भिलाई (सारनाथ एक्सप्रेस): मैं मध्यम वर्गीय परिवार से हूँ। फिर भी मेरे पिताजी ने कभी किसी चीज़ की कमी महसूस नहीं होने दिया। हम चार भाई बहन हैं । पिताजी कहते थे कि जिस दिन तुम सब चारो पढ़ लिखकर अपने पैरों पर खड़े हो जाओगे उस दिन मैं समझूँगा कि मेरा चार मंजिला मकान बन गया । मेरे पिता को मैंने वादा किया था कि मैं अपने नाम के आगे डॉक्टर लगाउंगी और उसके लिए मैंने मेहनत किया और सफलता हासिल किया। मेरी माताजी ने भी बहुत स्पोर्ट किया,उनके सपोर्ट से ही आज यहाँ तक पहुंची हूँ।यह बाते संस्कार सिटी कॉलेज ऑफ एजुकेशन राजनंदगांव की प्राचार्या डॉक्टर गुरप्रीत कौर छाबड़ा ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने अपने अब तक के सफर के बारे में विस्तृत चर्चा किया। डॉ गुरप्रीत कौर छाबड़ा की प्रारंभिक व हायरसेकंडरी तक की शिक्षा मुंगेली के शासकीय स्कूलों में हुई। वर्ष 1995 में इन्होंने एस एन जी कॉलेज मुंगेली (गुरुघासीदास विवि, बिलासपुर) से स्नातक की डिग्री ली। वर्ष 1997 में इन्होंने स्नातकोत्तर भी इसी कॉलेज से अर्थशास्त्र में किया। वर्ष 1997 में इनका विवाह हुआ और यह भिलाई आ गई। इनके पति भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत है। इन्होंने फाउंडेशन किंडर गार्डन स्कूल नेहरु नगर में अपनी सेवाएं दी। इनका चयन डीएव्ही स्कूल हुडको के लिए हुआ पर इन्होंने वहां ज्वाइन न कर बीएड करने का निर्णय लिया। वर्ष 2006 में इन्होंने बीएड किया तथा वर्ष 2007 में एमएड किया। वर्ष 2007 में इन्होंने अपोलो कॉलेज, दुर्ग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर ज्वाइन किया और वहां एक वर्ष तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2008 में इन्होंने सुराना कॉलेज, दुर्ग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर रहते हुए एक वर्ष तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2009 में इन्होंने अग्रसेन कॉलेज, धनोरा में विभागाध्यक्ष के पद पर ज्वॉइन किया और पांच वर्ष तक वहां अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2014 में इन्होंने छग वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय, भिलाई में प्रिंसीपल के पद पर जून 2017 तक अपनी सेवाएं दी और जुलाई 2017 से अभी तक संस्कार सिटी कॉलेज ऑफ एजुकेशन राजनंदगांव में प्रिंसीपल के पद पर अपनी सेवाएं दे रही है। यह यूनिवर्सिटी द्वारा अपॉइंटेड प्रिंसीपल है।इन्होंने वर्ष 2008 में एमफिल (शिक्षा), वर्ष 2009-11 में एमए (मनोविज्ञान), वर्ष 2017-18 में पीएचडी (मनोविज्ञान), वर्ष 2018-19 में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा गार्डेन्स एंड कॉउंसिल (पीजीसी) की डिग्री हासिल किया। वर्तमान में यह एमए (दर्शनशास्त्र) में अध्यनरत है। शिक्षा और मनोविज्ञान पर इनके कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमिनार चंडीगढ़, अलवर, गोवा में आयोजित हो चुके है। कई प्रतियोगिता में इन्हें मुख्यातिथि भी बनाया गया है साथ हेमचंद यादव दुर्ग विश्वविद्यालय की तरफ से इन्हें पीएचडी मनोविज्ञान की गाइड भी बनाया गया है। चंडीगढ़ में आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस 2018 में इन्हें चेयरपर्सन भी बनाया गया था। समाज गौरव विकास समिति रायपुर द्वारा इन्हें समाजिक समरसता सम्मान 2019 से नवाजा गया है। यह भिलाई की आस्था बहुउद्देश्यीय सामाजिक संस्था से भी जुड़कर समाजसेवा कर रही है। यह संस्था लावारिस शवो का अंतिम संस्कार करती है साथ ही वृद्धा आश्रम भी चलाती है। सामूहिक विवाह और रक्तदान का भी आयोजन किया जाता है। जिसमे यह अहम भूमिका निभाती है। आस्था बहुउद्देश्यीय संस्था को इन्होंने अपने शरीर को दान कर दिया है।पढऩे, गाना सुनने, खाना बनाने और कविता लिखने में विशेष रुचि रखने वाली डॉ गुरप्रीत कौर छाबड़ा अपने पिता को ही अपना आदर्श मानती है। महिला दिवस पर महिलाओ को इन्होने संदेश दिया है कि अपना विश्वास कभी मत हारिये, खुद पर भरोसा रखिये, शिक्षा को अपनी ताकत बनाइये क्योंकि एक लड़की अगर पढ़ती है तो वो एक समाज को गढ़ती है। जिंदगी में बहुत सी परेशानियां आती है फिर भी इसे इग्नोर कर लाइफ को जीना होता है। यह तभी संभव है जब हम खुद पर विश्वास करेंगे। अपना विश्वास डगमगाने न दे।









