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सरकार की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक ईमानदारी से समय पर पहुंचाना ही मेरी प्राथमिकता : पी.एस.एल्मा


मेरे माता-पिता अनपढ़ थे हम गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। मेरे माता-पिता ने हम तीनों भाईयों को पढ़ा-लिखा कर यहां तक पहुंचाने के लिए मजदूरी की, तेंदूपत्ता तोडऩे से लेकर हर काम किए आज उन्हीं की बदौलत मैं इस मुकाम पर पहुंचा हूं। इस मुकाम पर पहुंचने के लिए मेरे और मेरे परिवार के सदस्यों ने अहम भूमिका निभाई। यह सब बातें नारायणपुर के कलेक्टर पी.एस.एल्मा ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। उन्होंने अपने कलेक्टर बनने तक के सफर को हमसे साझा किया।
पी.एस.एल्मा मूलत : कोंडागांव के ग्राम पंचायत माकड़ी से हैं। इनकी प्रारंभिक शिक्षा माकड़ी शासकीय विद्यालय में हुई। इनकी हायर सेकेण्डरी की शिक्षा नारायणपुर से हुई जहां ये वर्तमान में कलेक्टर हैं। वर्ष 1990 में इन्होंने धर्मपुरा शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से आट्र्स में स्नातक किया। वर्ष 1992 में कामलदेव स्नातकोत्तर विद्यालय कांकेर से एमए में स्नातकोत्तर किया। वर्ष 1992 में इन्होंने उच्च श्रेणी शिक्षक की नौकरी ज्वाइन की। इनकी पोस्टिंग जग्गावरम (भेंजी, कोंटा) बस्तर में हुई। जहां इन्होंने एक वर्ष तक अपनी सेवाएं दी। इसी बीच इनकी नौकरी उद्यान विस्तार अधिकारी, सहायक संचालक ग्राम एवं नगर निवेश, राज्य परिवहन निगम, स्नेटोटाईपिस्ट सिहोर, (मध्यप्रदेश) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर लगी। टीचर की नौकरी ज्वाइन करने के बाद इन्होंने राज्य परिवहन निगम ज्वाइन किया लेकिन टीचरशिप में इनका इस्तीफा स्वीकृत नहीं हुआ जिनके कारण इन्हें फिर से शिक्षक की नौकरी ज्वाइन करना पड़ा। इन्होंने अंतागढ़ में सहायक विख्याता (ज्योग्राफी), सहायक प्राध्यापक पं. रवि शंकर विश्व विद्यालय में भी अपनी सेवाएं दीं। शिक्षक के पद पर जब इनका तबादला छोटेडोंगर हुआ तभी यह वर्ष 1996 में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग में डिप्टी कलेक्टर के लिए चयनित हुए।
जुलाई 1996 से दिसंबर 1996 तक ये प्रशासन अकादमी में रहें। इसके बाद इनकी पोस्टिंग उप जिलाधीश, बालाघाट जहां इन्होंंने दिसंबर 1996 से अप्रैल 1997 तक अपनी सेवाएं दीं। अप्रैल 1997 में इनका तबादला जनपद पंचायत सीईओ खैरलांजी में हुआ जहां इन्होंने जुलाई 1997 तक अपनी सेवाएं दीं। जुलाई 1997 में इनका तबादला सीईओ जनपद पंचायत बीरसा एवं प्रशासक साडा मलाजखंड में हुआ जहां इन्होंंने मई 1998 तक अपनी सेवाएं दीं। द्वितीय चरण प्रशिक्षण के बाद जून 1998 में इन्हें एसडीएम लांजी (बालाघाट) की जिम्मेदारी सौंपी गई। जहां इन्होंने अक्टूबर 2000 तक अपनी सेवाएं दीं। नवंबर 2000 में नवगठित राज्य छत्तीसगढ़ बनने के बाद इन्हें राजभवन में नियंत्रक के पद पर एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई। जिसका निर्वहन करते हुए इन्होंने और इनकी टीम ने सर्किट हाउस को राजभवन बनाने का कार्य किया। राजभवन के फाउंडर मेंमर थे। इस नेक कार्य के लिए तत्कालीन