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आंवला नवमी आज: जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और मान्यता

पद्मपुराण के अनुसार आंवले का वृक्ष साक्षात विष्णु का ही स्वरूप माना गया है, कहते हैं आंवला नवमी के दिन इसकी पूजा करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं…

नईदिल्ली (ए)। पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी का व्रत रखते हैं और इस दिन आंवले की पूजा करते हैं. इसे आवंला नवमी, कूष्मांडा नवमी और धात्री नवमी के नाम से जाना जाता है. इस बार अक्षय नवमी का व्रत कल यानी 2 नवंबर 2022 दिन बुधवार को रखा जाएगा। जानिए अक्षय नवमी व्रत पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि समेत सारी बातें।

आंवला नवमी व्रत 2022 कब है? अक्षय नवमी 2022 का व्रत 2 नवंबर 2022, बुधवार को रखा जाएगा. इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है और पेड़ में सूत बांधकर उसकी परिक्रमा की जताई है. यह व्रत अक्षय तृतीया व्रत कि तरह होता है लेकिन इसमें आंवले के पेड़ की प्राथमिकता होती है. मान्यता है अक्षय नवमी व्रत से मनचाहा फल की प्राप्ति होती है।

अक्षय नवमी 2022 शुभ मुहूर्त: हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 01 नवंबर 2022 को रात 11 बजकर 04 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन अगले दिन यानी 02 नवंबर 2022 को रात 09 बजकर 09 मिनट पर होगा. उद्यातिथि के नियमानुसार अक्षय नवमी व्रत 02 नंवबर को रखा जाएगा.

अक्षय नवमी व्रत बुधवार, नवम्बर 2, 2022 को
अक्षय नवमी व्रत पूजा मुहूर्त : प्रातःकाल 06:34 AM से 12:04 PM
अक्षय नवमी व्रत पूजा अवधि : 05 घण्टे 31 मिनट
कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि प्रारम्भ : नवम्बर 01, 2022 को 11:04 PM बजे
कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि समाप्त : नवम्बर 02, 2022 को 09:09 PM बजे
अक्षय नवमी 2022 व्रत शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : 04:50 AM से 05:42 AM
गोधूलि मुहूर्त : 05:35 पी एम से 06:01 PM
अमृत काल : 03:49 PM से 05:21 PM
रवि योग : पूरे दिन
राहुकाल : अक्षय नवमी के दिन राहुकाल का समय 12:04 PM से 01:27 PM है . इस दौरान कोई शुभ कार्य या मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है.

अक्षय नवमी 2022 की पूजा विधि: आंवला नवमी के दिन प्रातः काल में स्नान करके पूजा करने का संकल्प लें. इसके बाद आंवले के वृक्ष के निकट पूर्व की ओर मुख करके शुभ मुहूर्त में जल अर्पित करें. वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें और धागा लपेटे. व्रत कथा पढ़ें या सुने. अब कपूर से आरती करें. वृक्ष के नीचे निर्धनों को भोजन कराएं और स्वयं भी भोजन करें।

अक्षय नवमी का महत्व: मान्यता है कि आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है. कहा जाता है कि इस दिन इनकी पूजा से मां लक्ष्मी अति प्रसन्न होती है और जीवन में खुशहाली आती है. अक्षय नवमी के दिन आंवले की पूजा करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।

आंवला नवमी महत्व: पद्मपुराण के अनुसार आंवले का वृक्ष साक्षात विष्णु का ही स्वरूप माना गया है। कहते हैं आंवला नवमी के दिन इसकी पूजा करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आंवला वृक्ष के मूल में भगवान विष्णु, ऊपर ब्रह्मा, स्कंद में रुद्र, शाखाओं में मुनिगण, पत्तों में वसु, फूलों में मरुद्गण और फलों में प्रजापति का वास होता है. इसकी उपासना करने वाले व्यक्ति को धन, विवाह, संतान, दांपत्य जीवन से संबंधित समस्या खत्म हो जाती है.
आंवले की पूजा करने से गौ दान करने के समान पुण्य मिलता है. सुख-समृद्धि और देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए अक्षय नवमी का दिन बहुत उत्तम फलदायी माना गया है।

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