महासमुंद। संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महासमुंद, छत्तीसगढ़ में 23 फरवरी 2020 दिन रविवार को 51 जोड़ों का आदर्श सामूहिक सजातीय एवं अंतरजातीय दहेज मुक्त विवाह (रमैनी) का आयोजन किया गया।

इस विवाह से पहले परिचय सम्मेलन का आयोजन किया गया। माता पिता के आपसी सहमति से परिचय सम्मेलन में तय जोड़ों का कबीर वाणी के पाठ ( असुर निकंदन रमैनी ) में गुरु को साक्षी मानकर मात्र 16 मिनट 32 सेकंड में विवाह संपन्न हो जाता है। असुर निकंदन रमैनी के पाठ में वेद और शास्त्रों द्वारा प्रमाणित मंत्रोचार के माध्यम से सभी देवी देवताओं का आह्वान किया जाता है।
आजकल विवाह में जहां लोग लाखों रुपए तक खर्च कर रहे हैं उसकी तुलना में इस तरह के विवाह में ₹1 भी खर्च नहीं होता, विवाह में दहेज प्रथा के कारण लोग गरीबी का शिकार हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दहेज के लालच में कुछ लोग स्त्रियों को जिंदा जला देने से भी नहीं हिचक रहे हैं।
आम शादी में जहां बैंड बाजा, बरात, आतिशबाजी एवं पंडित की जरूरत पड़ती है उसकी तुलना में दहेज मुक्त विवाह सादगी के साथ संपन्न हो जाता है। इस तरह कबीर वाणी के पाठ से केवल 16 मिनट 32 सेकंड में विवाह संपन्न हो जाता है।
सेना और पुलिस के जवानों के लिए 201 यूनिट रक्तदान
संत रामपाल जी महाराज के प्रेरणा से सेना और पुलिस के जवानों के लिए 201 यूनिट रक्तदान किया गया है। छत्तीसगढ़ में विशेषकर सेना और पुलिस के जवान लोगों की सुरक्षा में दिन रात लगे रहते हैं, इसी प्रेरणा के भाव से संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों ने निश्चय किया की पूरे छत्तीसगढ़ में जब भी सेना और पुलिस के जवानों को खून की जरूरत पड़ेगी तो केवल एक फोन कॉल में तत्काल खून की व्यवस्था संत रामपाल जी महाराज के शिष्य पूरे छत्तीसगढ़ में जरूरतमंद को खून उपलब्ध कराएंगे।
1000 लोगों ने लिया देहदान का संकल्प
छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार महासमुंद में 1000 लोगों ने मृत्यु उपरांत देहदान करने का संकल्प लिया है। मृत्यु के बाद मानव शरीर को जला दिया जाता है अथवा दफना दिया जाता है। अब मानवता एवं जनहित के कल्याण के लिए संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों ने मृत्यु के बाद देहदान करने का संकल्प लिया है। संत रामपाल जी महाराज के प्रेरणा से विगत वर्षों में पूरे भारत में लाखों लोगों ने देहदान का संकल्प लिया।
जिंदगी के बाद भी आपके द्वारा किया गया देहदान लाखों लोगों को एक नया जीवनदान प्रदान करता है।
नशा मुक्त भारत अभियान
संत रामपाल जी महाराज का एक ही सपना,
नशा मुक्त हो भारत अपना
संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेकर आज पूरे भारत में लाखों लोगों ने पूर्ण रूप से सभी तरह की नशा को त्याग दिया है। संत जी से नाम दीक्षा( गुरु बनाने की विधि) का पहला शर्त यही है कि आप अपने संपूर्ण जीवन में किसी भी तरह की नशा का सेवन करना तो दूर उसे हाथ तक नहीं लगाना है। यह सब इसलिए संभव हो जाता है कि संत जी ने मनुष्य जीवन प्राप्त करने का मूल उद्देश्य मोक्ष प्राप्त करना बताया है। अर्थात इस जीवन में हम नशा के चक्कर में पड़कर अपना मानव जीवन व्यर्थ गवा देते हैं।
आज नशे के कारण लाखों परिवार बिखर गए हैं, करोड़ों लोग बीमार है, अनगिनत लोगों ने आत्महत्या कर ली है। इन सभी बुराइयों से छुटकारा प्राप्त करने का एक आसान उपाय यह है कि अब हम संत रामपाल जी के बताए हुए ज्ञान के आधार पर नशा से छुटकारा संभव है।
छत्तीसगढ़ में इस वर्ष 3300 लोगों ने संत रामपाल जी महाराज से दीक्षा लेकर नशे से छुटकारा प्राप्त किया है।
वेद और शास्त्रों पर आधारित प्रमाणित सत्संग
संत रामपाल जी महाराज वेद, शास्त्र, कुरान शरीफ, बाइबल, गुरु ग्रंथ साहेब, जैसे पवित्र सद ग्रंथों के आधार पर प्रमाणित ज्ञान बताते हैं।
संत रामपाल जी महाराज का संदेश है
जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा।
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई,धर्म नहीं कोई न्यारा।।
संसार को रचने वाला भगवान एक है। हमें जन्म देने वाला अल्लाह, भगवान, गॉड, रब, सब उसी के नाम है। परंतु कुछ अज्ञानी लोग स्वार्थ के कारण मानव -मानव मे दूरी पैदा करते हैं, आपस में लड़ाने का काम कर रहे हैं।
इस कार्यक्रम की जानकारी मीडिया प्रभारी राजेश शर्मा एवं शंभू साहू ने दी।
इस कार्यक्रम में राज्य संयोजक- पंकज दास, डॉक्टर दुष्यंत साहू समिति के मुख्य सदस्य-सनत जंघेल, बेनूधर साहू, कमलेश निर्मलकर उपस्थित रहे।










