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लाल किले के प्राचीर से पीएम मोदी ने किया भ्रष्टाचार और परिवारवाद के खिलाफ ऐलान-ए-जंग: देशवासियों से मांगा समर्थन, जानिए ये 11 महत्वपूर्ण बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत जैसे लोकतंत्र में जहां लोग गरीबी से जूझ रहे हैं, तब यह दृश्य देखने को मिलते हैं कि एक तरफ वह लोग हैं, जिनके पास रहने के लिए जगह नहीं है, दूसरी तरफ वह लोग हैं, जिनके पास अपना चोरी किया हुआ माल रखने के लिए जगह नहीं है…

 

नई दिल्ली (ए)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को 76वें स्वतंत्रता दिवस पर भ्रष्टाचार और परिवारवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई छेड़ने का आह्वान किया और इसे अपनी संवैधानिक और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी बताते हुए इस जंग में देशवासियों का साथ मांगा. लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इन दोनों विकृतियों का अगर समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो यह विकराल रूप ले सकती हैं. उन्होंने कहा कि देश के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं. पहली चुनौती है भ्रष्टाचार और दूसरी चुनौती है भाई-भतीजावाद, परिवारवाद।

गरीबी से जूझ रहे भारत में भ्रष्टाचार की जगह नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत जैसे लोकतंत्र में जहां लोग गरीबी से जूझ रहे हैं, तब यह दृश्य देखने को मिलते हैं कि एक तरफ वह लोग हैं, जिनके पास रहने के लिए जगह नहीं है. दूसरी तरफ वह लोग हैं, जिनके पास अपना चोरी किया हुआ माल रखने के लिए जगह नहीं है. यह स्थिति अच्छी नहीं है. इसलिए हमें भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ना है।

डीबीटी के 20 लाख करोड़ रुपये की बचत

पीएम मोदी ने आगे कहा कि पिछले आठ वर्षों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के द्वारा आधार और मोबाइल सहित अन्य आधुनिक व्यवस्थाओं का उपयोग करते हुए 20 लाख करोड रुपयों को गलत हाथों में जाने से बचाया गया और उसे देश की भलाई के काम में लगाने में सरकार सफल हुई. उन्होंने कहा कि जो लोग पिछली सरकारों में बैंकों को लूट-लूट करके भाग गए, उनकी संपत्तियां जब्त करके वापस लाने की कोशिश जारी है।

जिन्होंने देश को लूटा, उन्हें लौटना होगा

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि कई लोगों को जेलों में जीने के लिए मजबूर करके रखा हुआ है. हमारी कोशिश है कि जिन्होंने देश को लूटा है, उनको लौटना पड़े. वह स्थिति हम पैदा करेंगे. उन्होंने कहा कि वे अब बच नहीं पाएंगे. इस मिजाज के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ एक निर्णायक कालखंड में हिंदुस्तान कदम रख रहा है. प्रधानमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार दीमक की तरह देश को खोखला कर रहा है और उन्हें इसके खिलाफ लड़ाई तेज करनी है व इसे निर्णायक मोड़ पर लेकर ही जाना है।

भ्रष्टाचारियों के प्रति उदारता उचित नहीं

पीएम मोदी ने कहा कि मेरे 130 करोड़ देशवासी आप मुझे आशीर्वाद दीजिए, आप मेरा साथ दीजिए, मैं आज आपसे साथ मांगने आया हूं, आपका सहयोग मांगने आया हूं, ताकि मैं इस लड़ाई को लड़ सकूं और इस लड़ाई को देश जीत पाए. उन्होंने कहा कि आज देश में भ्रष्टाचार के प्रति नफरत दिखती है और वह व्यक्त भी होती है लेकिन कभी-कभी भ्रष्टाचारियों के प्रति उदारता भी दिखाई जाती है जो किसी भी देश को शोभा नहीं देता है।

