भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का त्योहार पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. आइये जानें जन्माष्टमी की कंफर्म तारीख, पूजा मुहूर्त…
नईदिल्ली (ए)। आज देश भर में बड़े ही धूमधाम से जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। आज के दिन रात के 12:00 बजे श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इस दिन डंठल और हल्की सी पत्तियों वाले खीरे को कान्हा की पूजा में उपयोग करें. रात के 12 बजते ही खीरे के डंठल को किसी सिक्के से काटकर कान्हा का जन्म कराएं. इसके बाद शंक बजाकर बाल गोपाल के आने की खुशियां मनाएं और फिर विधिवत बांके बिहारी की पूजा करें।
जन्म के समय जिस तरह बच्चे को गर्भनाल काटकर गर्भाशय से अलग किया जाता है, ठीक उसी प्रकार जन्मोत्सव के समय खीरे की डंठल को काटकर कान्हा का जन्म कराने की परंपरा है. जन्माष्टमी पर खीरा की डंठल काटने का मतलब है बाल गोपाल को मां देवकी के गर्भ से अलग करना. खीरे से डंठल को काटने की प्रक्रिया को नाल छेदन कहा जाता है।
श्रीकृष्ण इन 16 कलाओं में थे माहिर
- श्रीधन संपदा- प्रथम कला के रूप में धन संपदा है.
- भू-अचल संपत्ति- भू- अचल संपत्ति को स्थान दिया गया है.
- कीर्ति-यश प्रसिद्धि- तीसरी कला के रूप में कीर्ति-यश प्रसिद्धि.
- इला-वाणी की सम्मोहकता- चौथी कला इला-वाणी की सम्मोहकता है.
- लीला- आनंद उत्सव पांचवीं कला का नाम है लीला, यह आनंद भी है.
- कांति- सौदर्य और आभा: जो मुखमंडल बार-बार निहारने का मन करता है. वह छठी कला से संपन्न माना जाता है.
- विद्या- मेधा बुद्धि: सातवीं कला का नाम विद्या है. इससे परिपूर्ण व्यक्ति सफलता में आगे रहता है.
- विमला- पारदर्शिता: जिसके मन में छल-कपट नहीं हो, वह आठवीं कला युक्त माना जाता है.
- नौवीं कला- के रूप में प्रेरणा को स्थान दिया गया है.
- ज्ञान- नीर क्षीर विवेक: श्रीकृष्ण ने कई बार विवेक का परिचय देकर समाज को नई दिशा दी.
- क्रिया- कर्मण्यता- ग्यारहवीं कला के रूप में क्रिया रखी गई है.
- योग- चित्तलय: बारहवीं कला के रूप में योग को रखा गया है.
- प्रहवि- अत्यंतिक विनय: तेरहवीं कला का नाम प्रहवि है.
- सत्य- यर्थार्थ: श्री कृष्णजी की चौदहवीं कला सत्य है.
- इसना- आधिपत्य: नंदलाल की पंद्रहवीं कला का नाम इसना है.
- अनुग्रह- सोलवीं कला के रूप मे श्रीकृष्णजी को अनुग्रह मिला है।
श्रीकृष्ण की जन्म कुंडली में था ये खास योग माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भादो कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि को हुआ था, उस समय रात्रि के 12 बज रहे थे. भगवान श्रीकृष्ण की कुंडली वृषभ लग्न की है, लग्न में उच्च का चंद्रमा था. ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को 16 कलाओं का स्वामी माना गया है. चंद्रमा की उच्च स्थिति के कारण ही भगवान श्रीकृष्ण 16 कलाओं के माहिर थे।
जन्माष्टमी 19 अगस्त 2022 शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त – 04.32 AM – 05.16 AM
अभिजित मुहूर्त – 12.04 PM – 12.56 PM
गोधूलि मुहूर्त – 06.47 PM – 07.11 PM
जन्माष्टमी के 4 अचूक उपाय
- जन्माष्टमी पर रात में 12 बजे शंख में दूध, दही, घी, शहद, डालकर कान्हा का अभिषेक करने से मनचाहा फल प्राप्त होता है।
- जन्माष्टमी पर जरुरतमंदों को अनाज और फल दान करना शुभ माना जाता है. इससे वास्तु दोष दूर होते हैं.
- कान्हा के जन्म पर उन्हें मोरपंख जरूर अर्पित करें। कहते हैं कि मोरपंख राधा-कृष्ण के प्रेम का प्रतीक है. घर में गोपाला की पूजा में मोरपंख का प्रयोग करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है. रिश्तों में मिठास बनी रहती है।
- इस दिन गिरधर गोपाल के साथ गाय-बछड़े की प्रतिमा की भी पूजा करें. मान्यता है इससे संतान सुख प्राप्त होता है. गाय और कान्हा का गहरा संबंध है. श्रीकृष्ण की भक्ति तभी सफल होती है जब गौ माता की सेवा की जाए।
जन्माष्टमी पर मोरपंख से ऐसे दूर करें वास्तु दोष वास्तु में मोर पंख को सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है. वास्तु के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी के दिन घर में मोर पंख लाने से ना सिर्फ सकारात्मक ऊर्जा आती है, बल्कि घर से वास्तु दोष भी खत्म होता है. घर में मोर पंख रखना बहुत शुभ माना जाता है. वास्तु के मुताबिक घर के मुख्य द्वार पर मोर पंख लगाने से उस घर को बुरी नजर नहीं लगती है. इसके प्रभाव से परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।
दही हांडी पर्व और कान्हा का क्या है संबंध ?
