जितिया व्रत की तारीख को लेकर किसी भी तरह का कंफ्यूजन है, तो यहां दूर कर लें. कुछ पंचाग के अनुसार जहां जितिया का व्रत 17 सितंबर को रखे जाने की बात की जा रही है, तो वहीं कुछ लोग उदया तिथि को मनते हुए 18 सितंबर को जीवित्पुत्रिका व्रत रखने की बात कर रहे हैं. जानें इस मतभेद की वजह और दूर कर लें सारे कंफ्यूजन. जितिया व्रत 2022 की सही तारीख, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, जितिया व्रत कथा समेत पारण का सही समय और तरीका जान लें।
जीवित्पुत्रिका व्रत पूजन विधि
जितिया व्रत के पहले दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
उसके बाद पूजा करें।
इसके बाद महिलाएं भोजन ग्रहण करती हैं और उसके बाद पूरे दिन तक वो कुछ भी नहीं खाती।
दूसरे दिन सुबह स्नान के बाद महिलाएं पहले पूजा पाठ करती हैं और फिर पूरा दिन निर्जला व्रत रखती हैं।
इस व्रत का पारण छठ व्रत की तरह तीसरे दिन किया जाता है।
पारण से पहले महिलाएं सूर्य को अर्घ्य देती हैं, जिसके बाद ही वह कुछ खाना खा सकती हैं।
इस व्रत/त्यौहार के तीसरे दिन झोर भात, मरुआ की रोटी और नोनी का साग खाया जाता है।
जीवित्पुत्रिका व्रत महत्व
जीवित्पुत्रिका व्रत का संबंध महाभारत काल से है. मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान को लंबी उम्र का वरदान प्राप्त होता है. कहते हैं कि जो महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत करती हैं और कथा पढ़ती है उनकी संतान को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता. संतान की रक्षा और उसकी उन्नति के लिए ये बहुत लाभकारी माना जाता है. ये व्रत छठ की तीन दिन तक किया जाता है.पहले दिन महिलाएं नहाय खाय करती हैं. दूसरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है और तीसरे दिन व्रत का पारण करते हैं।
जीवित्पुत्रिका व्रत पूजा सामग्री
इस व्रत में भगवान जीमूत वाहन, गाय के गोबर से चील-सियारिन की पूजा का विधान है. जीवित्पुत्रिका व्रत में खड़े अक्षत(चावल), पेड़ा, दूर्वा की माला, पान, लौंग, इलायची, पूजा की सुपारी, श्रृंगार का सामान, सिंदूर, पुष्प, गांठ का धागा, कुशा से बनी जीमूत वाहन की मूर्ति, धूप, दीप, मिठाई, फल, बांस के पत्ते, सरसों का तेल, खली, गाय का गोबर पूजा में जरूरी है।
जितिया व्रत महत्व
जितिया व्रत संतान की लंबी आयु, निरोगी जीवन और खुशहाली के लिए रखा जाता है. यह व्रत नहाए खाए के साथ शुरू होता है. दूसरे दिन निर्जला व्रत और तीसरे दिन व्रत का पारण किया जाता है।
जीवित्पुत्रिका व्रत तिथि, पारण का समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, 17 सितंबर को दोपहर 2 बजकर 14 मिनट पर अष्टमी तिथि प्रारंभ हो रही है और 18 सितंबर को दोपहर 04 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि के अनुसार, जीवित्पुत्रिका व्रत 18 सितंबर को रखा जाएगा. 19 सितंबर की सुबह 06 बजकर 10 मिनट के बाद व्रत पारण कर सकते हैं।
जितिया व्रत की शुरुआत नहाय खाए से होती है।
इस साल 17 सितंबर 2022 शनिवार को नहाए खाए होगा।
18 सितंबर 2022 रविवार को निर्जला व्रत रखा जाएगा।
19 सितंबर को सूर्य उदय के बाद व्रत का पारण किया जाएगा।
जितिया व्रत पूजा विधि
- सुबह स्नान करने के बाद व्रती प्रदोष काल में गाय के गोबर से पूजा स्थल को लीपकर साफ कर लें.
- इसके बाद वहां एक छोटा सा तालाब बना लें. फिर तालाब के पास एक पाकड़ की डाल लाकर खड़ाकर कर दें.
- अब शालिवाहन राजा के पुत्र धर्मात्मा जीमूतवाहन की कुशनिर्मित मूर्ति जल के पात्र में स्थापित करें.
- इसके बाद उन्हें दीप, धूप, अक्षत, रोली और लाल और पीली रूई से सजाएं.
- अब उन्हें भोग लगाएं.
- अब मिट्टी या गोबर से मादा चील और मादा सियार की प्रतिमा बनाएं.
- दोनों को लाल सिंदूर अर्पित करें.
- अब पुत्र की प्रगति और कुशलता की कामना करें.
- इसके बाद व्रत कथा सुनें और पढ़ें।
जितिया व्रत पारण करने का समय
जितिया व्रत का पारण 19 सितंबर 2022 को सुबह 06 बजकर 10 मिनट के बाद किया जा सकेगा।
कैसे करते हैं जितिया व्रत
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद भगवान जीमूतवाहन की पूजा करें. इसके लिए कुशा से बनी जीमूतवाहन की प्रतिमा को धूप-दीप, चावल, पुष्प आदि अर्पित करें. इस व्रत में मिट्टी और गाय के गोबर से चील व सियारिन की मूर्ति बनाई जाती है. इनके माथे पर लाल सिंदूर का टीका लगाया जाता है. पूजा समाप्त होने के बाद जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनी जाती है. पारण के बाद यथाशक्ति दान और दक्षिणा दें।
काशी पंचांग से व्रत रखने वाली महिलाओं के उपवास की अवधि
काशी पंचांग के तहत व्रत करने वाली महिलाओं के लिए राहत की बात यह होगी कि उन्हें महज 25 घंटा 43 मिनट का ही व्रत रखना होगा।
मिथिला की महिलाओं का उपवास 34 घंटा 53 मिनट लंबा
मिथिला की महिलाएं 16 सितंबर को दिन में माछ मड़ुआ खाएंगी. 17 सितंबर के दिन शनिवार की सुबह पांच बजे ओठगन के साथ निर्जला जितिया व्रत शुरू होगी जो 18 सितंबर को दोपहर बाद साढ़े चार बजे संपन्न होगी. इस प्रकार इस साल मिथिला की महिलाओं के लिए यह व्रत लगभग 34 घंटा 53 मिनट लंबा होगा।
मिथिला में जितिया व्रत
जितिया नहाय खाय- 16 सितंबर, शुक्रवार
जितिया व्रत जिवितपुत्रिका महाअष्टमी व्रत- 17 सितंबर, शनिवार
18 सितंबर की शाम को 4 बजकर 39 मिनट के बाद पारण
इस व्रत में उनको सप्तमी युक्त अष्टमी तिथि मिलेगी. जो महिलाएं महालक्ष्मी की व्रत करती है, उनके लिए चंद्रोदय काल में अष्टमी तिथि मिल रही मिल रही है।
साभार: प्रभात खबर
