भ्रष्टाचारियों के प्रति जागरूक होने की जरूरत

उन्होंने कहा कि कई लोग तो इतनी हद तक चले जाते हैं कि अदालत में सजा हो चुकी हो… भ्रष्टाचार सिद्ध हो चुका हो… जेल जाना तय हो चुका हो… जेल गुजार रहे हो… इसके बावजूद भी उनका महिमामंडन करने में लगे रहते हैं, उनकी शान शौकत में लगे रहते हैं, उनकी प्रतिष्ठा बनाने में लगे रहते हैं. उन्होंने कहा कि जब तक समाज में गंदगी के प्रति नफरत नहीं होती है, स्वच्छता के प्रति चेतना भी नहीं जगती है. उन्होंने कहा कि इसी प्रकार जब तक भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के प्रति नफरत का भाव पैदा नहीं होता, तब तक यह मानसिकता खत्म नहीं होने वाली है. इसलिए भ्रष्टाचार के प्रति भी और भ्रष्टाचारियों के प्रति भी हमें बहुत जागरूक होने की जरूरत है।

भाई-भतीजावाद और परिवारवाद पर पीएम ने बोला हल्ला

भाई भतीजावाद और परिवारवाद के खिलाफ हल्ला बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुर्भाग्य से राजनीति क्षेत्र की इस बुराई ने हिंदुस्तान की हर संस्था में परिवारवाद कुपोषित कर दिया है. उन्होंने कहा कि परिवारवाद हमारी अनेक संस्थाओं को अपने में लपेटे हुए है और उसके कारण मेरे देश की प्रतिभा को नुकसान होता है. देश के सामर्थ्य को नुकसान होता है… भ्रष्टाचार का एक कारण परिवारवाद भी बन जाता है. उन्होंने कहा कि जब तक इसके खिलाफ नफरत पैदा नहीं होगी तब इन संस्थाओं को नहीं बचा पाएंगे।

परिवारवाद से मुक्ति के लिए देश का शुद्धिकरण जरूरी

पीएम मोदी ने कहा कि संस्थाओं के उज्जवल भविष्य के लिए यह बहुत आवश्यक है. उसी प्रकार से राजनीति में भी परिवारवाद ने देश के सामर्थ्य के साथ सबसे ज्यादा अन्याय किया है. उन्होंने कहा कि राजनीति में परिवारवाद परिवार की भलाई के लिए होता है और उसे देश की भलाई से कोई लेना देना नहीं होता. उन्होंने आह्वान किया कि हिंदुस्तान की राजनीति के शुद्धिकरण के लिए भी और सभी संस्थाओं के शुद्धिकरण के लिए भी… इस परिवारवादी मानसिकता से मुक्ति दिलानी होगी. योग्यता के आधार पर देश को आगे ले जाने की ओर हमें बढ़ना होगा. यह अनिवार्यता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले के प्राचीर से कई अहम घोषणाएं की. उन्होंने पांच प्राण के बारे में बताने के साथ पांच प्रण भी लिये और ‘जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान’ के बाद ‘जय अनुसंधान’ का नारा भी दिया. इसके साथ ही, लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दर्द भी छलका. वे भावुक भी हुए और भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम उठाने के लिए देशवासियों का सहयोग भी मांगा।

1. मदर ऑफ डेमोक्रेसी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के 75 साल पूरे होने के मौके पर आजादी के आंदोलन और स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, वीर सावरकर और कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों एवं महापुरुषों को याद किया तथा उन्हें नमन किया. उन्होंने कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है और विविधता इसकी ताकत है. मदर ऑफ डेमोक्रेसी है. जिनके ज़हन में लोकतंत्र होता है, वे जब संकल्प करके चल पड़ते हैं, वो सामर्थ्य दुनिया की बड़ी बड़ी सल्तनतों के लिए भी संकट का काल लेकर आती है. ये है मदर ऑफ डेमोक्रेसी।

