विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शनिवार को कहा है कि 70 से अधिक देशों में मंकीपॉक्स का प्रसार एक वैश्विक आपात स्थिति है, भारत में मंकीपॉक्स के अब तक तीन मामले सामने आ चुके हैं। तीनों ही केरल से हैं…
नईदिल्ली (ए)। मंकीपॉक्स को डब्लूएचओ ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया। यह खतरनाक बीमारी अब तक दुनिया के 70 से अधिक देशों में फैल चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने शनिवार को 70 से अधिक देशों में फैले मंकीपॉक्स को ग्लोबल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने बताया कि अभी तक मंकीपॉक्स के 16 हजार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। वैश्विक और क्षेत्रीय दोनों स्तरों पर यह पैर पसार रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय क्षेत्रों में अधिक जोखिम का आकलन किया गया है। वायरस के दशकों तक अफ्रीकी महाद्वीप तक सीमित रहने के बाद मई से यह उन देशों में भी पैर पसारने लगा है जहां इसका नामोनिशान नहीं था।
डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रसार का जोखिम जरूर है लेकिन यातायात में हस्तक्षेप का जोखिम फिलहाल कम है। उऩ्होंने कहा कि इसका ट्रांसमिशन नए-नए तरीकों के जरिए हो रहा है, जिसके बारे में हमे बहुत कम जानकारी है। इसी को ध्यान में रहते हुए संगठन ने मंकीपॉक्स को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने का फैसला किया है।
इसको लेकर डब्लूएचओ महानिदेशक डॉ. टेड्रोस ए. घेब्रेयसस के मुताबिक मंकीपॉक्स के अभी तक 16 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। आइए एक नजर डालते हैं उन खास वजहों पर जिसके चलते मंकीपॉक्स को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया गया है।
वजह नंबर 1 डब्लूएचओ के महानिदेशक के मुताबिक यह कदम उठाने के पीछे सबसे बड़ी वजह है, इस बीमारी का उन देशों में पहुंचना, जहां अभी तक यह नहीं थी। डॉ. टेड्रोस ए. घेब्रेयसस के मुताबिक कई ऐसे देशों से जानकारी सामने आई जो चौंकाने वाली रही। इनमें से कई देशों में ऐसे मामले कभी नहीं देखे गए।
वजह नंबर 2 डब्लूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस ए. घेब्रेयसस के मुताबिक किसी बीमारी को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने के लिए तीन क्राइटेरिया हैं। मंकीपॉक्स को लेकर यह तीनों क्राइटेरिया पूरे होते हैं।
वजह नंबर 3 इसके अलावा इमरजेंसी कमेटी ने इस बार बीमारी को लेकर चिंता जताई थी। डॉ. टेड्रोस ए. घेब्रेयसस ने बताया कि जब हम पिछले महीने मिले थे 47 देशों में केवल 3,040 केस ही थे। लेकिन इस पर न सिर्फ देशों की संख्या बढ़ चुकी है, बल्कि सिर्फ एक महीने के अंदर केसेज की संख्या बढ़कर 5 गुना हो चुकी है।
वजह नंबर 4 चौथे कारण की तरफ इशारा करते हुए डब्लूएचओ चीफ ने कहा कि मंकीपॉक्स को लेकर वैज्ञानिक सिद्धांत, सबूत और अन्य जरूरी सूचनाएं उपलब्ध नहीं हैं। टेड्रोस ने कहा कि संक्षेप में, हम एक ऐसी महामारी का सामना कर रहे हैं जो संचरण के नये माध्यमों के जरिये तेजी से दुनिया भर में फैल गई है। इस रोग के बारे में हमारे पास काफी कम जानकारी है और यह अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमन की अर्हता को पूरा करता है।
वजह नंबर 5 पांचवीं वजह, इंसान के स्वास्थ्य को खतरा, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैलती बीमारी और अलग-अलग देशों तक हो रहा फैलाव है। डब्लूएचओ मुखिया ने बताया कि यही वजह रही कि मंकीपॉक्स को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया गया है।
भारत में यह हाल भारत में अभी तक केरल में मंकीपॉक्स के तीन मामले सामने आने के बाद केंद्र सरकार अलर्ट हो गई है। इसके साथ ही भारत में एयरपोर्ट पर निगरानी का फरमान जारी कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक यह तीनों ही मामले दूसरे देशों से लौटे यात्रियों के हैं। गौरतलब है कि इस रोग को वैश्विक आपात स्थिति घोषित करने का यह मतलब है कि मंकीपॉक्स का प्रकोप एक असाधारण घटना है। यह रोग कई अन्य देशों में भी फैल सकता है तथा एक समन्वित वैश्विक प्रतिक्रिया की जरूरत है।
चेचक के टीके को मंकीपॉक्स के खिलाफ इस्तेमाल की तैयारी यूरोपियन मेडिसिन्स एजेंसी’ (ईएममए) ने शुक्रवार को कहा कि बवेरियन नॉर्डिक की ओऱ से बनाए गए चेचक के टीके को मंकीपॉक्स के खिलाफ इस्तेमाल के लिए भी अधिकृत किया जाए, क्योंकि इस दुर्लभ बीमारी का प्रकोप पूरे महाद्वीप में लोगों को बीमार बना रहा है। यूरोपीय संघ के दवा नियामक ने कहा कि इसकी सिफारिश जानवरों के अध्ययन पर आधारित है, जो सुझाता है कि टीका गैर-मानव ‘प्राइमेट’ को मंकीपॉक्स से बचाता है।