- दही हांडी पर्व को मनाने का उद्देश्य कान्हा की बाल लीलाओं को दर्शाना है. बाल गोपाल को माखन और दही बहुत प्रिय था.
- नटखटा कान्हा अक्सर अपने सखाओं के साथ गोपियों के घर से माखन चुराया करते थे. लड्डू गोपाल की शरारत से तंग आकर गोपियां माखन, दही और घी को रस्सी से ऊंचाई पर टांग दिया करती थी लेकिन कान्हा की चतुराई के आगे सबकी योजना फेल हो जाती थी.
- कृष्ण जी अपनी टोली संग पिरामिड बनाकर माखन चुरा लिया करते थे. तभी से दही हांडी की परंपरा निभाई जाती है. मान्यता है कि दही हांडी का उत्सव मनाने से घर में सुख-समृद्धि आती है. साथ ही कृष्ण की विशेष कृपा से आसपास का वातावरण भी खुशहाल हो जाता है।
श्रीकृष्ण का श्रृंगार इन 5 चीजों के बिना है अधूरा
- पीले वस्त्र – जन्माष्टमी पर कान्हा के आगमन पर उनका अभिषेक कर पीले वस्त्र पहनाएं. रंग बिरंगे वस्त्रों से कान्हा प्रसन्न होते हैं. पीतांबर कृष्ण को बेहद प्रिय है.
- वैजयंती माला – जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल के श्रृंगार में कान के कुंडल बाजूबंध, कमरबंध, हाथ के कड़े, पायल के साथ वैजयंती माला उन्हें जरूर पहनाएं.
- मोरपंख – मोरपंख के बिन कृष्ण की कल्पना नहीं की सकती. मान्यता है कि मोरपंख राधा-कृष्ण के प्रेम का प्रतीक है इसलिए कान्हा हमेशा इसे अपने सिर पर सजाते हैं.
- चंदन – सुगंधित चंदन की खुशबू बाल गोपाल को बहुत पसंद है. चंदन विभिन्न प्रकार के होते हैं. सफेद चंदन, हरि चंदन, गोमती चंदन आदि. कान्हा का गोपी चंदन से श्रृंगार उत्तम माना जाता है.
- बांसुरी – बांसुरी के बिना कान्हा अधूरे माने जाते हैं.मान्यता है कि मुरली में कृष्ण का वास होता है. जन्माष्टमी पर चांदी या कोई भी छोटी सी बांसुरी कान्हा के हाथ में जरूर रखें।
बाल गोपाल की पूजा के कुछ नियम
स्नान- घर में बाल गोपाल की मूर्ति है तो प्रतिदिन इन्हें स्नान करना चाहिए. शंख में स्वच्छ जल भरकर कान्हा का स्नान करना उत्तम होता है. अब कृष्ण जी के स्नान के पानी को तुलसी के गमले में डाल दें.
नए वस्त्र – स्नान के बाद कान्हा को साफ वस्त्र पहनाएं. ध्यान रखें कि श्रीकृष्ण को एक बार जो कपड़े पहना चुके हैं उन्हें दोबारा बिना धोए उपयोग में न लें. चंदन, आभूषण, से उनका श्रृंगार करें. श्रृंगार के बिना श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है.
भोग – धर्म ग्रंथों के अनुसार कान्हा को दिन में चार बार भोग लगाना चाहिए. माखन, दही, मिश्री, खीर का भोग लगा सकते हैं.
अकेला न छोड़ें – एक बार घर में कान्हा को स्थिपित करने के बाद उन्हें कभी अकेला न छोड़े. लंबे समय के लिए कहीं बाहर जा रहे हों तो श्रीकृष्ण को भी साथ ले जाएं. प्राण प्रतिष्ठा के बाद कान्हा की रोजाना पूजा करना बहुत जरूरी है।
कृष्ण जन्माष्टमी पर भूलकर भी न करें ये काम
- कृष्ण जन्माष्टमी पर किसी का भी अपमान न करें और न ही मन में किसी तरह का बुरा विचार लाएं. किसी को भला-बुरा न कहें.
- जन्माष्टमी के दिन काले रंग के कपड़े न पहनें.
- व्रती को रात 12 बजे तक व्रत का पालन करते हुए अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए.
- जन्माष्टमी पर गायों की पूजा और सेवा जरूर करनी चाहिए।
जन्माष्टमी के 5 लाभकारी मंत्र
- कृं कष्णाय नम:
- ऊं श्रीं नमः श्रीकृष्णाय परिपूर्णतमाय स्वाहा
- गोकुल नाथाय नम:
- ऊं क्लीम कृष्णाय नमः
- ॐ देविकानन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात
- ऊं कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।। प्रणत: क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नम:।।
