2. गौरवगान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे भारत ने सिद्ध कर दिया कि हमारे पास ये अनमोल सामर्थ्य है. 75 साल की यात्रा में आशाएं, अपेक्षाएं, उतार-चढ़ाव सब के बीच हर एक के प्रयास से हम यहां तक पहुंच पाए. आज़ादी के बाद जन्मा मैं पहला व्यक्ति था, जिसे लाल किले से देशवासियों का गौरव गान करने का अवसर मिला. ये देश का सौभाग्य रहा है कि आज़ादी की जंग के कई रूप रहे हैं. उसमें एक रूप वो भी था जिसमें नारायण गुरु हो, स्वामी विवेकानंद हों, महर्षि अरविंदो हों, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर हों, ऐसे अनेक महापुरूष हिंदुस्तान के हर कोने में भारत की चेतना को जगाते रहे।

3. भारत का साझा सूत्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि इस मिट्टी में ताकत है, कई चुनौतियों के बावजूद भारत रुका नहीं, झुका नहीं और आगे बढ़ता रहा. मैंने अपना पूरा कार्यकाल समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया है. हमारे देश ने यह साबित किया है कि हमने अपनी विविधता से मिल रही ताकत को अंतर्निहित किया है, देशभक्ति का साझा सूत्र भारत को अडिग बनाता है. भारत की भावना की मेरी समझ ने मुझे यह अहसास कराया कि नए भारत की तरक्की के लिए हमें समावेशी विकास सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

4. पांच प्राण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच प्राणशक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि अब देश बड़े संकल्प लेकर चलेगा, और वो बड़ा संकल्प है विकसित भारत और उससे कुछ कम नहीं होना चाहिए. दूसरा प्राण है किसी भी कोने में हमारे मन के भीतर अगर गुलामी का एक भी अंश हो उसे किसी भी हालत में बचने नहीं देना. तीसरी प्राण शक्ति- हमें अपनी विरासत पर गर्व होना चाहिए… चौथा प्राण है- एकता और एकजुटता और पांचवां प्राण है- नागरिकों का कर्तव्य. इसमें प्रधानमंत्री भी बाहर नहीं होता है, राष्ट्रपति भी बाहर नहीं है. आने वाले 25 साल के लिए हमें उन पंच प्राण पर अपनी शक्ति को केंद्रित करना होगा. 2047 जब आज़ादी के 100 साल होंगे, आज़ादी के दिवानों के सारे सपने पूरे करने का जिम्मा उठाकर चलना होगा।

5. पांच प्रण

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पांच प्रण लिये हैं. इसमें विकसित भारत, गुलामी के हर अंश से मुक्ति का प्रण, विरासत पर गर्व, एकता और एकजुटता का प्रण और नागरिकों को अपने कर्तव्यपालन का प्रण शामिल है. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अब देश बड़े संकल्प लेकर चलेगा, और वो बड़ा संकल्प है विकसित भारत और उससे कुछ कम नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि दूसरा प्रण है किसी भी कोने में हमारे मन के भीतर अगर गुलामी का एक भी अंश हो उसे किसी भी हालत में बचने नहीं देना. तीसरी प्रण शक्ति है कि हमें हमारी विरासत पर गर्व होना चाहिए. यही विरासत है, जिसने भारत को स्वर्णिम काल दिया था. यह विरासत है जो समय समय पर परिवर्तन करने का सामर्थ्य रखती है. चौथा प्रण है एकता और एकजुटता. 130 करोड़ देशवासियों में एकजुटता. न कोई अपना न कोई पराया. एक भारत औऱ श्रेष्ठ भारत के लिए यह प्रण है.प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पांचवां प्रण है नागरिकों का कर्तव्य।

