आरओ एवं वाटर कूलर खराब होने की वजह से रस्तोगी नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं की तबीयत हुई खराब, उल्टी दस्त से पीड़ित छात्राओं के स्वास्थ्य की जानकारी ली कलेक्टर एवं एसपी ने…
दुर्ग। रस्तोगी कॉलेज में आवासीय छात्रावास में कुछ छात्राओं की उल्टी दस्त होने की शिकायत के बाद हाईटेक अस्पताल में भर्ती होने की सूचना मिलने पर कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा एवं एसपी डॉ अभिषेक पल्लव हॉस्पिटल पहुंचे। इससे पूर्व अस्पताल प्रबंधन ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को इसकी जानकारी दी थी एवं उनकी टीम ने भी मौके पर पहुंच कर छात्राओं की तबीयत की स्थिति जानी थी। कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा ने हॉस्पिटल में व्यवस्थाओं की जांच के निर्देश दिए थे।
जांच में पाया गया कि वाटर कूलर और आरओ खराब स्थिति में थे जिसकी वजह से पानी खराब था और छात्राओं की तबीयत खराब हुई। जांच में पाया गया कि पानी खराब होने की वजह से छात्राओं की तबीयत खराब हुई। कलेक्टर ने बताया कि इस संबंध में हॉस्टल प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है। एक छात्रा की मृत्यु भी हुई है। इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।
ज्ञात हो कि रस्तोगी नर्सिंग कॉलेज की करीब 60 छात्राएं फूड प्वाइजनिंग की शिकार हो गई हैं। सभी छात्राओं को नेहरू नगर के हाईटेक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसमें से एक छात्रा की मौत हो गई है। 46 छात्राओं का अस्पताल में इलाज चल रहा है। वहीं शेष 13 छात्राएं ठीक हो गई हैं।
प्राप्त जानकारी अनुसार नर्सिंग कॉलेज में 300 छात्राएं हॉस्टल में रहकर एएनएम और नर्सिंग का कोर्स कर रही हैं। 4 दिन पहले कुछ छात्राओं को फूड प्वाइजनिंग की शिकायत हुई थी। प्रबंधन ने उन्हें उपचार के लिए हॉस्पिटल में भर्ती कराया। इसके बाद एक-एक कर और भी छात्राओं की तबीयत बिगड़ती चली गई। छात्राओं ने बताया कि यहां ढंग का खाना नहीं दिया जा रहा था।
कॉलेज प्रबंधन पिछले तीन दिनों से यह मामला दबाया हुआ था लेकिन चौथे दिन जब बालोद निवासी कामिनी की डेथ हुई तो मामला आग की तरह पूरे क्षेत्र में फैल गया। जानकारी मिलते ही भिलाई नगर निगम महापौर नीरज पाल, आयुक्त लोकेश चंद्राकर, उपायुक्त अशोक द्विवेदी, वरिष्ठ पार्षद वशिष्ठ नारायण मिश्रा आदि पहुंचकर छात्राओ का हाल जाना।
रस्तोगी कॉलेज के महिला छात्रावास (वी-1) में 200 छात्राएं अध्ययनरत हैं। जिसके तहत जांच में छात्रावास का भी निरीक्षण किया गया। नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी व उनकी टीम ने आरओ के पानी और वाटर कूलर के पानी को क्लिनिकल जांच के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, दुर्ग सैंपल लेकर भेजा गया है।
दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) गरीब ग्रामीण युवाओं को नौकरियों में नियमित रूप से न्यूनतम मजदूरी के बराबर या उससे ऊपर मासिक मजदूरी देने का लक्ष्य रखता है। यह ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए की गई पहलों में से एक है।
योजना के तहत बीपीएल कार्डधारी परिवारों के बच्चों को चुने हुए ट्रेड में प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण देने के बाद जहां मांग होती है, वहां इनको रोजगार भी दिया जा रहा है। लगातार योजना के तहत जिला में सैकड़ों बच्चे हर छह माह में प्रशिक्षण लेकर निकल रहे हैं। एक बेच में 35 बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाना है।

छत्तीसगढ़ के अलग-अलग गांव से छात्राएं प्रशिक्षण लेने के लिए दुर्ग में पहुंची हुई हैं। अस्पताल में दाखिल छात्राओं ने बताया कि कोर्स के तहत पढ़ाई बेहतर हो रही है। तबीयत बिगड़ जाने से प्रशिक्षण प्रभावित हो रहा है। खाने की व्यवस्था को घर जैसा साफ रखने की जरूरत है। पानी की भी प्रबंधन जांच कर ले तो बेहतर होगा।















