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शासन और प्रशासन के प्रति लोगो मे जो नकारात्मक सोच है उसे तोड़ना ही मेरी प्राथमिकता: डॉ अतुल विश्वकर्मा

दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस)। दुर्ग जिले के नवपदस्थ क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) डॉ अतुल विश्वकर्मा से इस अंक में हमने खास बातचीत की जिसमे इन्होंने अपने अब तक के सफर की विस्तृत जानकारी कुछ इस तरह दी जो आपके समक्ष है…
डॉ अतुल विश्वकर्मा का जन्म भानुप्रतापपुर में हुआ था इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा महासमुंद जिला के पिथौरा के शासकीय प्राथमिक शाला में पूरी की। शुरू से ही पढ़ाई को लेकर गंभीर रहने वाले श्रीविश्वकर्मा का चयन ग्रामीण प्रतिभावान छात्रवृत्ति के लिए हुआ जो तीन वर्षों के लिए होता है उसमें हुआ। इन्होंने अपनी हाईस्कूल व हायरसेकंडरी की शिक्षा बसना शासकीय स्कूल से पूरी करने के बाद स्नातक के पढ़ाई के लिए रायपुर साइंस कॉलेज में एडमिशन लिया। वर्ष 1989 में इन्होंने बीएससी में स्नातक पूर्ण की तथा वर्ष 1991 में एमएससी (मैथ्स) से स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद देशबन्धु स्कूल और सेंट पैलोटी कॉलेज में तीन वर्षों तक अध्यापन कार्य किया। स्वयं की तैयारियों के बदौलत वर्ष 1997 के एमपीपीएससी में प्रथम प्रयास में ही नायाब तहसीलदार के लिए इनका चयन हुआ। इनकी पहली पोस्टिंग वर्ष 1999 में बतौर नायाब तहसीलदार कुरूद (धमतरी) में हुई जहां इन्होंने वर्ष 2006 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2006 में इनका स्थानांतरण नायाब तहसीलदार गुंडरदेही (तब दुर्ग जिला) के लिए हुआ जहां इन्होंने वर्ष 2007 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2008 में इनका प्रमोशन तहसीलदार के लिए हुआ । प्रमोशन के साथ ही इनका तबादला अतिरिक्त तहसीलदार दुर्ग के लिए हुआ जहां इन्होंने 2009 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2009 में इनका तबादला गुंडरदेही तहसीलदार के लिए हुआ जहां इन्होंने वर्ष 2013 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2013 में ही बालोद एक नया जिला बना। नए जिला बनने का इन्हें नए जिले को कैसे सेटअप करने और कार्य करने का अनुभव प्राप्त हुआ। वर्ष 2013 में इनका स्थानांतरण धमतरी तहसीलदार के लिए हुआ जहां इन्होंने एक वर्ष अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2014 में इनका तबादला सरायपाली तहसीलदार के लिए हुआ जहां इन्होंने दो वर्ष अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2016 में इन्हें प्रमोट कर तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर बनाया गया। वर्ष 2016 से मार्च 2019 तक इन्हें राजनंदगांव एसडीएम के पद पर अपनी सेवाएं दी। राजनंदगांव एसडीएम का कार्य बहुत ही चुनौतीपूर्ण था उस वक्त यह जिला मुख्यमंत्री का जिला हुआ करता था। यहा का कार्यकाल विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था जिसे सफलता पूर्वक इनके द्वारा पूरा किया। नौकरी के साथ साथ इन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और एमए (लोक प्रशासन) में किया साथ ही पीएचडी (जन समस्याओं के निवारण में प्रशासन की भूमिका का विश्लेषण ) भी पोलिटिकल साइंस में किये है। मार्च 2019 से अगस्त 2019 तक यह दुर्ग डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदस्थ रहे और अब सितम्बर 2019 से परिवहन विभाग में प्रतिनियुक्ति पर क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी है।

इनके पिता जी सहायक जिला शाला निरीक्षक रह चुके है जो महासमुंद और बस्तर में अपनी सेवाएं दे चुके है। इन्हें शासकीय जॉब में आने की प्रेरणा अपने पिता जी से मिली और यह अपने पिता जी को ही अपना आदर्श मानते है। इन्हें खेल-कूद, संगीत सुनने तथा समय मिलने पर परिवार के साथ समय बिताना पसंद है। इनके बड़े भाई भिलाई इस्पात संयंत्र के शिक्षा विभाग में स्कूल इंस्पेक्टर के पद पर तथा छोटे भाई सूर्या फैन्स में क्षेत्रीय प्रबंधक है। इनका एक पुत्र है तथा पत्नी रितु विश्वकर्मा एमएससी (केमिस्ट्री), एमएड है जो कि एक हाउस वाइफ है।

अपने काम के प्रति हमेशा तत्पर रहने वाले श्रीविश्वकर्मा का कहना है कि राजस्व विभाग में एसडीएम या तहसीलदार के रूप में लोगो की समस्याओं को निपटाना और शासन या प्रशासन के प्रति लोगो मे जो नकारात्मक सोच को तोड़ना ही मेरी प्राथमिकता होती है। इसके लिए लोगो को तत्काल सेवाये उपलब्ध कराना चाहिए। जब यह सरायपाली में पदस्थ थे तभी लोक सेवा केंद्र की शुरुआत हुई थी लोगो को विश्वास नही हो रहा था कि अब उनका काम ऑनलाइन हो जाएगा जिसे करके दिखाया गया। इन्हें अपने कार्य के दौरान कई अग्नि दुर्घटना, सड़क दुर्घटनाओ का सामना करना पड़ता है जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर निपटारा किया जाता है साथ ही कई बार प्राकृतिक आपदा का भी सामना करना पड़ा कुरूद में पदस्थापना के दौरान जहां तीन नदियों का संगम है वहा भीषण बाढ़ सामना करना पड़ा। इनके द्वारा किये गए पीएचडी विषय पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा वर्ष 2017 में डोंगरगढ़ में एक सेमिनार का आयोजन भी किया जा चुका है।

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