6. महात्मा गांधी का सपना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि भारत की भावना की मेरी समझ ने मुझे यह अहसास कराया कि नए भारत की तरक्की के लिए हमें समावेशी विकास सुनिश्चित करने की आवश्यकता है. मैंने कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति को सशक्त बनाने के महात्मा गांधी के सपने को साकार करने के लिए अपने आप को समर्पित कर दिया है. हमें गर्व है कि भारत में हर घर में आकांक्षाएं पल रही है, प्रत्येक भारतीय नए भारत की तरक्की के लिए उत्साहित है. पिछले तीन दिनों में ‘तिरंगे’ के लिए देश में जो उत्साह देखा गया है, कई विशेषज्ञों ने उसकी कल्पना तक नहीं की थी, यह देश के पुनर्जागरण का प्रतीक है।

7. भारत की त्रिशक्ति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि भारत को देखने का दुनिया का नजरिया बदल रहा है. ‘अमृत काल’ इस आकांक्षी समाज के सपनों और लक्ष्यों को पूरा करने का स्वर्णिम अवसर उपलब्ध करा रहा है. ‘हर घर तिरंगा’ हमारे गौरवशाली देश की भावना का जश्न मनाने के लिए पूरे देश के एक साथ आने का उदाहरण है. प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में भारत को सशक्त बना रहीं आकांक्षाओं, पुनर्जागरण और दुनिया की उम्मीदों की ‘त्रिशक्ति’ का जिक्र किया।

8. पीएम मोदी का लाल किले से छलका दर्द

पीएम मोदी का लाल किले से दर्द भी छलका. पीएम मोदी ने कहा, मेरी एक पीड़ा है, मेरा दर्द है. मैं इसे दर्द को देशवासियों के सामने नहीं कहूंगा तो कहां कहूंगा. पीएम मोदी ने कहा, आज किसी न किसी कारण से हमारे अंदर विकृति आई है, हमारे बोल चाल में. हमारे स्वभाव में, हम नारी का अपमान करते हैं. क्या हम स्वभाव से, संस्कार से, रोजमर्रा की जिंदगी में नारी को अपमानित करने वाली हर बात से मुक्ति का संकल्प ले सकते हैं. नारी का गौरव राष्ट्र के सपने पूरे करने में बहुत बड़ी पूंजी बनने वाला है, ये सामर्थ्य में देख रहा हूं।

9. जय अनुसंधान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले के प्राचीर से एक नया नारा दिया है. लाल बहादुर शास्त्री ने जय जवान, जय किसान का नारा दिया था. इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने इसमें जय विज्ञान जोड़ा. और अब इसमें जय अनुसंधान जोड़ने का समय आ गया है. अब जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान और जय अनुसंधान हो. जब हम अपनी धरती से जुड़ेंगे तभी तो ऊंचा उड़ेंगे और जब ऊंचा उड़ेंगे तभी तो विश्व को समाधान दे पाएंगे।

10. नर में नारायण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि हम जीव में भी शिव देखते हैं, हम वो लोग हैं जो नर में नारायण देखते हैं, हम वो लोग हैं जो नारी को नारायणी कहते हैं, हम वो लोग हैं जो पौधे में परमात्मा देखते हैं. ये हमारा सामर्थ्य है, जब विश्व के सामने खुद गर्व करेंगे तो दुनिया करेगी. हमने देखा है कि कभी कभी हमारी प्रतिभा भाषा के बंधनों में बंध जाती है. ये गुलामी की मानसिकता का परिणाम है. हमें हमारे देश की हर भाषा पर गर्व होना चाहिए।

11. नारियों का योगदान और बलिदान

जब तनाव की बात होती है तो लोगों को योग दिखता है, सामूहिक तनाव की बात होती है तो भारत की पारिवारिक व्यवस्था दिखती है. संयुक्त परिवार की एक पूंजी सदियों से हमारी माताओं के त्याग बलिदान के कारण परिवार नाम की जो व्यवस्था विकसित हुई, ये हमारी विरासत है जिसपर हम गर्व करते हैं।

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