बिलासपुर (सारनाथ एक्सप्रेस): अपने सपनों को पूरा करने में उम्र कभी बाधक नहीं होती, जरुरत है तो बस सच्ची लगन और आत्मविश्वास की। पढ़ाई के दिनों से ही मेरा झुकाव वकालत की तरफ था। क्योंकि न्याय के लिए लोगों को मैंने दर-दर भटकते देखा था। इसलिए मैंने विवाह के 10 वर्ष के भीतर ही अपनी वकालत की पढ़ाई बिलासपुर विश्वविद्यालय से की। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में वकालत की शुरुआत की। मेरे इस सपने को पूरा होने में मेरे परिवार की बड़ी भूमिका रही। मानव सेवा का एक रुप मानकर मैंने इस व्यवसाय को अपनाया है क्योंकि सक्षम व्यक्ति तो किसी भी तरह न्याय प्राप्त कर लेता है परंतु जो कमजोर और गरीब है वे निर्दोष होते हुए भी न्याय से अछूते हैं। ऐसे ही निर्दोषों की मदद करना ही मेरा उद्देश्य है। यह सब बातें छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर की अधिवक्ता शीतल सोनी ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कहीं। इन्होंंने अपने अब तक के सफर को हमेशा साझा किया।उच्च न्यायालय की अधिवक्ता शीतल सोनी की प्रारंभिक शिक्षा कोरबा में हुई। वर्ष 2001 में इन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल किया। वर्ष 2003 में इन्होंने स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। स्नातक व स्नातकोत्तर की पढ़ाई के दौरान ही हानर्स डिप्लोमा इन वेब एप्लीकेशन की पढ़ाई एनआईआईटी न्यू दिल्ली से पूरी की। इसके बाद एक बड़ी कंपनी में सहायक प्रबंधक के रुप में 5 वर्ष कार्य किया। इसी दौरान वर्ष 2004 में इनका विवाह हो गया। वर्ष 2007-08 में इन्हें अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण छत्तीसगढ़ वापस आना पड़ा।अलग-अलग प्रकार की धार्मिक किताबें पढऩा और लोगों की मदद करने में विशेष रुचि रखने वाली अधिवक्ता शीतल सोनी अपने परिवार को अपना प्रेरणास्रोत मानती है। महिला दिवस पर इनका संदेश है कि महिलाओं के पास पुरुषों जितना सामान क्षमता हैं बशर्तें उन पर भरोसा किया जाए। आज की महिलाएं अपनी शक्तियों और क्षमताओं का अहसास कराती हैं और समाज तथा विश्व में फलस्वरुप योगदान करने के लिए घर से बाहर निकलती हैं। एक महिला होने के नाते महिलाओं के लिए एक खास दिन होना अच्छा लगता है जहां उन्हें सराहा और सम्मानित किया जा सके लेकिन इन्हें लगता है कि महिला का सम्मान सिर्फ महिला होने के कारण ही नहीं होना चाहिए बल्कि इसलिए भी क्योंंकि उनकी खुद अपनी व्यक्तिगत पहचान है वह समाज की भलाई में सामान रुप से योगदान करती हैं। यदि मैं थोड़ा पक्षपाती बनूं तो मैं कहूंगी कि अगर पृथ्वी पर कोई औरत नहीं बची तो मानव जाति का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा क्योंकि स्त्री ही है जो इस धरती पर जीवन लाती हैं। हर महिला विशेष है चाहे वह घर पर या कार्यालय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और अपने घर को भी कुशलतापूर्वक प्रबंधित करती हैं। अंतत: सभी से यही कहूंगी कि महिलाओं की इज्जत करें इसलिए नहीं कि वो महिला है बल्कि यह साबित करने के लिए कि आपकी परवरिश एक अच्छी मां ने की है। इन्होंने वकालत के व्यवसाय में स्त्रियों के स्थान को देखते हुए एक चैलेंज के रुप में स्वीकार किया आज इनके पास सभी प्रकार की क्रिमिनल, सर्विसेज और सिविल मामले हैं।









