की सेकेट्री भी है। लायंस क्लब से जुडऩे के साथ ही इन्होंने अपने कार्य शुरू किया और उसी वर्ष आर्थिक रूप से कमजोर छ: कॉलेज स्टूडेंट का पढ़ाई का जिम्मा उठाया तथा उन्हें कम्प्यूटर कोर्स आदि करवाया। गरीब बच्चों को भोजन खिलाना, उनका फीस पे करना, आसपास के लोगों का सहयोग करना यह सब इनकी दिनचर्या में शामिल है। सामाजिक कार्यक्रमों में भी इनका हमेशा सहयोग रहता है। भिलाई के वैशालीनगर में जलाराम मंदिर निर्माण में इनका विशेष सहयोग रहा। कई सामाजिक संस्थाओं ने इनके नेक कार्यों के लिए इन्हें कई बार सम्मानित भी किया है। इन्होंने वर्ष 2018 में मुंबई में आयोजित मिसेज इंडिया (पनाज) में भाग लिया। छत्तीसगढ़ से रिप्रजेंट किया। मिसेज पोस्चर क्वीन का अवार्ड भी जीता।
समाजसेवा, गाना सुनने, नई जगह घूमने और खुद गाड़ी ड्राइव कर लांग ड्राइव जाने में विशेष रुचि रखने वाली शीतल सरवैया महिला दिवस में महिलाओं को यह संदेश देना चाहती हैं कि महिलाओं को किसी के भी ऊपर डिपेंट नहीं रहना चाहिए। पति और परिवार कितने भी अच्छे हों फिर भी घर पर नहीं बैठना चाहिए कुछ न कुछ काम अपने लिए करना चाहिए। महिलाएं पुरुषों से खुद को कम नहीं समझें। महिला ही परिवार और समाज का केन्द्रबिंदु है। यंग जनरेशन की लड़कियां नशे से दूर रहें, अपना मान-सम्मान बनाए रखें। सोच-समझकर कोई भी निर्णय लें। शादी-विवाह जीवन में एक बार होता है जिसमें हर किसी को जहां शौक रहता है महंगे कपड़़े पहनें और शादी के लिए तैयार हों लेकिन कई परिवार आर्थिक दबाव के कारण महंगे कपड़े नहीं पहन पाते उनके लिए मैंने श्री शिवाय वेडिंग हब (ब्यूटिक) खोला है जिसमें 10 से 15 हजार तक के महंगे कपड़ों को मैं 1100 से 2100 रुपए के नॉमिनल रेड पर लोगों को उपलब्ध करवाती हूं ताकि वह अपनी शौक को पूरा कर सकें। इनकी एक इच्छा है कि यह गरीब आदिवासी बच्चों को ट्रेन बुक कराकर एजुकेशनल टूर पर ले जाएं और उनका मनोबल बढ़ाएं।