राज्यपाल दिनेश नंद सहाय, के एम सेठ व नरसिम्हन ने इन्हें तीन बेस्ट आफिसर का पुरस्कार देकर सम्मानित किए। राजभवन में इन्होंने 4 वर्ष तक अपनी सेवाएं दीं। अगस्त 2004 में इनका तबादला उप जिलाधीश कोरबा एवं एसडीएम कोरबा की जिम्मेदारी सौंपी गई जहां इन्होंने सितंबर 2006 तक अपनी सेवाएं दीं। सितंबर 2006 से यह बिलासपुर उप जिलाधीश, एसडीएम कोटा, एडीएम बिलासपुर के पद पर रहे। जुलाई 2009 में इनका तबादला सीईओ जिला पंचायत कोरिया के लिए हुआ जहां इन्होंंने 1 वर्ष तक अपनी सेवाएं दीं। जुलाई 2010 में इन्हें अपर कलेक्टर दुर्ग बनाया गया। जहां इन्होंने मार्च 2011 तक अपनी सेवाएं दीं। मार्च 2011 से अगस्त 2011 तक यह राजनांदगांव नगर निगम आयुक्त रहे। 8 जुलाई 2011 में इन्हें सीईओ जिला पंचायत दुर्ग की जिम्मेदारी सौंपी गई। जहां इन्होंंने एक वर्ष तक अपनी सेवाएं दीं साथ ही यह बालोद जिले के प्रभारी कलेक्टर भी रहे। अगस्त 2012 से अप्रैल 2013 तक इन्हें डिप्टी कमिश्नर (राजस्व) की जिम्मेदारी सौंपी गई। अप्रैल 2013 से अक्टूबर 2016 तक इन्हें सीईओ एवं अतिरिक्त कलेक्टर धमतरी की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई। अक्टूबर 2016 से अगस्त 2017 तक इन्होंने अतिरिक्त कलेक्टर दुर्ग के पद पर अपनी सेवाएं दीं। अगस्त 2017 से अप्रैल 2018 तक यह अतिरिक्त कलेक्टर रायपुर के पद पर अपनी सेवाएं दीं। अप्रैल 2018 में इन्होंने अपर आयुक्त श्रम/सचिव बीओसीडब्लू/संचालक आदिम जाति कल्याण/प्रबंध संचालक अंत्यावसायी के पद पर दिसंबर 2018 तक अपनी सेवाएं दीं। दिसंबर 2018 में सरकार ने इन्हें नारायणपुर कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी है जिसे वह जिम्मेदारी से अब तक निभा रहे हैं।
सीईओ जिला पंचायत धमतरी रहते हुए इन्होंने मनरेगा में बेहतर कार्य करने के लिए, स्वच्छ भारत मिशन में पहला ओडीएफ जिला घोषित करने के लिए, पीएम आवास योजना पूर्ण करने एवं क्वालिटी के लिए साथ ही जल क्रांति के लिए इन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। अभी हाल ही में इन्होंंने अबूझमाढ़ 2020 मैराथन का आयोजन किया गया था जो कि इनके कार्यकाल में ही शुरु हुआ और यह दूसरा मैराथन था जिसमें केन्या, नाइजीरिया सहित भारत के कई धावकों ने भाग लिया और इस मैराथन की प्र्रशंसा राष्ट्रीय स्तर पर हुई। अभी हाल ही में इन्हें पीएम अवार्ड का प्रजेंटेशन दिया है जो कि अंतिम चरण में है।
पुराने गाने सुनने और बैडमिंटन खेलने में विशेष रुचि रखने वाले कलेक्टर पी.एस.एल्मा ने बताया कि जिसमें अच्छाई देखे उसी को अपना आदर्श मान लिया। स्कूल में टीचिंग करते समय एक टीचर का डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हुआ तब यह निर्णय लिया कि डिप्टी कलेक्टर ही बनना है। 10 शासकीय नौकरी छोडऩे का कारण यही रहा कि डिप्टी कलेक्टर ही बनना है और जनता की सेवा करना है क्योंकि बाकी नौकरियों से प्रशासन का क्षेत्र बड़ा होता है। सरकार की जो योजनाएं हैं उसे अंतिम व्यक्ति तक ईनानदारी से समय पर पहुंचाना ही मेरी प्राथमिकता है और मैं इसके लिए तत्पर हूं और इसी भाव के साथ कार्य करते आ रहा हूं।

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